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पर्यावरण और ऑस्ट्रेलिया की जीवनशैली
01-Dec-2017 11:19 AM 2745     

जलवायु परिवर्तन विश्व में चिंता का एक बहुत बड़ा और भयावह कारण बन गया है जिसे आज विश्व का प्रत्येक प्राणी अनुभव भी कर रहा है और उसे इस का अनुभव होना भी चाहिए क्योंकि इस के दीर्घकालिक नकारात्मक परिणाम सीधे हमारी जीवन शैली को हानिकारक रूप में प्रभावित कर रहे हैं। इस का हमारे जीवन के विभिन्न अंगों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। हमारे सोच, रहन-सहन, खान-पान हमारे स्वास्थ्य आदि सभी को यह प्रभावित कर रहा है, प्रभावित ही नहीं कर रहा है अपितु हमारी जीवन पर गंम्भीर परिणाम भी डाल रहा है। और यदि इसका प्रभाव इसी भांति निरंतर बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब व्यक्ति साँस लेने को भी तरस जायेगा जिस के लक्षण आज हमें दिखने ही लगे हैं। बढ़ते अस्थमा के रोगियों की संख्या इस ओर संकेत कर रही है।
जलवायु परिवर्तन के बहुत से कारण हैं जिन में हर देश इसके दोषी है और विशेषत: विकसित देश इस के लिए अधिक उत्तरदायी नजर आते हैं। कुछ देश तो बड़े स्तर पर इसे भयावह रूप से बढ़ाने के लिए जिम्मेदार लगते हैं जैसे की चीन और अमेरिका। परन्तु इसके परिणाम किसी भौगोलिक सीमाओं में सीमित नहीं है और न ही हो सकते हैं अपितु वे आसपास के वातावरण को अधिक नुकसान पहुँचाने में भी सक्षम हैं।
इस कारण विश्व के सभी देशों को इसके विरुद्ध एक जुट होने की आवश्यकता अनुभव हुई। जिस के परिणाम स्वरूप पेरिस एग्रीमेंट को लगभग सभी देशों ने अपनी मान्यता दी। और इसी के चलते ऑस्ट्रेलिया ने भी पेरिस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किये और यहां के जन सामान्य व्यक्ति ने भी इसका समर्थन किया।
जलवायु परिवर्तन के लिए हर देश अपनी नीतियां बनाता है। ये नीतियां दो प्रकार की होती हैं। एक तो स्थानीय स्तर पर और दूसरी विश्व स्तर पर बनानी होती हैं। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया ने भी पर्यावरण के लिए बहुत ही गंभीर नीतियां बनाईं हैं और केवल नीतियां ही नहीं बनायीं अपितु उनके पालन करने में भी बहुत ही दृढ़ता दिखाई है। साथ ही यहां के नागरिक भी इनके पालन करने में रुचि दिखते नजर आते हैं। साथ ही यह भी देखने योग्य है कि यदि कोई इन नीतियों का पालन नहीं करता तो उसे दण्ड भी भुगतना पड़ता है और दण्ड की रकम भी बहुत ही भारी भरकम है, जिसके कारण जो लोग लापरवाह किस्म के हैं उन्हें भी इनका पालन करने को मजबूर होना ही पड़ता है। विकसित देश होने के कारण भी ऑस्ट्रेलिया में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाता है।
जलवायु परिवर्तन का एक मुख्य कारण है कार्बन जैसी गैसों का भारी मात्रा में उत्सर्जन, जिसे बड़े-बड़े उद्योग निरंतर वातावरण में निर्बाध गति से छोड़ते हैं। जब भी कोई नई इंडस्ट्री या कंपनी या प्लांट लगाया जाता है तो उससे वातवरण को सुरक्षित रखने के आश्वासन लिए जाते हैं और उसे बहुत से मानकों से गुज़रना पड़ता है और ये बताना पड़ता है कि वह कैसे हवा पानी और ज़मीन को कम से कम दूषित होने देगी। और स्वास्थ्य के लिए कोई भी खतरनाक गैस नहीं पैदा करेगी और न ही पर्यावरण में ऐसे पदार्थ छोड़ेगी। यह शर्त सभी नये और पुराने उद्योगों पर भी लागू किया जा रहा है। जिनकी समय-समय पर जांच पड़ताल होती रहती है। जहां पर्यावरण को इन उद्योगों से खतरा है वहीं पर्यावरण को निरंतर दूषित करने के लिए भी बराबर के हक़दार हैं। इसलिए वातावरण को सुरक्षित रखने के लिए बहुत से कदम उठाये जाते रहे हैं।
एक विकसित देश होने के कारण वातवरण को सुरक्षित रखने के लिए भी बहुत सी प्रणाली है। जो कि यहां की जीवनशैली से भी देखी जा सकती है। ऑस्ट्रेलिया में जब आप किसी भी कार्बन एमिशन वस्तु को खरीदने जाते हो जैसे फ्रिज इत्यादि तो उनमें अधिकतर पर एक परचा चिपका रहता है जिस पर वह वस्तु पर्यावरण के लिए कितनी अनुकूल है यह बताया जाता है। यहीं पर ज्यादातर उस वस्तु पर तारा अंकित किया जाता है जो अधिकतम पांच की संख्या में होते हैं। इसके चलते व्यपारियों को भी इसमें भाग लेना आवश्यक हो जाता है कि उन की वस्तु पर कितने तारा अंकित हैं और जो वस्तु पर्यावरण के जितनी अनुकूल होगी उस पर उतने ही अधिक तारे अंकित किये जायेंगे और उतनी ही महंगी भी होती है। पर यहाँ के निवासी पैसे को न देख कर पर्यावरण के अनुकूल वस्तु ही खरीदते हैं वह चाहे मंहगी ही क्यों न हो क्योंकि वे पर्यावरण प्रति बहुत ही जागरूक हैं। और जो भी छोटा या बड़ा योगदान किसी भी रूप में दे सकते है वे तो देते हैं। चाहे फिर वो पर्यावरण के अनुकूल वस्तु पर अधिक खर्च करना हो या फिर सरकार के बनाये नियमों को पालन करना हो। या फिर सरकार को और कड़ी नियति बनाने के लिए जुलूस निकलना हो या सड़क पर प्रदर्शन कर के घेरना हो। लोगों के बीच में जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरूकता भी सराहनीय है। और आपको मेलबोर्न शहर में जगह-जगह जागरूक करने वाले कागज के पोस्टर या लेन और स्ट्रीट के चौराहों पर लोग स्वयं भी जागरूकता अभियान चलते दिख जाते हैं। वे कभी पानी बचाने का संदेश देते दिखेंगे तो कभी हवा को साफ रखने की अपील करते दिखेंगे। इसके लिए स्वयंसेवी संगठन के साथ-साथ लोग व्यक्तिगत स्तर पर भी कार्य करते दीखते हैं। यहीं पर अनेकों संस्थाएं हैं वो वातवरण को कैसे साफ़ रखें, उस पर आम लोगों को कुछ तरीके भी बताती हैं। बहुत सी संस्थाएं वातवरण को सुरक्षित रखने के लिए जोर-शोर से लगी हुई हैं।
कुछ संस्थाएं ऐसी हैं जो कि पौधे उगाकर वायु को साफ़ रखने के लिए कम्पैन करती हैं और पानी को साफ़ करने के लिए आयोजन करती हैं। इतना ही नहीं यहां स्कूल के विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं। पर्यावरण की रक्षा के लिए पोस्टर बनवाये जाते हैं तो कभी चित्र प्रतियोगिता करवाई जाती है और कभी फोटोग्राफ़ी को भी इसके लिए उपयोग किया जाता है।
यहां के लिए जैसा कि आप जानते हैं ऑस्ट्रेलिया अपने सुंदर तटों को लेकर बहुत ही सचेत रहता है। यह बात विश्व में प्रसिद्ध है और यह देखा जा सकता है कि यहां के समुद्र तट बहुत हद तक साफ़ हैं। उसका एक कारण यह भी है न केवल सरकार, स्वयंसेवी संस्थाएँ, वरन आम लोग भी वातावरण का बहुत ख्याल रखते हैं। यहां की सरकार ने बहुत सारी ऐसी व्यवस्थाएं की हुईं हैं जिनके कारण समुद्र तट स्वच्छ और सुंदर रहते हैं जैसे की कूढा-करकट सैलानी हमेशा कूड़े दान में फेंकते हैं न कि जहां मन करे वहां डाल दें। कुछ देशों में यही बहुत आम बात है कि लोग स्वयं भी जागरूक नहीं है लोगो का जहां मन करता है वो वही पर कूढा फ़ेंक देते हैं। और सार्वजनिक जगह को कुढ़े का दान बना देते हैं। जो किसी के भी हित में नहीं है। पर ऑस्ट्रेलिया में आप कहीं भी चले जाये जैसे शॉपिंग मॉल से लेकर समुद्र तटों तक, हर छोटी बड़ी दुकानों पर। पर्यटन स्थलों पर, सार्वजनिक जगहों पर खास कर हर जगह आपको कूढ़े दान जरूर दिखाई देंगे। यहां तक के सड़कों के किनारे थोड़ी थोड़ी दूर पर भी कूड़े दान के प्रबंध किये गए हैं। जिसके लिए इस देश की स्वच्छता प्रणाली सहराना की हकदार है और आम लोग जो नियम और कानूनों का पालन करते हैं वे भी सराहना के पात्र हैं।
हर अच्छे कार्य का शुभारम्भ घर से होता है यह सही कहावत है जोकि यहां की जीवनशैली में देखी जा सकती है। यहां पर हर घर के बाहर दो या तीन डस्ट बिन यानि कूड़े दान होते हैं। रिसायकल बिन और नॉन रिसायकल बिन। जो कि मुन्सिपल कारपोरेशन के तरफ से प्रदान किये जाते हैं और प्रत्येक दिन प्रात:काल सरकारी ट्रक आते हैं और इन्हें खाली कर जाते हैं। हाँ ये बात अलग है कि ये सरकारी ट्रक आपको सुबह उठाने का काम भी करते हैं, क्योंकि इनको अलार्म की तरह बंद भी नहीं किया जा सकता। यह कूड़ा बड़ी-बड़ी रीसायकल कम्पनियों में ले जाते हैं। और वहां पर कूड़े को रीसायकल किया जाता है बिना वातावरण को नुकसान या हानि पहुंचाए। गलत कूड़ा गलत डिब्बे में डालने पर फाइन भी भरना पड़ता है। यहां तक की आप को पुरानी या ख़राब इलेक्ट्रिकल वस्तुए जैसे टीवी, वाशिंग मशीन इत्यादि को रीसायकल करने के लिए भी अलग से पैसे देने होते हैं। वातावरण को बचने के लिए सभी लोग नियमों का पालन करते हैं। यहां अपर्टमेंट ये फ्लैट में भी बाकायदा अलग से कूड़ा निस्तारण के लिए इंतज़ाम किया जाते हैं।
जहां चीज़ें इतनी अच्छी हैं पर फिर भी कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में देश को गंभीरता से सोचना चाहिये। जैसे कि पॉलीथीन का इस्तेमाल या उससे बनी थैलियां। यहां पर शॉपिंग बैग के रूप में पॉलीथीन बहुत अधिक मात्रा में प्रयोग की जाती है। जो कि कागज के बैग से बदली जा सकती है। इसके लिए भी बहुत सी संस्थाएं जागरूकता पैदा कर रही हैं। वे पॉलीथिन के स्थान पर कपड़े के दोबारा प्रयोग करने वाले थैलों को इस्तेमाल करने को प्रोत्साहन दे रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में बहुत ही पुरानी "यारा" नदी है। पर वह भी आजकल के बढ़ते प्रदूषण के प्रभाव में आती जा रही है। जिसको साफ़ करने की मुहिम आज कल यहां देखी जा सकती है। और लोग यहां की राज्य सरकार से इसके लिए कठोर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया अपनी खदानों के लिए प्रसिद्ध है और बहुत हद तक इसकी अर्थव्यवस्था खदान व्यापार पर आधारित है। प्रदूषण बढ़ने का यह भी एक बहुत बड़ा कारण है जिसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया को और भी कड़े कदम और नियम बनाने की आवश्यकता है। बड़े उद्योगों को खदानें लगने से पहले पर्यावरण विभाग को पूरी तरह संतुष्टि का आश्वासन देना होगा कि वह यहां की जलवायु को बिलकुल भी दूषित नहीं करेंगे।
आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखना सभी का दायित्व है, अन्यथा वे दिन दूर नहीं जब हर व्यक्ति को अपनी पीठ पर ऑक्सीजन का सिलेंडर रखकर चलना होगा या कुछ समय बाद ऑक्सीजन का मिलना भी दूभर हो जायेगा।

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