ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
प्रो. हरिमोहन झा
प्रो. हरिमोहन झा

1908 में कुमर बाजितपुर, जिला-वैशाली, बिहार में जन्म। पटना वि·ा विद्यालय में दर्शन शास्त्र के प्रोफ़ेसर और फिर विभागाध्यक्ष रहे। अपने बहुमुखी रचनात्मक अवदान से मैथिली साहित्य की श्रीवृद्धि करने वाले विशिष्ट लेखक। भारतीय दर्शन और संस्कृत-काव्य साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान के रूप में ख्याति। धर्म, दर्शन और इतिहास, पुराण के अस्वस्थ, लोकविरोधी प्रसंगों की दिलचस्प लेकिन कड़ी आलोचना। इस सन्दर्भ में "खट्टर काक तरंग' (मैथिली)/"खट्टर काका' (हिंदी) जैसी बहुचर्चित व्यंग्य कृति। मूल मैथिली में करीब 20 पुस्तकें प्रकाशित। कुछ कहानियों का हिंदी, गुजराती और तमिल में अनुवाद। प्रमुख कृतियाँ : कन्यादान, द्विरागमन (उपन्यास), प्रणम्य देवता, रंगशाला (हास्य कथाएँ), खट्टर काका (व्यंग्यकृति), चर्चरी (विधा-विविधा)। "पांच पत्र' का हिंदी अनुवाद सर्वप्रथम "धर्मयुग' में 11 मार्च 1960 के अंक में छपा।


पांच पत्र मैथिली से अनुवाद जगदीश चन्द्र ठाकुर

(1)
दरभंगा, 1-1-19
प्रियतमे!
तुम्हारी लिखी चार पंक्तियाँ मैंने चार सौ बार पढ़ी, फिर भी मन नही भरा। आचार्य की परीक्षा सर पर है, मगर किताब पढ़ने में जरा भी मन नही लगता। हमेशा तुम्हारी ह

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