ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
रमेश जोशी
रमेश जोशी
18 अगस्त 1942 को चिड़ावा, राजस्थान में जन्म। राजस्थान वि·ाविद्यालय से एम.ए. और रीजनल कालेज ऑॅफ एज्यूकेशन भोपाल से बी.एड., पोरबंदर से पोर्ट ब्लेयर तक घुमक्कड़ी, प्राथमिक शिक्षण से प्राध्यापकी करते हुए केन्द्रीय विद्यालय जयपुर से सेवानिवृत्त। संप्रति : अमरीका में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की त्रैमासिक पत्रिका "वि·ाा' के प्रधान संपादक। मूलत: व्यंग्यकार, गद्य-पद्य की 6 पुस्तकें प्रकाशित। ब्लॉग : jhoothasach.blogspot.com
10046, Parkland Drive Twinsgburg, OH-44087 , Twinsgburg, USA
लोक मतलब सामूहिकता और समानता
01-Mar-2017 08:34 PM 485 लोक मतलब सामूहिकता और समानता

सन् दो हजार में पहली बार अमरीका जाना हुआ। अमरीकी राज्य ज्योर्जिया की राजधानी अटलांटा की धरती पर पाँव रखते ही एक रोमांच-सा हुआ। 1965 में अमरीका में गोरे अमरीकियों के गुलाम रह चुके अफ़्रीकी मूल की नीग

देखणा सो भूलणा नहीं
01-Feb-2017 12:30 AM 622 देखणा सो भूलणा नहीं

जीव का मूल स्वभाव है जिज्ञासा। यह उसकी मूलभूत जैविक आवश्यकताओं के कारण भी हो सकती है और मानसिक व वैचारिक ज़रूरतों के तहत भी। यह जिज्ञासा ही जीव को घुमाती है, सिखाती है और भटकाती भी है। परिस्थितिवश य

उत्सव और उल्लास के बीच
01-Jan-2017 12:02 AM 1255 उत्सव और उल्लास के बीच

मनुष्य एक उत्सव-धर्मी जीव है लेकिन यह उत्सव-धर्मिता उसकी सुरक्षा, समृद्धि और विश्वास पर निर्भर करती है। जिस साल फसल खराब हो जाती है तो किसान के लिए दिवाली का कोई अर्थ नहीं रह जाता। आतंक, अनास्था और

अतियों के बीच झूलता अमरीकी समाज
01-Dec-2016 12:00 AM 1278 अतियों के बीच झूलता अमरीकी समाज

मूल रूप से अमरीकी समाज सनक की सीमा तक पहुंचा हुआ समाज है जिसकी अपनी कुंठाओं से मुक्ति नहीं हुई है। वैसे तो हर समाज की अपनी कुंठाएँ होती हैं और उसे उनसे मुक्त होते हुए अपने अस्त्तित्व पर खतरा लगता ह

प्रवास के मंतव्य और मानसिकता
01-Nov-2016 12:00 AM 2095 प्रवास के मंतव्य और मानसिकता

आदिमकाल में मनुष्य का कोई निश्चित स्थान नहीं था और राष्ट्र जैसी अवधारणा तो कतई नहीं थी। भोजन के लिए पशुओं का पीछा करता या पशुपालन युग में अपने पशुओं के लिए चरागाहों और पानी की तलाश में मनुष्य जाने

भय का व्यवसाय
01-Oct-2016 12:00 AM 2464 भय का व्यवसाय

दवा कंपनियों से मिलकर डॉक्टर तरह-तरह की बीमारियों से डराते रहते हैं। स्वाइन फ्लू का डर भी इसी योजना का एक भाग था। अमरीका में भी स्वाइन फ्लू से ज्यादा लोग साधारण फ्लू से हर वर्ष मरते हैं। भारत में भ

आदमी का विकल्प नहीं हो सकता
01-Sep-2016 12:00 AM 2466 आदमी का विकल्प नहीं हो सकता

जीवित होने का प्रमाण-पत्र जमा करवाने लगभग नौ महीने बाद बैंक गया। कारण एक तो पास बुक भरने वाली थी दूसरे कई महीने की प्रविष्टियाँ बाकी थीं। देखा, बैंक में कई परिवर्तन हो गए हैं। नौ महीने कम नहीं होते

स्वच्छंदता के उपफल
01-Aug-2016 12:00 AM 287 स्वच्छंदता के उपफल

आदमी समस्त सृष्टि पर तो नियंत्रण नहीं कर सकता लेकिन अपने समाज, परिवार और अपने संपर्क में आने वाले सभी मनुष्यों, पशु-पक्षियों और यहाँ तक कि प्रकृति के अवयवों और उपादानों से भी अपनी और अपने समाज की व

दास कबीर जतन ते ओढ़ी
01-Jun-2016 12:00 AM 1218 दास कबीर जतन ते ओढ़ी

कबीर ने मानव देह का झीनी चादर का प्रतीक लेकर एक अति स¶ाक्त साँग-रूपक रचा है जिसके अंत में वे अन्यों और स्वयं के बारे में जो धाकड़ घोषणा करते हैं वह गर्वोक्ति नहीं, एक सिर चढ़कर बोलने वाला सच है।

पानी बिच मीन पियासी
01-May-2016 12:00 AM 1077 पानी बिच मीन पियासी

प्रकृति में हर तरह का स्वतः प्रबंधन है- जल, मल, जनसंख्या, विभिन्न जीवों का संतुलन आदि। लेकिन मनुष्य की विकास की नई अवधारणा के कारण प्रकृति की इस व्यवस्था को कई तरह से प्रभावित किया है- सकारात्मक कम

कुम्भ और कुम्भीपाक
01-Apr-2016 12:00 AM 180 कुम्भ और कुम्भीपाक

समुद्र-मंथन से अमृत निकलता है और विष-वारुणी भी। जब विष्णु वि?ामोहिनी का रूप धारण करके धोखे से दानवों को वारुणी और देवों को अमृत पिलाते हैं तो वे एक ही बर्तन में अन्दर से दो भाग करके अमृत और वारुणी

नेक्स्ट टू गॉडलीनेस
01-Mar-2016 12:00 AM 185 नेक्स्ट टू गॉडलीनेस

सफाई के बारे में अंग्रेजी कहावत है- क्लीनली नेस इज नेक्स्ट टू गॉडलीनेस। ई?ार के बाद सफाई ही सबसे महत्त्वपूर्ण है। वैसे तो ई?ार भी सफाई पसंद करता है- मन की सफाई, विचारों की सफाई, कर्मों की सफाई, वाण

बंदूक की संस्कृति
01-Feb-2016 12:00 AM 192 बंदूक की संस्कृति

अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा अमरीका में जब-तब अकारण होने वाले हादसों के सन्दर्भ में बंदूक-संस्कृति को अनुशासित करने के बारे में जब बोल रहे थे तो उनके आँसू छलक पड़े। जिसे प्याज से लाए नकली आँसू भी कहा

अमेरिका में प्रवासी भारतीय
01-Jan-2016 12:00 AM 140 अमेरिका में प्रवासी भारतीय

जेसे मानवेतर जीव भोजन, पानी और सुरक्षा के लिए समस्त सृष्टि में इधर-उधर भ्रमण करते रहते हैं वैसे ही मनुष्य के यत्र-तत्र भरण और प्रवासन का इतिहास भी रहा है। बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए उत्तर-प

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