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पुस्तक अंश Next
हम जो समझा किये
कागज पर कभी कोई सवाल हल नहीं हो पाता। वह उन कागजों को पढ़ डालने से भी हल नहीं होता जो सदियों से लिखे पड़े हैं। कई पीले पड़कर सड़ गये, कई हवा में उड़ गये। दुनिया कागज सँभालकर थक गयी है पर उन्हें रोज कोई न कोई गूदता ही रहता है। कागजों पर संसार का कोई नक्...
सुलगती टहनी
मैं इस मेले में खाली होकर आया था। सब कुछ पीछे छोड़ आया था- तर्कबुद्धि, ज्ञान, कला, जीवन का एस्थेटिक सौन्दर्य। मैं अपना दुख और गुस्सा और शर्म और पछतावा और लांछना-प्रेम और लगाव और स्मृतियाँ भी छोड़ आया था। मैं बिल्कुल खाली होकर आया था- खाली और चुप- क्...
मेघदूत में उज्जयिनी
विशाला उज्जयिनी का दूसरा नाम है। यह नगरी सब प्रकार से विशाल है। शोभा, सम्पत्ति और शालीनता यहां विग्रहवती होकर वास करती हैं, इसीलिए मैं इसे "श्रीविशाला विशाला' कहता हूं। मेरा ऐसा विचार है कि स्वर्ग में अपने पुण्यों का फल भोगने वाले कृतीजन पुण्य समा...
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