ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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सुलगती टहनी

मैं इस मेले में खाली होकर आया था। सब कुछ पीछे छोड़ आया था- तर्कबुद्धि, ज्ञान, कला, जीवन का एस्थेटिक सौन्दर्य। मैं अपना दुख और गुस्सा और शर्म और पछतावा और लांछना-प्रेम और लगाव और स्मृतियाँ भी छोड़ आया

मेघदूत में उज्जयिनी

विशाला उज्जयिनी का दूसरा नाम है। यह नगरी सब प्रकार से विशाल है। शोभा, सम्पत्ति और शालीनता यहां विग्रहवती होकर वास करती हैं, इसीलिए मैं इसे "श्रीविशाला विशाला' कहता हूं। मेरा ऐसा विचार है कि स्वर्ग

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