btn_subscribeCC_LG.gif btn_buynowCC_LG.gif

निर्मला
01-Nov-2019 11:13 AM 418     

सात बजे रात के परचारक गीता के आठवा अध्याय सुरू करिस। "श्रीकृष्णजी के वचन सुनकर अर्जुन ने पुछा- हे पुरुषोत्तम! ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है?" सम्भू एक लकड़ी वाला कुर्सी पे परचारक अउर बेदी के सामने छोटा खाखी जंघिया अउर छोटा बाहीं वाला उज्जर सट पहिने बइठा रहा। ऊ कोई 82 साल हे उमर के रहा, गोरा, मोटा बदन अउर थोड़ा जोन मूड़ पे बार बचा रहा ऊ एकदम उज्जर रहा। परचारक के सामने बइठा तो रहा लेकिन सम्भू के न तो ध्यान अउर न नजर परचारक के बगल रहा। सम्भू एक बगल में रक्खा फ्रेम करा, बड़ा फोटो के एक टक ताकत रहा। फोटो एक अधेड़ अउरत के रहा - गोरी, सुन्दर अउरत, सुन्दर लाल साड़ी पहिने रही। सम्भू एक टक वही अउरत के फोटो देखे। जनाए सम्भू कोई दुसर दुनिया में खोए गए रहा अउर उस के घर के, अउर गीता पाठ के जनाए खबरे नइं रहा। ऊ साइत आपन बीती जिन्दगी में खोय गए रहा। सम्भू अउर उस के छोटा भाई, हरी, आपन माई बाप के साथे नसीनू में रहत रहिन। सम्भू बहुत पढ़ वढ़ नइं पाइन, यही कोई क्लास 6 या 7 तक पढ़िस, फिर इधर उधर काम करे लगा। कुछ महिन्ना सूबा में लेबर के काम करिस फिर उस के नवा काम लग गए ए पेस्फिक के बस चलाये के, सूबा-लौतोका, अउर कभी कभी सूबा-सिंगातोका। जब सम्भू सूबा से बस लौतोका लए जाए तो वहीं लौतोका में रुक जाए। मिल के लगे पेस्फिक ट्रांसपोर्ट के गराज रहा अउर ड्राईवर लोग के सूते के रूम रहा। पाच छे ड्राइवा लोग खाना ओना बनाए-खाए के सूतें। रात में मकेनिक लोग सब बस के तेल पानी चेक करें अउर कुछ बिगड़ा रहे तो बनाय देवें। सबेरे ड्राइवा लोग अपन अपन बस लए के, लौतोका बस स्टैंड से यात्री लोग के बइठाए के, पारी पारा टाइम से सूबा के तरफ चल देवें। सम्भू के सादी के बात करे सम्भू, उस के बप्पा अउर एक आद ख़ास पलवार के लोग वाइनिबोकासी गइन। सम्भू कोई बीस साल के रहा होई। लड़की के घरे सब बइठिन अउर थोड़ा देरी में एक जवान, सुन्दर, गोरी, दुबरी-पतरी लड़की चा अउर भजिया, सहिना, वगैरा लय के आइस। सुन्दर साड़ी पहिने रही अउर घूंघट काढ़े रही। सरम से मूड़ नीचे करे रही। लड़की के मइया बताइस कि लड़की के नाम निर्मला है अउर ऊ सत्तरा साल के है। सम्भू के बप्पा सहिना खाय के बोलिस - "बड़ा स्वादिस्ट पकवान है।" निर्मला के मइया बोलिस कि ई सब लड़की बनाइस है अउर आज के सब खाना भी वही बनाइस है। सम्भू के तो लड़की जुरते पसंद होय गए लेकिन ऊ का बोले। बप्पा के तरफ ताकिस तब बप्पा पूरा बात समझ गए। कोई छे महिन्ना बाद, बड़ा धूमधाम से सम्भू अउर निर्मला के सादी होय गए। सम्भू अउर निर्मला बड़ा प्रेम से रहे लगिन अउर, बप्पा के घर के नागिचवे, आपन एक छोटा घर भी बनाए लिहिन। बप्पा कुछ पइसा दिहिस अउर कुछ बेंक से उधार लिहिन। सम्भू के छोटा भईया हरी एक दुई साल सेकंड्री स्कूल तक गए फिर वहू सूबा में एक स्पेयर पाट दूकान में काम करे लगा। थोड़ा दिन बाद हरी के भी सादी, एक सामाबूला के, लड़की के साथे होए गय। हरी के ससुर अउर हरी साथे काम करत रहिन। सादी में बाद हरी अउर उस के अउरत, हरी के बप्पा मइया के साथे पुराने घर में रहे लगिन। थोड़ा खट पट तो सभी दम्पति में होए जाए है, लेकिन इस के बावजूद भी सम्भू अउर निर्मला के बीच बहुत जादा प्यार रहा। निर्मला एक आदर्श, पतिवर्ता नारी रही। अउर सम्भू एक कमासुत, इमानदार पती रहा। आगे चल के ई दम्पति के एक लड़की अउर दुई लड़का भइन। लड़की के नाम ज्योति अउर बड़ा लड़का के नाम जितेन रक्खिन। छोटा लड़का के नाम जगदीस पड़ा। निर्मला तीनों लड़कन के अउर अपन अदमी के बहुत अच्छा से देखत रही। उन के खाना, पीना, पहिरावा, वगैरा में कोई कमी कभी नइं छोड़िस। इनमेस एक्को कहीं बीमार पड़ गइन कभी तब तो निर्मला, आपन परवाह छोड़ के, जमीन आसमान एक कर देत रही इन के सेवा में। देखते देखते लड़कन भी पढ़ लिख के बड़ा होय गइन। असहिएँ सम्भू अउर निर्मला के जिन्दगी सुख में बीतत रहा। दिन में सम्भू चला जाए बस चलाए अउर निर्मला लड़कन के सपराए के स्कूल भेज दे फिर घर के काम-काज में जुट जाए। सम्भू जब लौतोका जाए तो रात वोहीं रुक जाए। एक रोज सम्भू साँझा के बस लेके लौतोका में पेसिफिक के डीपू में पहुंचा अउर बेग ओग लइ के बेरक में घुसत रहा तब तक एक अउर ड्राईवर, मनी, नहाए धोए के, मार महकउवा तेल ओल पोत के निकल के भागा जात रहा। मनी सम्भू से पहिले वाला बस लाइस रह। सम्भू रूमवा में हला बेग रक्खिस अउर नहाए जात रहा तो देखिस एक मकेनिक, सुनील, चा बनात रहा। सम्भू सुनील से पूछिस, "ई मनिया कहाँ एतना जल्दी में भागा जात रहा। अइसे जनाए कि कंही बरात छुटा जाए है।" सुनील हँस के जवाब दिहिस, "हाँ, ऊ आपन बरात में जावे है।" सम्भू कुछ समझ नइं पाइस। ऊ तो जानत रहा कि मनी के सूवा में अउरत है अउर तीन लड़कन भी है। सुनील देखिस कि सम्भू एकदम हेरान हेरान लगे तो उस से खोल के बताइस, "मनी के हियाँ लौतोका में एक रखेल है।" सम्भू अभी भी नइं समझ पाइस तो पूछिस, "रखेल का है?" सुनील ठंडा सांस भर के बोलिस- "अरे सम्भू भइया, तुमार नाम तो साधू होए के चाही; रखेल नइं जानत हौ का होए है। मनी हियाँ एक अउरत के रक्खिस है। एक रोज ऊ अउरत आपन दुई छोटा छोटा लड़कन के लइ के सूबा से लौतोका आत रही मनी के बस में तो बाते बात में मनी उस के पटाए लिहिस। ऊ अउरतिया के नाम प्रेम है अउर ऊ एक टीचा है। कोई दुई साल के बात है कि उस के अदमी कुछ अउर लोग के साथे दारू पीयत रहा तब कुछ बाद-बिबाद भए अउर ई अदमिया कोई के डेगा मार दिहिस। ऊ तो मर गए अउर इस के जनम कैद होए गए। तो ऊ रोज प्रेम अउर उस के लड़कन सूबा जेल में अदमिया के देख के लौतोका लउटत रहिन मनी के बस में। मनी जब बस लइ के लौतोका आवे है तो वहीं चला जाए है, प्रेम के घरे। प्रेम के भी थोड़ा सहारा मिल जाए है। तुम तो जानत हौ, गाँव के झउवा अदमी लोग बेसहारा अउरत लोग के पीछे पड़ा रहे हैं अउर तंग करा करें हैं। मनी तो लम्बा चउड़ा अदमी है तो उस के डर से कोई प्रेम के नइं तंग करे है। मांगो तो तुम्हउ हियाँ एक रखेल खोज लेव।" सम्भू गुस्सा में घूमा सुनील के बगल अउर डांट के बोलिस, "खबरदार! तुम अइसन बात दुबारा नइं बोलना हम से। हमार घरे जब साकछात लछमी है तो हमार कोन काम बजाड़ू लोग के पीछे चुचुआएक।" एतना बोल के सम्भू बेग मेसे तउल निकालिस अउर नहाए चला गए। दुसरा रोज जब सम्भू बस लइ के सूबा जात रहा तो उस के निर्मला पे बड़ा मया लगा अउर दिन भर वही के बारे में सोचत रहा। ऊ सोचत रहा कि निर्मला केतना अच्छा से लड़कन अउर उस के देख भाल करे है अउर घर घरस्ती चालए है। मनी के रकम काम तो सम्भू कभी सपना में भी नइं करे के सोचे सकत रहा। देखते देखते सम्भू के लड़कन भी पढ़ लिख के बड़ा होय गइन। एक दिन सम्भू के लड़की के सादी के बात भी अमेरका से आए गए। सम्भू के साथे एक अदमी, कामता, काम करत रहा। वही के बहिनी के लड़का रहा। कामता सादी के बात लई के आइस अउर सम्भू से बताइस कि अगर ज्योति के सादी करे मांगो तो ऊ बात आगे बढ़ाई। लड़का के नाम अनूप कुमार रहा अउर ऊ लोग चार पांच साल से अमेरका में रहत रहिन, सेन फ्रांसिस्को में। अमेरका जाय से पहिले तामाबुआ में रहत रहिन। सम्भू, निर्मला अउर ज्योति इस के बारे में देरी तक बात करिन अउर ज्योति सादी करे के राजी होए गयी। कामता उधर सनेसा भेजिस अउर एक महिन्ना बाद अनूप अउर उस के मइया बप्पा फीजी आइन। अनूप बड़ा अच्छा स्वभाव के रहा, पढ़ा लिखा रहा अउर, एक्के दुई रोज में सम्भू के पलवार में घुल मिल गए। बात तए कर के ऊ लोग अमेरका लउट गइन अउर सादी के तारिक तीन महिन्ना बाद रक्खा गए। बड़ा धूम धाम से सादी होय गए। एक दुई महिन्ना बाद लड़की के अमेरका जाए के टाइम आय गए। निर्मला अउर सम्भू बहुत रोइन लड़की के बिदा करे के टाइम। बहुत दिन तक दूनो रात में सुस्की भर भर के साथे रोए रोए के एक दुसरे के सहारा बनिन। निर्मला हरदम बोला करे कि पता नइं बिदेस में हमार सोना एस लड़की के उप्पर का बीतत होई। सम्भू उस के समझाते रहे कि लड़की सुख से रहत होई। सम्भू टेलीफोन लगवाए लिहिस अउर हप्ता में एक रोज अब ज्योति से बात चीत होए लगा। तब निर्मला के थोड़ा दिल में दिल आइस। एक दफे सम्भू लौतोका ट्रिप लए गए रहा अउर दुसरा रोज लउटा। घरे साँझा के पहुंचा तो देखे निर्मला नहाए धोये के अच्छा कपड़ा पहिनिस है अउर किचिन से बड़ा अच्छा महक आवे। सम्भू नहाए के आइस तब निर्मला चारों जने के खाना निकालिस। बहुत रकम के स्वादिस्ट पकवान परोसिस। सम्भू कुछ पूछे तो निर्मला खली गद्दर मुस्की मारे अउर बोले अभी खनवा तो खाए लेव। सम्भू बड़ा घबड़ान, सोचे कोइ के जनम दिन तो नइं है। खाना खाए के लड़कन अपन रूम में चले गइन तब धीरे से निर्मला आए के सम्भू से बोलिस, "आज जानो भगवान तुम्मे का दिहिस है?" सम्भू के, फिर भी, कुछ समझ में नइं आइस तो बोल दिहिस, "भगवान, तुम्में दई के सब कुछ तो हम्में दई दिहिस है। अब का बाकी है?" निर्मला सरमाये के बोलिस, "तूम्मे तो हरदम खली खेलवार सूझे है।" सम्भू फिर मुस्की मार के बोलिस, "अरे ऊ गनवा नइं याद है तुम्हे पा के हम ने जहाँ पा लिया है।" सम्भू के बड़ा दिलचस्पी रहा गाना में लेकिन अच्छा से गाए ओए नइं पात रहा। निर्मला थोड़ा कड़ाई से, लेकिन धीरे से, बोलिस, "ई बुढ़ापा में गाना ओना हम्मे सुनाये के रहिन देव अउर कान खोल के सुनो - आज ज्योति के टेलेफोन आइस रहा, छे सात महिन्ना में तुम नाना बन जइहो।" सम्भू जल्दी से कुर्सी से उठ के निर्मला के पकड़ लिहिस। निर्मला झट से छोड़ाय के बगल होए गइस, "तुम का दिवाना के रकम हम्मे पकड़त हौ, अभी लड़कन आए जइहें तो का बोलिहें, अब नाना बन जइहो तो थोड़ा नाना के रकम बेवहार करो।" सम्भू एतना ख़ुसी रहा कि फिर गाना गाये लगा - ऐ मेरी जोहरा जबी तुझे मालूम नहीं, तू अभी तक है हसीं और मैं जवान। निर्मला मू बिचकाए के किचिन में चल दिहिस। ज्योति के लड़का होए के टाइम निर्मला के सम्भू पासपोट बनवाये के, बीज़ा लेवाये के अमेरका भेजिस। एक दुई महिन्ना निर्मला हुंवा रहिस फिर मार कपड़ा-लत्ता, लाली-चोकलेट वगैरा लए के लउटिस। एक दुई हप्ता तक खली अमेरका के कहानी सब से बताइस। ज्योति के लड़का के नाम शक्ति रक्खा गए। अब निर्मला ज्योति के दुई तीन रोज पे टेलीफोन कर ले अउर सब हाल चाल लई ले। जइसे निर्मला अमेरका से लउटिस, सम्भू के मइया बिमार पड़ गयी। छे सात रोज़ अस्पताल में भरती रही फिर बेचारी गुजर गयी। डॉक्टर लोग बताइन कि उस के हार्ट फेलियर होए गए। पूरा पलवार बड़ा दुखी भइन अउर पूरा तेरा रोज वाला किरिया करम करिन। सम्भू के बप्पा के तो दिले टूट गय। वसहियें ऊ थोड़ा बिमरिया रहा लेकिन अउरत के मरे के सोक उस के एकदम तूड़ दिहिस। बिचारा छेहवे महिन्ना बाद वहू गुजर गए। अब तो पूरा पलवार के सोक के ठिकाना नइं रहा। लेकिन समय सब सम्हार ले है, अउर जिंदगी चलते रहे है। एक साल बाद सम्भू अउर निर्मला के एक अउर खुस खबरी अमेरका से आइस स ज्योति सम्भू, निर्मला अउर दूनो लड़कन के अमेरका में रहे के वस्ते स्पोंसा कर दिहिस। परचारक गीता पाठ पढ़े चला जाए, "हे अर्जुन! जो मनुष्य देह त्यागते समय, ॐ इस एक अक्षर ब्रह्म का ध्यान करते हुए मेरा स्मरण करते हैं, वे अवश्य ही मोक्षरूप परमपद को पाते हैं।" समभू के ध्यान तो अउर कहीं रहा अउर आँखी एक टक फोटो पे लगा रहा। एक साल से जादा लगा सब के कागज पत्तर बने में अउर 1976 के अंत में सब काम तये होए गए। अब सम्भू, निर्मला अउर लड़कन के खुसी भी लगे कि अमेरका जावा जाई लेकिन सोच भी लगे कि अपन जनम भूमि छोड़ के जाए के पड़ी। दूनो लड़का काम करे लगिन रहा अउर बहुत यार दोस्त बनाए लिहिन रहा। सम्भू अउर निर्मला के भी बहुत यार दोस्त रहिन, लेकिन खास सगा बहुत कमती रहिन। अब तक तो ऊ लोग के माई बाप भी मर गए रहिन, खली सम्भू के भइया, हरी अउर उस के पलवार रहिन। जब घर अउर समान बेचे के टाइम आइस तब सम्भू अउर निर्मला एक रोज साँझा के हरी के घरे गइन। हरी अउर उस के अउरत; दूनो के देख के बड़ा खुसी भइन अउर बोलिन कि अब रहो अउर खाना वाना खाए के तब जाना। निर्मला तो किचिन में चली गइस, हरी निगोंन घोरिस अउर दूनो अदमी आगे रूम में तलनवा मारे लगिन। थोड़ा देरी में हरी पूछिस, "भइया, अमेरका वाला मामला कुछ लाइन पे आइस कि नइं?" तब सम्भू जवाब दिहिस, "वही के वस्ते तो हम लोग हिंया आया है। कागज़ पत्तर तो सब राईट होए गए, अब खली चीज बेचो, टिकट कटाव अउर उड़ जाओ। हम लोग सोचत रहा कि 1977 जइसे लगी एक दुई महिन्ना में बस हम लोग चला जाएगा। लेकिन एक बात में हम तुमार सलाह मांगित रहा। उ ई बात है कि हम लोग, चारो जने, जाई कि खली लड़कन के भेज देइ?" हरी मूड़ नीचे करे सम्भू के बात सुनत रहा फिर धीरे से बोलिस, "भइया, आप तो हम से बड़ा हौ, हम तुम दुइये भाई हैं, आप चला जइहो तो हम तो एकदम अकेल्ला होय जाइब लेकिन फिर भी हमार सल्लाह यही है कि तुम लोग सब कोई चला जाव। हम तो अमेरका नइं गया है लेकिन सुना है कि जोन जोन हुंवा गइन है ऊ लोग बन गइन है। मोटर है, बड़ा घर है, सब के काम लग गए है, मोटा पइसा उठावें हैं, अउर बड़ा सुख से रहें हैं।" सम्भू जवाब में बताइस, "ई बात तो हमउ सुना है; तुमार भउजी तो घूम आइस है अउर यही बात ऊ भी बतात रही। बोले हुंवा आज कल फीजी के सब कुछ मिले लगा है, निगोंन भी। अच्छा मंडली चले है, पूजा पाठ होए है अउर फीजी के बड़ा अच्छा समाज होए गए है हुंवा। लेकिन हम्मे एक्के चिंता सताए है सब कुछ तो हुंवा है लेकिन दिल के सांति है कि नइं? कि सब कोई खली पइसा के पीछे भागें हैं।" हरी फिर थोड़ा सोच के जवाब दिहिस, "देखो भइया, ऊ तो तुमार उप्पर है कि तुम पइसा के पीछे भागो कि थोड़े में संतुस्ट रहे के पलवार के साथे जिंदगी के आनंद लेव। फिर एक अउर बात है कि अभी तो रातू मारा के राज में फीजी अच्छा से चले है। अगले साल मार्च में इलेक्शन है अउर बुतन्ड्रोका तो अभइं से राग अलापे है कि सब हिनुस्तानी लोग के इंडिया भेज देवा जाइ।" सम्भू बहुत राजनीति के बारे में नइं सोचत रहा लेकिन ई बात सुन के थोड़ा घबड़ान अउर बोलिस, "अरे हम लोग के समाज में भी तो अच्छा अच्छा नेता हैं, जइसे कोया, राम रक्खा, आयरीन जय नरायण, जय राम रेड्डी वगैयरा वगैयरा, ई लोग तो कुछ अंड बंड न होए देइहें।" हरी मुस्की मारिस, "ई लोग के का भरोसा है, भइया, ई लोग तो अपने में लड़ें है, ई कहाँ हम लोग के हित में कुछ करिहें। खैर, हम तो बोलित है कि तुम लोग सब चला जाव अउर नहिये अच्छा लगा हुवाँ तो एक दुई साल में लउट आना।" तब सम्भू बोले कि घरवा के का करी। हरी बेचारा उस के सहारा दिहिस अउर बोलिस कि ऊ समान सहित घरवा खरीद लेई - बोले हम घरवा भारा पे दे देगा। आखिर ऊ दिन भी आइस जब चारो के घर दुआर छोड़ के अमेरका जाए के रहा। सब दुखी रहिन लेकिन निर्मला बहुत रोय के अपन घर छोड़िस। हरी उस के दिल बहलाए के वस्ते बोलिस, "अरे भउजी, ई घरवा सब रोज तुम्हरे रही, जब मंगना आये के ले लेना।" सेन फ्रांसिस्को में पहुँच के एक दुई महिन्ना तो लड़की दमाद के संघे रहिन फिर एक घर रेंट पे लिहिन। दूनो लड़कन के थोड़े दिन में काम लग गए। सम्भू के थोड़ा अउर रोज लगा लेकिन कमवा मिल गए ए एअरपोट में बस चलय के काम। फिर देखते देखते ऊ लोग भी अपन घर खरीद लिहिन। अब सम्भू के सोच पकड़ा कि बड़ा लड़का, जितेन के भी सादी कर देक चाहि। वहीं इधर उधर बात बीगिस तब उस के चीन्ह परचे के एक अदमी, बिबेक, बताइस कि नसोरी में उस के पलवार के अच्छी लड़की मांगे सादी करे। फिर का रहा, चट मंगनी पट बिया होए गए। पूरा पलवार अमेरका से फीजी सादी में गइन। हरी के घरे सब रुकिन रहा अउर वहीं से बरात लई गइन। लड़की अउर उस के पलवार के वस्ते मार गहना, गुरिया अउर कपड़ा लई गइन रहा। फिर बड़ा लकड़ा अपन एक घर बगले में खरीद लिहिस। एक साल बाद निर्मला अपन छोटा लड़का, जगदीस से बोले कि हम लोग के भी उमर जाए है अउर तुमार भी सादी होए जाता तो केतना अच्छा रहता। जगदीस बताइस कि ऊ फीजी के लड़की से सादी नइं करी। "तो यहीं के लड़की से सादी कर लेव।" नर्मला बोलिस। जगदीस थोड़ा सोच के जवाब दिहिस, "एक लड़की देखा है, पता नइं पिताजी के पसंद होई कि नइं।" निर्मला थोड़ा घबड़ाए के पूछिस, "का गोरी लड़की है?" जगदीस मूड़ हिलाइस, तब तो निर्मला अउरे घबड़ाए के पूछिस, "तो का करिया लड़की है?" जगदीस हँस के जवाब दिहिस, "नइं, हिन्दू है, लेकिन साउथ अफ्रीका के है अउर हिंदी बात, जानो नहिये के बराबर जाने है। हमार साथे काम करे है अउर मइया बप्पा के एक्के लड़की है। मइया बप्पा सुद्ध हिंदी बात करें हैं अउर गोस माँस नइं खाए हैं। लड़की अंडा अउर मछरी बाहर खाए लेवे है। एक दुई टाइम ऊ लोग के घरे हम गया है। गुप्ता नाम है बप्पा के अउर लड़की के नाम सरोजिनी है। बड़ा अच्छा पलवार है।" निर्मला बड़ी खुसी भइस अउर हँस के बोलिस, "तुम चिंता नइं करो, तुमार बप्पा के कोई इतराज नइं रही। ऊ सब बात मान लेई।" फिर दूनो पलवार एक दिन मिलिन, सादी के बात पक्का होए गए अउर छे महिन्ना बाद धूम धाम से सादी भी होए गए। सादी के वस्ते हरी अउर उस के अउरत के, भाड़ा भर के सम्भू फीजी से मंगाइस। सादी के बाद हरी अउर उस के अउरत के सम्भू लोग खूब घुमाइन तब एक महिन्ना बाद फीजी भेजिन। समय के चक्र चलते रहा। सम्भू निर्मला के पूरा दुनिया घुमाइस, इंडिया, न्यूज़ीलैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अउर बहुत देस। दूनो के एक दुसरे के वस्ते प्यार, समय भी कमती नइं कर पाइस। ऊ लोग हरदम सन्घे उठे-बैठें, खाए-पीयें अउर घूमे जाएँ। कहीं सादी बिया रहे या मर्गी रहे, दूनो परानी जावें अउर काम-काज में पूरा हाथ बटावें। हुंवा के समाज में दूनो के बड़ा इज्जत रहा। अउर तो अउर देखते देखते तीन चार नाती, नतनी, पोता, पोतनी भी होए गइन। निर्मला अउर सम्भू के खुसी के ठिकाना नइं रहा। लेकिन समय किस के वस्ते रुका है कभी। दूनों के बुढ़ापा घेरिस अउर बिमारी सताइस। सम्भू रिटायर होए गए। बिमारी में भी दूनो के साथ नइं छूटा। एक दुसरे के सेवा करते गइन। पहिले सम्भू के दिल के बिमारी भए, बड़ा अपरेसन भी भए। निर्मला रात दिन एक कर दिहिस सेवा में। अपन सेहद के बारे में कुछ भी खियाल नइं करिस, सम्भू के सेवा करे में। पांच छे महिन्ना लगा तब जाए के सम्भू चले फिरे के लायक भए। परचारक बोले जाए, "हे भरत श्रेस्ठ! जिस कालमें योगीजन देह छोड़कर फिर नहीं आते अउर जिस काल में आते हैं उन दोनों कालों को कहता हूँ।" सम्भू अभी भी अपन कोई अउर दुनिया में फसा रहा अउर फोटो ताकत रहा। फिर एक दुई साल बाद निर्मला के दिल के दौरा पड़ा। अस्पताल में कुछ हप्ता रहिस फिर घरे आइस। अब सम्भू उस के सेवा में लग गए। निर्मला बहुत कमजोर होए गए रही। सम्भू से जेतना भये, भर सक सेवा करिस। लड़की पतोह लोग भी आये के पारी पारा देख भाल करिन। एक आद महिन्ना में निर्मला थोड़ा चले फिरे के लायक होए गई लेकिन फिर भी बहुत कमजोर रही। थोड़ा चले फिरे तो थक जाए अउर फिर लेट जाए खटिया पे। सम्भू बहुत चिंता करे अउर केतना डॉक्टर के देखाइस, केतना दवाई करिस। कोई बताइस कि एक बड़ा भारी ओझा है, परवीन नाम के, उस के देखाए लेव। सम्भू तो ई सब चीज में नइं बिस्वास करत रहा लेकिन सोचिस कि कोई रकम से निर्मला ठीक होए जाए, तो जाए के ओझा के देखाइस। ओझा बताइस कि इस के उप्पर बहुत भारी गरहा है, अउर ऊ कुछ झार-फूक करिस। निर्मला कोई छे महिन्ना बाद फिर काफी बिमार पड़िस अउर उस के फिर अस्पताल पहुँचावा गए। परचारक गीता पाठ खतम करके महात्म्य पढ़े लगा, "एक समय विष्णुजी के समीप बैठी हुई लक्ष्मी ने पुछा -..." महात्म्य जइसे खलास भय, सम्भू के बड़ा लड़का आए के सम्भू के कन्धा हिलाइस अउर बोलिस, "पिताजी फूल चढ़ाए देव, गीता पाठ खलास।" सम्भू के थोड़ा झटका लगा जइसे कोई गहिरा सपना में से, जग तो गए है, लेकिन फिर भी आधा नींद में है। सोचे लगा - हमार निर्मला कहाँ है? देखो केतना लोग आइन है पूजा में। हरदम हमार साथे बइठ के पूजा करत रही, आज कहाँ हेराए गई? हम्मे भी देखो कइसन अंड बंड कपड़ा पहिन के बइठा है पूजा में। कहाँ गयी हमार निर्मला? आज हम्मे आयन करा वाला लम्बा पइजाम अउर लम्बा बाहीं वाला सट नइं दिहिस पहिने के। जब भी पहिले पूजा घरे रहत रहा तब हमार निर्मला हमार लम्बा पइजामा, लम्बा बाँही सट, अन्डरवेअर, मोजा सब आइन कर के खटिया पे रख देत रही हम्मे पहिने के वस्ते; अउर कभी कभी मजाक में बोले कि जब हम नइं रहिब तो पता नइं तुम कइसे सब काम करिहो, कोन देख भाल करी तुमार। तो हम बोल देइत रहा कि तुम चिंता नइं करो, तुम से पहिले हम चल बसेगा। फिर सम्भू फोटो के तरफ ताकिस अउर सोचे लगा अरे निर्मला तुम फोटो में केतना सुन्दर लगता है। अच्चके में उस के पूरा खयाल आए गए ए उस के निर्मला तो एक हप्ता होए गुजर गई, उस के अकेल छोड़ के चली गई। डॉक्टर लोग उस के नइं बचाए पाइन। निर्मला के वस्ते तो हियाँ गीता पाठ होए है। ई खयाल जब आइस तब सम्भू के आखी से जोर जोर आंसू बहे लगा। ऊ अपन जेब में से रुमाल निकार के आँखी पोछे लगा। तब तक उस के लड़की आइस डायबीटीस वाला सुई लइ के अउर बोलिस, "पिताजी सुई लगाए देई तब चलो खाना खाए लेव, फिर अराम करना।" लड़की सुई लगाए के सम्भू के पकड़ के दुसरा रूम में लय गई खाना खवाए। सम्भू लड़खड़ात जाए जइसे उस के पूरा दुनिया लुट गए है। तब तक मंडली वाले भी भजन सुरू करिन न एक गवइया गाय लगा - "अरे, उड़ चलो हंसा अमर लो को, ये जग कोई न हमारा रे; ये जग कोई न हमारा मोरे हंसा, ये जग कोई न हमारा रे।"

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^