ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
रम्य रचना Next
सात जन्मों का बंधन

केवल सात ही क्यों आठ या नौ क्यों नहीं? सवाल टेढ़ा है। पर जाने दो। सवालों का कोई अंत थोड़े ही है। कोई और पूछने लगेगा ग्यारह क्यों नहीं? लेकिन ये बंधन न तो माँ-बाप के साथ होता है न ही भाई-बहनों के साथ।

आधी दुनिया - अधूरी दुनिया

भगवान ने अपनी तरफ़ से बड़े इंतज़ाम के साथ कार्य प्रारम्भ किया था। एक अच्छे सीईओ की तरह उन्होंने दो बराबर के पार्टनर बनाये - आदम और हौव्वा। उनके लिये रोटी, कपड़ा और मकान का पूरा बंदोबस्त किया गया था। उन

नुक़्ता-ए-नज़र बनाम तर्क-कुतर्क

ऊँचाई पर खड़े व्यक्ति को नीचे खड़े लोग बहुत छोटे (चींटियों जैसे) नज़र आते हैं। मज़े की बात ये है कि नीचे वालों को भी ऊँची इमारत, पहाड़ आदि यानि बुलंदी पर खड़ा आदमी उतना ही छोटा दिखाई देता है। यह कमाल है

"द" से देश पर "न" से निबंध

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की अस्सी प्रतिशत जनता गाँवों में रहती है। गाँव के लोग बहुत खुशहाल रहते हैं। भारत के गांव प्राकृतिक सौंदर्य से भरे पूरे होते हैं - हरियाली से सजे हुए, शांति से परिपू

बहुत नाइंसाफी है

देखिये साहब नाइंसाफी तो हुई है। इस बात से क़तई इंकार नहीं किया जा सकता कि समाज के एक समूचे वर्ग के साथ अन्याय किया गया है। कोई भी व्यक्ति पैदाइशी दलित नहीं होता। नेक इरादे से किया गया एक वर्गीकरण सि

पीतल पे सोने का पानी

कभी-कभी विपरीतार्थक शब्द भी बड़े सार्थक होते हैं, जैसे "झूठा सच" और कभी-कभी स्थितिपरक शब्द भी प्रयोग में लाये जाते हैं मुहावरे के तौर पर, जैसे "आँख के अंधे नाम नयनसुख"। ख़ैर नाम में क्या रखा है। नाम

मसला तीन तलाक़ का

इतना शोर-शराबा क्यों है भाई! ग़ौर कीजियेगा हमने शोले फिल्म का मशहूर जुमला "इतना सन्नाटा क्यों है" नहीं इस्तेमाल किया। इसलिये नहीं किया क्योंकि सन्नाटा तो "था" "है" नहीं। मसला दरअसल तलाक़ नहीं शादी है

बेबी, खाना खा लिया?

जैसे हाउस वाइफ होती हैं, याने कि वो महिला जिसकी जिम्मेदारी घर संभालना रहती है। मसलन खाना बनाना, कपड़े धोना एवं घरेलू कार्य करना। वह कहीं काम पर नहीं जाती है। उस पर कमाने की जिम्मेदारी नहीं होती है।

भारतवंशी और भारतीयता

व क़्त की रफ़्तार भी अजीब है। कभी सुस्त (जब बोरियत
हो) तो कभी तेज़ (जब ख़ुशगवारी हो)। देखो ना, अभी
पिछले साल ही तो नौ जनवरी को प्रवासी दिवस मनाया था। लो, अब फिर सामने आ खड़ा हुआ। ऐ उम्र-ए-रव

मन की हार और जीत!

क ल शाम पाँच बजे बेटे के घर से अपने घर जाने के
लिए निकलने के पहले खिड़की से झाँक कर देखा तो
हर तरफ एकदम अँधेरा एवं सड़कों पर सन्नाटा दिखा। सर्दियों की शाम वो भी शनिवार को। यही माहौल होता

गर्म हवा

जाड़े का मौसम आ गया यारों लेकिन हवा गर्म है। आप पूछेंगे भई ये क्या बात हुई? बताते हैं, पहले हम तो समझ लें। बरसात का धूप से कुछ लेना-देना नहीं होता। सर्दियों का भी तपती लू से कोई संबंध नहीं होता। परन

पॉकेट में क्या रखा है!

जबसे सुना हूँ कि पॉकेट में क्या रखा है, सब कुछ तो ब्रीफ़केस में है भाई! तबसे मेरा ध्यान बरबस पॉकेट पर ही जाता रहता है; क्योंकि "ब्रीफ़केस" तो हम लोगों के वश की बात है नहीं। जब भी कपड़ा बदलता हूँ या पह

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 12.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^