ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
सर्वज्ञता की खोज का मिशन
CATEGORY : सिंगापुर की डायरी 01-Aug-2016 12:00 AM 380
सर्वज्ञता की खोज का मिशन

आज़ादी के सही मायने आखिर हैं क्या? क्या सिर्फ नारे लगाने की छूट या बस अपने मन का करने की छूट को ही आज हम आज़ादी से जोड़ते हैं? क्या आजादी का सही अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि आप अपने देश या इस यूनिवर्स के लिए कुछ करें! कुछ ऐसा जिससे पूरी मानवता को गर्व हो।
ऐसा ही एक विज्ञान है जिसे सर्वज्ञता (Omniscience) कहा जाता है। और इस सोच को बढ़ाने का बीड़ा एक ऐसे व्यक्ति ने उठाया है जो पेशे से तो कारोबारी हैं पर हर जगह महज़ धन का मुनाफ़ा नहीं देखते बल्कि मानवता के लिए कुछ करना चाहते हैं। सिंगापुर के कारोबारी निवेशक डॉ. भूपेन्द्र कुमार मोदी जो सिंगापुर के पचास अमीरों की श्रेणी में हैं। वे "स्मार्ट समूह" के संस्थापक होने के नाते अपने कारोबार से तो अपना परचम लहरा ही रहे हैं। उनकी कंपनी वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे विविध क्षेत्रों में अपना व्यापारिक संगठन मजबूत कर चुकी है। भारत, सिंगापुर के अलावा, चीन, अफ्रीका, ब्रिटेन, व आसियान देशों में भी उनके कारोबार की भागीदारी है। उन्होंने अपनी जन्मभूमि के लिए एक नई पहल व्यापार में भी कर दिखाई है। उन्होंने "स्मार्ट ड्रीम्ज" ब्रांड के तहत इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार में अपना कदम रखने की घोषणा की है। स्मार्ट ड्रीम्ज का उद्देश्य भारतीय सड़कों पर सस्ता, प्रदूषण मुक्त विश्वस्तरीय परिवहन उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य और खुशहाल भारत की बात करते हुए कंपनी ने कई वादे किए हैं। स्मार्ट डीम्ज भारत की पहली आटोमोबाइल कंपनी है जिसने भारत की राजधानी में प्रदूषण और लोक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती चिंता के ख्याल से और स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त भारत का सरकारी लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अपनी वचनबद्धता दिखाई है और फ्री ट्रायल के लिए दिल्ली सरकार को दो प्योर-इलेक्ट्रिक बसें दी है। फिलहाल दिल्ली परिवहन निगम द्वारा पूर्व-निर्धारित व्यावसायिक मार्ग पर इन बसों का परीक्षण किया जा रहा है।
इतने बड़े कारोबारी का एक दूसरा पहलू भी है जिससे हमें रूबरू होने की आवश्यकता है। आज के तकनीकी युग में कुछ भी जानना शेष नहीं रह गया है तो ऐसी स्थिति में उस सब कुछ को अगर एक सही रूप दिया जाए तो अवश्य ही बहुत अच्छा होगा। डॉ. बी.के. मोदी जो डॉ. एम के नाम से मशहूर हैं इसी ओमनीसाइंस से लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वे ग्लोबल सिटिज़न फ़ोरम के संयोजक हैं जो सीमाओं-सरहदों के बिना एक दुनिया बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्हें "यूनिवर्सल पीस फेडरेशन" द्वारा "शान्ति के लिए राजदूत" नामक़ उपाधि से समानित किया गया है। तकनीक के माध्यम से कृत्रिम सीमाओं और असली दुनिया के बीच की खाई को पाटने के लिए वैश्विक नागरिक फोरम, डॉ. मोदी द्वारा शुरू किया गया। उनकी गहरी रुचि है Omniscience में और इसी सर्वज्ञता से लोगों को भी परिचित करवाना चाहते हैं। धर्म आखिर है क्या, हमारे रिवाज़ क्या उनका कोई बुनियादी मूल्य है, क्या हर बात के लिए भगवान को ज़िम्मेदार ठहराया जाना उचित है? ऐसे ही कई प्रश्न, जो शायद सोचता हर कोई है पर जवाब न तो ख़ुद ढूंढ पाता है न किसी को बता पाता है। डॉ. मोदी यही चाहते हैं कि लोग सत्य जानें। इस सर्वज्ञता के द्वारा लम्बे समय से लिंग, राष्ट्रीयता, धर्मं आदि के नाम पर विभाजित विश्व को, समाज की रचना को महत्व दिया जाता है। ज्ञान मन की विशेषता है और सर्वज्ञता हमें, साहसी, असीम सपने देखने और बहुत बड़ा सोचने वाली बनाती है जो हमारे जीवन को हर्षित, स्वस्थ और समुद्ध बनाता है। यह वैश्विक गठबंधन की नींव हो सकती है जिससे सकारात्मकता और समृद्धि संभव है। हमें बस यही सोच तो आगे बढ़ानी है कि सब कुछ एक ही है। धर्म आदि के कारण जो भेद दुनिया में पैदा हो गया है उसका कारण अज्ञानता है। अगर सर्वज्ञता इसका स्थान ले ले तो ये सारी चीज़ें ख़ुदबख़ुद मिट जाएंगी। "ओह माई गॉड" नामक फ़िल्म और "बुद्ध" नामक टीवी सीरियल के निर्माण में सहायता देकर डॉ. मोदी ने Omniscience को समर्थन दिया है। जो भी है जिसे जाना जा सकता है Omniscience हमें वह सब जानने को अग्रसर करता है। इसी साल "ग्लोबल सिटिज़न फोरम" के द्वारा विवेकानंद सेवा संघ और इन्डियन कौंसिल फॉर रिलिजियस लीडर्स के सहयोग से Omniscience फॉर ए हैप्पी लाइफ नामक समारोह आयोजित किया गया जिसमें आज के तकनीकी युग में किस प्रकार सर्वज्ञता का बेहतर लाभ उठाकर अपने जीवन को और खुशहाल बनाया जाए पर जोर दिया गया। आज हम बहुत कुछ जानते हैं पर वह कहाँ तक सत्य है और वैज्ञानिक रूप से दुनिया और उसमें हमारे अस्तित्व को जानना सर्वज्ञता का ही रूप है। फरवरी में भारत में समारोह होने के बाद मार्च में डॉ. मोदी सिंगापुर के कई भारतीय लोगों व समूहों से मिलें और सर्वज्ञता को बढ़ाने की ओर एक और कदम बढ़ाया। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं जैसे- वन गॉड, हिन्दुज्म- द यूनिवर्सल टØथ, परफोर्मेंस- अ मैनेजर्स चैलेन्ज, विस्पर ऑफ़ पीस आदि।
अगस्त भारत की आज़ादी का महीना ही नहीं है बल्कि सिंगापुर की आज़ादी का महीना भी है और इस महीने एक ऐसे शख्स से अधिक परिचित होना जिसने अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों को बराबरी का दर्ज़ा दिया हो सटीक है।

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