ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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ट्रिनिडाड में प्राइमरी स्कूल शिक्षा प्रणाली

ट्रिनिडाड में प्राइमरी स्कूल सात वर्ष का होता है। यहां पर शिक्षा ब्रिटिश सिस्टम के अनुसार होती है। पहले दो वर्ष को फस्र्ट ईयर और सेकंड ईयर बोलते हैं तथा उसके बाद स्टैंडर्ड वन (कक्षा 1) से लेकर स्टै

इज़रायल में हिंदी क्यों

क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से इज़रायल एक छोटा-सा देश है। इज़रायलवासी स्वयं इसे "मानचित्र पर बिंदु" कहा करते हैं। पर यदि इस छोटे से देश की सड़कों पर घूमें, तो उतनी सारी भाषाएँ और बोलियाँ सुनने में

विद्रोह की गाथाओं के गायक हरबोले

हरबोला कई स्रोतों और दिशाओं से उद्गमित और विकसित एक लोकगाथा गायक जाति है। किसी एक पहचान में बाँधकर इनका पूरा परिचय नहीं दिया जा सकता। ये लोग स्वयं को अहीर बताते हैं, क्योंकि गाथा गायन और भिक्षाटन क

विश्व का एकमात्र अंक-काव्य सिरि भूवलय

विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है भाषा। मानव का मानव से संपर्क माध्यम है भाषा। किंतु भाषा क्या है? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? मानव ध्वनि संकेतों के सहारे अपने भावों और विचारों की अभिव्यक्ति कर

जर्मन से हिंदी में अनुवाद : इतिहास व सवाल

जर्मन भाषा में भारतीय रचनाओं के अनुवाद का क्रम कई शताब्दियों पुराना है, वहीं जर्मन साहित्य का हिन्दी रूपांतरण भी 20वीं सदी से निरंतर जारी है। योहन वोल्फगांग फॉन गोएथे की महान रचना "फाउस्ट" को 1930

इण्डो-ऐंग्लियन्स

भारत में एक प्रभावशाली जनसांख्यिकीय अथवा मनोवैज्ञानिकता का उद्भव हो रहा है और यह संपन्न, शहरी और उच्च शिक्षित है। 2012 या 2013 के आसपास, मेरी बेटियों ने हमारी मातृभाषा कोंकणी में बातचीत करना बंद कर

कफ़न मृत्यु नहीं, जीवन की कहानी है

कफ़न (दिसंबर 1935) कहानी प्रेमचंद की सबसे अधिक चर्चित, विवादास्पद एवं लोकप्रिय कहानी है। कफ़न कहानी पर जितने दृष्टिकोणों, विचारों और वादों से विचार विवेचन हुआ है, यदि उसे यहाँ उद्धृत किया जाये तो एक

प्रवासी महिला कहानी लेखन में गाँव

ग्राम या देहात में रहने वाला ग्रामीण या देहाती कहलाता है। भारत की 70 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में रहती है। भारत में अगर चालीस करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं, तो इनमें से अधिकांश ग्रामीण हैं।

गांधी जी और पत्रकारिता

गांधी जी ने पत्रकारिता को कभी एक व्यवसाय के रूप में
स्वीकार नहीं किया। वे एक मिशनरी पत्रकार थे और
वे इस बात को अच्छी तरह समझते थे कि उनके
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दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन राष्ट्रभाषा की वैश्विक यात्रा को लगे पंख

अभी तक चर्चा का विषय रहता था ""सूचना प्रौद्योगिकी में हिन्दी"", परन्तु इस सम्मेलन के फलस्वरूप दिशा परिवर्तन हो गया है और अब विमर्श का विषय बनेगा ""हिन्दी में सूचना प्रौद्योगिकी""। ये प्रतिक्रिया थी

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