ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
रेखा मैत्र
रेखा मैत्र
जन्म बनारस में. सागर वि¶वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए. किया. मुंबई विवि से टीचर्स ट्रेनिंग में डिप्लोमा. अमरीका में बसने के बाद गवर्नेस स्टेट यूनिवर्सिटी से ट्रेनिंग कोर्स किए. मले¶िाया भी रहीं और यहीं से कविता-लेखन ¶ाुरू हुआ. फिलहाल अमरीका में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़ी साहित्यिक संस्था "उन्मेष' के साथ सक्रियता से जुड़ी हैं. वाणी प्रका¶ान से 11 कविता संग्रह प्रका¶िात। अधिकां¶ा कविताएँ बंग्ला और अंग्रेजी में अनुवादित तथा अमेरिका के हिंदी कवियों की प्रका¶िात पुस्तक "मेरा दावा है' और "प्रवासिनी के बोल' में भी रचनाएँ सम्मिलित.

अनावरण आदतें

अनावरण
परत-दर-परत
मैं खोलती गई
तुम्हारा दिया उपहार!

पहले जिज्ञासा ने
उसे देर तक उकेरा
फिर संशय जागा
ऐसा क्या है इसमें?
जो इतने सारे आवरण हैं।

तब भ

परकटी चिड़िया एक और पड़ाव

परकटी चिड़िया


क्या बिगड़ गया
जो पंख कट गया
अब भी देखो
घूमती हूँ मस्ती से!

न हुआ आसमान
ज़मीन ही सही
परवाज़ के लिए
आका&pa

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 10.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^