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संजीव त्रिपाठी
संजीव त्रिपाठी
21 सितम्बर 1969 को ग्राम पीपरी, भिण्ड, मध्यप्रदेश में जन्म। जीवाजी वि·ाविद्यालय, ग्वालियर से विज्ञान में स्नातक, बरकतुल्लाह वि·ाविद्यालय, भोपाल से कंप्यूटर एप्लीकेशंस में स्नातकोत्तर और ब्रोंडाइस यूनिवर्सिटी, अमेरिका से सूचना प्रोद्यौगिकी प्रबंधन में स्नातकोत्तर। साहित्य और काव्य लेखन में विशेष रुचि। अक्षयपात्र और अन्य समाज सेवी संस्थाओं से जुड़े रहे है। सम्प्रति- बोस्टन, अमेरिका में रहते हैं।

मजबूत होता लोकतंत्र
यूँ तो भारत स्वतंत्रता के बाद से ही एक लोकतांत्रिक देश है और हर स्तर पर सरकार का चयन जनता के द्वारा होता है। इस लोकतंत्र की खातिर ही तो लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बहुत लम्बी लड़ाई लड़ी, कठिन यातनायें सहीं और हजारों ने अपने प्राणों को आहुत
आध्यात्म इस लोक का
आमतौर पर जब भी आध्यात्म की बात चलती है तो उसे वैराग्य, धर्म और परलोक से जोड़कर देखा जाता है। अलग-अलग विद्वान इस शब्द का अपने-अपने सन्दर्भ के हिसाब से व्याख्यान करते है और वह आम लोगों की समझ से परे होता है। इस भौतिक जगत में रहते हुये अपनी जिम्मेदारि
असाधारण सफलता का सफ़र
यह कहानी एक ऐसे अप्रवासी भारतीय उद्यमी की है जिसने अपनी पहली कंपनी (उद्यम) "कोरल नेटवक्र्स' सन 1988 में शुरू की और 1990 में दो वर्ष के बाद मात्र 26.95 डालर में बेच दी थी। इस उद्यमी ने बेचने से मिले उस चेक की प्रति को कांच में जड़वाकर अपने पास रखा ह
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