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प्रेमचंद
प्रेमचंद
जन्म : 31 जुलाई 1880, लमही, वाराणसी - निधन : 8 अक्टूबर 1936 उपन्यास : गोदान, गबन, सेवा सदन, प्रतिज्ञा, प्रेमाश्रम, निर्मला, प्रेमा, कायाकल्प, रंगभूमि, कर्मभूमि, मनोरमा, वरदान, मंगलसूत्र (असमाप्त)। कहानी : सोज़े वतन, मानसरोवर (आठ खंड), प्रेमचंद की असंकलित कहानियाँ, प्रेमचंद की शेष रचनाएँ। नाटक : कर्बला, वरदान। बाल साहित्य : रामकथा, कुत्ते की कहानी। विचार : प्रेमचंद : विविध प्रसंग, प्रेमचंद के विचार (तीन खंडों में)। अनुवाद : आजादकथा (उर्दू से, रतननाथ सरशार), पिता के पत्र पुत्री के नाम (अंग्रेजी से, जवाहरलाल नेहरू)। संपादन : मर्यादा, माधुरी, हंस, जागरण।

दुखी जीवन
दुख का एक बड़ा कारण है अपने-ही-आप में डूबे रहना, हमेशा अपने ही विषय में सोचते रहना। हम यों करते तो यों होते, वकालत पास करके अपनी मिट्टी खराब की, इससे कहीं अच्छा होता कि नौकरी कर ली होती। अगर नौकर हैं तो यह पछतावा है कि वकालत क्यों न कर ली।
गोदान
होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी देकर अपनी स्त्री धनिया से कहा- "गोबर को ऊख गोड़ने भेजदेना। मैं न जाने कब लौटूं। जरा मेरी लाठी दे दो।" धनिया के हाथ गोबर से भरे थे। उपले थापकर आयी थी। बोली- "अरे, कुछ-रस पानी तो कर लो। जल्दी क्या है?"ह
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