ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
रंग मंच
01-Nov-2016 12:00 AM 3031     

जरस बज रहा है
गुंबद ऊंचाई का प्रतीक
आधार स्तम्भ
बाहुबलि भुजाएँ

कमल मकरंद से सुरभित
मूर्तिमान देवता
वैभव के रसिया पुजारी
रूप के दीवाने पुरोहित

हवाओं पे तैरती तहरीर
जननी की अजमत
आदरणीय नारी जाती
तहरीर के पन्नों में घोंपा छुरा
अनिर्मल रक्स चल रहा है
जरस ज़ोर से बज रहा है

भक्तों का ताँता
केवड़ा कदली की
रौस के पार
बेड़िओं में जकड़ी
देव वधू का
नाच चल रहा है
पूज्य नारी का
उपहास चल रहा है
जरस ज़ोर-ज़ोर से
बज रहा है।

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