ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
प्रो. गिरीश्वर मिश्र
प्रो. गिरीश्वर मिश्र
दिल्ली वि·ाविद्यालय में प्रोफेसर और मनोविज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख तथा कला संकाय के पूर्व डीन के रूप में कार्यरत रहे हैं। चार दशकों में फैले अपने अकादमिक कैरियर के दौरान इन्होंने गोरखपुर, इलाहाबाद, भोपाल और दिल्ली वि·ाविद्यालयों में अध्यापन का कार्य किया है। मनोविज्ञान के अलावा विभिन्न विषयों पर २५ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। मनोविज्ञान अकादमी के राष्ट्रीय संयोजक एवं अध्यक्ष हैं। जर्मनी, ब्रिटेन तथा अमेरिका के विभिन्न वि·ाविद्यालयों में अतिथि अध्यापक रहे। सम्प्रति - महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी वि·ाविद्यालय में कुलपति हैं।

साझे लोक से निजी विश्व की ओर

मेरे लिए गाँव जड़ और चेतन, सृष्टि के इन दोनों रूपों के साथ, एक गहरे लगाव को रूपायित करते रहे हैं। गाँव के लोग जीवंत प्रकृति के होते थे क्योंकि उनका जीवन किसी एक व्यक्ति या घर में सिकुड़ा-सिमटा न था।

महाकाल की छाया में अमृत का प्लावन

कुम्भ पर्व को सुनते ही पवित्र जल श्रोत पर एक उमड़ता महा जनसमुद्र स्मृति में कौंध जाता है। यह एक नहान (स्नान) की ओर उन्मुख तीर्थ यात्रा का आखिरी पड़ाव होता है, जिसमें भिन्न-भिन्न जाति, वर्ग, आयु और सम

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