ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
प्रभु जोशी
प्रभु जोशी
12 दिसंबर, 1950 देवास के गाँव पीपलरावां में जन्म। जीवविज्ञान में स्नातक तथा रसायन विज्ञान में स्नातकोत्तर के उपरांत अंग्रेज़ी साहित्य में भी प्रथम श्रेणी में एम.ए., अंग्रेज़ी की कविता स्ट्रक्चरल ग्रामर पर विशेष अध्ययन। पहली कहानी 1973 में धर्मयुग में प्रकाशित। "किस हाथ से' लंबी कहानियाँ तथा "उत्तम पुरुष' कथा संग्रह प्रकाशित। हिंदी दैनिक नईदुनिया के संपादकीय तथा फ़ीचर पृष्ठों का पाँच वर्ष तक संपादन। बचपन से चित्रकारी करते हैं एवं जलरंग में विशेष रुचि। मध्यप्रदेश साहित्य परिषद का कथा-कहानी के लिए अखिल भारतीय सम्मान। साहित्य के लिए गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप।
303, गुलमोहर निकेतन, वसंत विहार, इन्दौर, INDORE, INDIA
एक-वचन और बहु-वचन के द्वन्द्व
01-Feb-2016 12:00 AM 153 एक-वचन और बहु-वचन के द्वन्द्व

जब भी "संस्कृति' शब्द बहस में आता है, भारत का समूचा बौध्दिक जगत और दलीय राजनीति ग़फलत के गर्क में पड़ जाती है। क्योंकि, सबसे पहले तो उनके सामने इसकी "परिभाषा' का ही प्रश्न आकर खड़ा हो जाता है और वह हर

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