ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
निर्मल वर्मा
निर्मल वर्मा
(३ अप्रैल १९२९ - २५ अक्तूबर २००५) हिन्दी के आधुनिक कथाकारों में एक मूर्धन्य कथाकार और पत्रकार। शिमला में जन्मे निर्मल वर्मा को मूर्तिदेवी पुरस्कार (१९९५), साहित्य अकादमी पुरस्कार (१९८५) उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार तथा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कालेज से इतिहास में एमए करने के बाद कुछ दिनों तक उन्होंने अध्यापन किया। १९५९ से प्राग (चेकोस्लोवाकिया) के प्राच्य विद्या संस्थान में सात वर्ष तक रहे। रात का रिपोर्टर, एक चिथड़ा सुख, लाल टीन की छत और वे दिन उनके बहुचर्चित उपन्यास हैं। सौ से अधिक कहानियाँ कई संग्रहों में प्रकाशित हुई। जिनमें "परिंदे', "कौवे और काला पानी', "बीच बहस में', "जलती झाड़ी' आदि प्रमुख हैं। "धुंध से उठती धुन' और "चीड़ों पर चाँदनी' उनके यात्रा वृतांत हैं।

पूर्व और पश्चिम

मैं अपनी बात एक स्मृति से आरंभ करना चाहूँगा। कुछ वर्ष पहले मुझे एक सम्मेलन में कोलोन जाने का अवसर मिला था। बात 1982 या 83 की है, जब एक ओर पश्चिम और दूसरी ओर सोवियत संघ के बीच तनाव चरमोत्कर्ष पर था।

लाल टीन की छत

सब तैयार था। बिस्तर, पोटलियाँ-एक सूटकेस। बाहर एक कुली खड़ा था, टट्टू की रास थामे-अनमने भाव से उस मकान को देख रहा था, जहाँ चार प्राणी गलियारे में खड़े थे- एक आदमी, एक औरत, एक बहुत छोटी औरत, जो बौनी-सी

सुलगती टहनी

मैं इस मेले में खाली होकर आया था। सब कुछ पीछे छोड़ आया था- तर्कबुद्धि, ज्ञान, कला, जीवन का एस्थेटिक सौन्दर्य। मैं अपना दुख और गुस्सा और शर्म और पछतावा और लांछना-प्रेम और लगाव और स्मृतियाँ भी छोड़ आया

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