ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
नीलू गुप्ता
नीलू गुप्ता
दिल्ली में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. तथा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से विद्यालंकार। काव्य-संग्रह फूलों की डाली प्रकाशित। पाठ्यपुस्तकें सरल हिन्दी भारती भाग एक एवं दो तथा सरल हिन्दी भाषा व्याकरण लिखी हैं। हिन्दी व भारतीय संस्कृति के प्रचार के लिये विश्व हिन्दी ज्योति तथा उत्तर प्रदेश मंडल आफ अमेरिका की स्थापना की।

स्वतन्त्र वातावरण में घुटन
नीता तेज कदमों से चलकर पार्क में पहुँची। उसे डर था कि कहीं सुजाता उसकी प्रतीक्षा करके चली न जाये। रात उसने मुझे फोन करके जरूर ही आने को कहा था, शायद अपने मन की कोई बात मुझसे करना चाहती थी। तुषार आज जल
अमेरिका में रहकर भारत की ललक
भारतवंशी रहें कहीं भी दूर या पास, हृदय में बंशी भारत की ही बजती है। कितने भी सुख साधन उपलब्ध हों, दिल की हर धड़कन में नाम भारत का ही धड़कता है। दूर, सुदूर रहकर जब कोई अपना भारतवंशी मिलता है तो लगता है ज
प्रेम का बन्धन
लम्बा प्रवास, भारत की तैयारी थी, न थे पैर जमीं पर आकाश में मैं उड़ती थी, आ पहुँची मैं वतन अपने परइन्दिरा गाँधी एयरपोर्ट पर, धीमी बत्तियां जलती थींअमेरिका की चकाचौंध के बाद, मीठी-सी ये लगती थींआंखों से
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