ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
राहुल उपाध्याय
राहुल उपाध्याय
शिवगढ़, मध्यप्रदेश में जन्म। तीन दशक से अमेरिका के विभिन्न शहरों में रहते हुए सिएटल में माईक्रोसॉफ्ट में कार्यरत। कविताएँ लिखते हैं और प्रवासी भारतीयों के द्वंद्व और दुविधाओं को उजागर करते हैं। हिंदी ब्लॉग भी लिखते हैं। कबीर साहित्य तथा अभिनय में रुचि। दो अंग्रेजी नाटको में अभिनय किया।

हिन्दी सम्पर्क की भाषा है और रहेगी

भारत से जुड़ा कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो हिंदी से अनभिज्ञ हो। और मैं सिर्फ़ उन शब्दों की बात नहीं कर रहा जो विश्व प्रसिद्ध हैं, जैसे मसाला, पण्डित या गुरू। मैं बात कर रहा हूँ, "दिल माँगे मोर" और "

सपने न हों तो क्या कीजे

मेरा सौभाग्य कहिए कि दुर्भाग्य कि हिन्दी फ़िल्मों का मेरे जीवन पर विशेष प्रभाव रहा है। भारतीय संस्कृति क्या है, मेरा इसमें क्या किरदार है, यह मुझे हिन्दी फ़िल्मों ने ही सिखाया है। राखी, होली, दीवाली

शून्य दाता शून्य?

पतझड़ के पत्ते
जो जमीं पे गिरे हैं
चमकते दमकते
सुनहरे हैं

पत्ते जो पेड़ पर
अब भी लगे हैं
वो मेरे दोस्त,
सुन, हरे हैं
 
मौसम से सीखो
इसमें

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