ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
रम्य रचना Next
गर्म हवा
गर्म हवा

जाड़े का मौसम आ गया यारों लेकिन हवा गर्म है। आप पूछेंगे भई ये क्या बात हुई? बताते हैं, पहले हम तो समझ लें। बरसात का धूप से कुछ लेना-देना नहीं होता। सर्दियों का भी तपती लू से कोई संबंध नहीं होता। परन ...

01-Dec-2017 06:47 PM 2
पॉकेट में क्या रखा है!
पॉकेट में क्या रखा है!

जबसे सुना हूँ कि पॉकेट में क्या रखा है, सब कुछ तो ब्रीफ़केस में है भाई! तबसे मेरा ध्यान बरबस पॉकेट पर ही जाता रहता है; क्योंकि "ब्रीफ़केस" तो हम लोगों के वश की बात है नहीं। जब भी कपड़ा बदलता हूँ या पह ...

01-Dec-2017 06:44 PM 2
पर्यावरणी वरण
पर्यावरणी वरण

परे हट यार! तुझे कब वरण करना चाहा मैंने! मुझे तो तू फूटी आँख भी नहीं सुहाता। उस पर न जाने कहाँ से पकड़ लाए ख़र-दूषण (प्रदूषण) को और हिलगाए रहता है। सचमुच में मेरा-तेरा दूर-दूर तक कुछ मेल नहीं खाता। फ ...

01-Dec-2017 06:41 PM 2
ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है
ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है

एक ज़माने में इंग्लैंड का चर्च वहां के राजा से भी ज़्याद शक्तिशाली हुआ करता था। इतना ज़्यादा कि 1936 में एडवर्ड आठ को अपनी पसंद की लड़की (वालिस सिम्पसन) से शादी करने के लिये ताज-ओ-तख्त छोड़ना पड़ा। हाँ स ...

01-Nov-2017 03:43 PM 122
धर्म के बाबा और बाबाओं का धर्म
धर्म के बाबा और बाबाओं का धर्म

भारत हमेशा से ही एक धर्मपरायण और धर्मनिष्ठ देश रहा है। आज भी है। फर्क केवल इतना है कि धर्म के प्रति जन जन में आस्था पैदा करने के लिए आज इसकी परिभाषा को सरल-सहज कर दिया गया है। धर्म वह है जो धारण कि ...

01-Nov-2017 03:38 PM 116
नारायण! नारायण!!
नारायण! नारायण!!

एक हाथ में तानपूरा, दूसरे में या तो खड़ताल या कमंडल (ज़रूरत पर निर्भर करता है)। अधखुली आँखों में ज्ञान की रौशनी और ज़ुबान पर भगवान का नाम। कौन से भगवान का - यह निर्भर करता है उनकी आस्था पर - हे भगवान, ...

01-Oct-2017 01:20 PM 233
दवा दी न गयी, दर्द बढ़ा दिया
दवा दी न गयी, दर्द बढ़ा दिया

कोई भी दिवस बना कर मना लो, माँ-दिवस, बाप-    दिवस, भाई, बहन, दोस्ती, वेलेन्टाइन, आई लव यू दिवस! भैये ये रिश्ते नाते और प्यार के उद्गार, यानि भांति -भांति के दिवस कोई होली, दिवाली, क् ...

01-Sep-2017 03:44 PM 318
हिंदी में पाठ का संकट
हिंदी में पाठ का संकट

सर क्या आपको नहीं लगता कि बरसों से एक ही तरह का पाठ पढ़ाया जा रहा है, जिसमें कुछ संसोधन कर दिया जाय तो बेहतर हो जाता?
एक यक्ष प्रश्न का जवाब चाह रही थीं वो। "वो" यानि कुछ बरसों का संचित शिक्षकी ...

01-Sep-2017 03:39 PM 305
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं

बड़ा मुश्क़िल सवाल है साहब! याद करना - मतलब सबक़ याद करना तो मुश्किल था ही, अब पता चला है कि भूलना उससे भी कठिन काम है। याद की बात पर आपको बता दें कि बचपन में पाठ याद ना करने पर मास्टरनी जी मुर्गा बना ...

01-Aug-2017 11:26 PM 563
लोक की कथाएँ और व्यथाएँ
लोक की कथाएँ और व्यथाएँ

एक बार की बात है... सुनते ही कान खड़े हो जाते हैं। भाइयों और बहनों! इस असार संसार में सर्वाधिक सारगर्भित बात वह होती है जो एकदम सस्ती सुन्दर और टिकाऊ होती है। हम या आप में से कितने लोग शोध ग्रन्थ पढ़ ...

08-Jul-2017 08:16 PM 597
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