ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
न्यूयार्क में भारतवंशी
01-Jan-2016 12:00 AM 1339     

न्यूयार्क में भारतीयों की संख्या लगभग सात लाख है। भारतीय यहां चीनियों के बाद दूसरे एशियन- अमेरिकन के रूप में रहते हैं। आप यहां भारतीयों को बड़ी आसानी से सबवे ट्रेन में आते-जाते, दुकानों में, बाजारों में पहचान सकते हैं, हां कभी-कभी पूछने पर पता चलता है कि वह भारतीय नहीं बंग्लादेशी या पाकिस्तानी हैं।
वे यहां सभी तरह के कार्यों को करते हैं। टारगेट, मैसी बी.जे.एस. में सेल्समेन के रूप में, पटेल ब्रादर्स में कैशियर एवं हेल्पर के रूप में, वालस्ट्रीट में ब्राोकर, इन्वेस्टमेंट बैंकर एवं विशेषज्ञ के रूप में, मैनहैट्टन में एक सफल व्यवसायी के रूप में। कई जाने-माने एटॉर्नी भी भारतीय हैं जिनके यहां पर बड़े-बड़े ऑफिस अच्छे लोकेशन पर स्थित हैं।
न्यूयार्क शहर मुख्यत: पांच भागों में बँटा हुआ है। मैनहेट्टन, ब्राुकलिन, क्वीनस, ब्राॉन्क्स और स्टेटिन आईजलैंड। संख्या के हिसाब से भारतीय मुख्यत: क्वीन्स में रहते हैं। यह यहां का मध्यम वर्गीय एशियन लोगों का ठिकाना है। क्वीन्स में भारतीयों के साथ चीनी, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, कोरियाई मूल के लोग भी मिल जायेंगे।
मैनहेट्टन, साउथ मुंबई के जैसा पाश इलाका है जहां पर ऊंची-ऊंची गगनचुंबी इमारतें, 24 घंटे चलने वाली जिंदगी, एक अलग ही संस्कृति जो आप फिल्में में आसानी से देख सकते हैं। भारतीय मैनहेट्टन में भी प्रोफेशनल्स के रूप में जैसे डॉक्टर्स, वकील के रूप में रहते हैं एवं साथ में कुछ बड़े-बड़े क्लीनिक एवं ऑफिसेस भी चलाते मिल जायेंगे।
कुछ नवधनाढ्य जिन्होंने कुछ पैसा तो कमा लिया लेकिन यहां फ्लैट नहीं खरीद सकते, वे स्वतंत्र मकान लेकर न्यूजर्सी में रहने लगे हैं। न्यूजर्सी, न्यूयार्क से लगा हुआ रहवासी इलाका है जहां पर लिटिल इंडिया, लिटिल बॉम्बे नाम की जगह भी मिल जायेंगी। जैक्सन हाईट, क्वीन्स में एक जगह जहां पर सभी तरह की भारतीय मिठाई की दुकानें, साड़ियां, ज्वेलरी आदि की दुकानें मिल जायेंगी। यहां पहुंचने पर आपको लगेगा कि आप मुंबई में कहीं पर खड़े हैं।
न्यूयार्क के हर एक एरिया में भारतीय मंदिर मिल जायेंगे। हिंदू सेंटर, गणेश मंदिर, सार्इं मंदिर आदि। शनिवार एवं रविवार को भक्तों की भीड़ आमतौर पर देखने को मिलती हैं एवं त्योहारों के अवसर पर विशेष अनुष्ठान एवं मेलों का आयोजन इन मंदिर प्रांगणों में होता है। स्वामीनारायण संप्रदाय के मंदिरों की लंबी श्रृंखला पूरे अमेरिका में फैली हुई है। न्यूजर्सी का नवनिर्मित स्वामी नारायण मंदिर नव शिल्प का अद्भुत नमूना है।
पूरे भारत का दर्शन यहां आप करना चाहते हैं तो इंडिया डे परेड के दिन कर सकते हैं। यह दिन भारतीयों द्वारा एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी भारतीय मैनहैट्टन की सड़कों पर एक व्यवस्थित रूप से धूम मचाते हुये झांकियों के रूप में अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं। इस अवसर पर भारतीय नृत्यकला एवं नव प्रतिमानों का प्रदर्शन जोर-शोर से होता है।
फरवरी 2015 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां पर "फ्रैन्ड्स ऑफ एमपी' नाम के एक प्रोग्राम को लांच किया था। आज हम यह तो नहीं कह सकते कि एम.पी. के कितने मित्र बने पर भारतीयों ने उस प्रोग्राम में बहुत आनंद लिया।
यहां पर भारतीय हर उस प्रोग्राम को ढूंढते रहते हैं जिसमें उन्हें अपनी संस्कृति, अपनी पहचान देखने को मिलती है। आज यहां पर कई परिवार तीस-चालीस वर्षों से रह रहे हैं। उन्होंने अपने कुछ ग्रुप, मंडल एवं ट्रस्ट बनाये जिनके जरिये वे अपनी मेल-जोल की सामाजिक गतिविधियों को संचालित करते रहते हैं।
"पटेल ब्रादर्स' एक रिटेल चैन है जो पूरे अमेरिका में भारतीयों के लिए लाईफ लाइन की तरह कार्य करती है। सभी भारतीय जरूरत की वस्तुयें यहां मिल जायेंगी। अमूल, आशीर्वाद, वासमती चावल से लेकर ज्वार-बाजरे का आटा, यहां तक कि आप कड़ी पत्ता भी "पटेल' में प्राप्त कर सकते हैं। मिट्टी के दिये, गणपति बप्पा की मूर्ति एवं अन्य भारतीय त्योहारों का सामान भी यहाँ मिल सकता है। कुछ भारतीय जैसे दीपक चोपड़ा जो लेखक, पब्लिक स्पीकर और मूलत: वैज्ञानिक हैं, चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन जो प्रोफेशनल एडवाईजर, म्यूजीशियन और ग्रेमी अवार्ड नॉमिनी हैं, चर्चा में बने रहते हैं।
न्यूयॉर्क के लगभग सभी इलाकों में आपको भारतीय रेस्टोरेंट मिल जायेंगे। मैनहैट्टन में उत्सव, तुलसी ढावा, थांबा, कैलाश पर्वत आदि। फ्लसिंग में "एशियन', "हैप्पी बुद्धा' जो कि पूर्णत: शाकाहारी चायनीज व्यंजन बनाता है।

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