ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
राजू मिश्र
राजू मिश्र
तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय। लेखन, पठन-पाठन में अभिरुचि।

प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सुधाकर अदीब से राजू मिश्र की बातचीत
किताब बचेगी तो ही भाषा बचेगी सुधाकर अदीब की पैदाइश उसी अयोध्या में है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। सरकारी चाकरी के बीच साहित्य सृजन बड़ी बात होती है, लेकिन उन्होंने समय निकालकर अपने लेखक को जिलाए रखा। बातचीत में सौम्य और मिलनस
उर्दू साहित्यकार डॉ. वजाहत हुसैन रिजवी से प्रख्यात पत्रकार राजू मिश्र की बातचीत
जहां लफ्जों के मोती, एहसास की डोर में गुंथ जाते हैं तो शायरी का रूप धर लेते हैं और जब बोलों की शक्ल-सूरत अख्तियार करते हैं तो वो कहानी बन जाती है। शब्दों को किसी माला की मोतियों की मानिन्द सजाने-संवारने का हुनर सबके पास नहीं होता। डॉ. वजाहत हुसैन
बाबाओं के कुम्भ में एक जिज्ञासु
सब कुछ अविस्मरणीय... अकल्पनीय... सपना सच होने जैसा। धर्मप्राण जनता-जनार्दन के अंत:करण में हिलोरे मारती आस्था और व्यवस्था के बीच अव्यवस्था का आनंद। संगम स्नान के तदंतर हर चेहरे पर खिली अजब सी मुस्कान मानो बताती है कि अमृतपान हो गया है। ठाठ बाबाजी ल
गुड़गांंव : खूबियों से घनीभूत शहर
एक खूबी हो तो गिना दें। गुड़गांंव अनेकानेक खूबियों से घनीभूत शहर है। कदम-कदम पर यहां विदेशी सरजमी सा अहसास होता है। नेशनल हाई-वे संख्या आठ से जो लोग कुछ साल पहले गुजरे होंगे, उन्हें सिंगापुर की तर्ज पर बहुमंजिली इमारतें अचंभित करती होंगी। कुछ वर्षो
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