btn_subscribeCC_LG.gif
नेपरविल में बरसात की छटायें
01-Jul-2016 12:00 AM 2441     

अमेरिका में बरसात की छटा बड़ी निराली होती है। प्रकृति की
बरसाती छटा और बसंती सौन्दर्य को देख कर प्राणी कुछ
पल के लिये जीवन की उलझनों को भूल जाता है।

बरसात का मौसम हर चर-अचर को शीतलता प्रदान करता है। इन्द्र देव की कृपा से जब वर्षा रानी आकाश से रिमझिम संगीत के साथ धरती पर उतरती है तब सभी आत्मविभोर हो जाते है। यहाँ अमेरिका में चार मौसम होते है, ज़्त्दद्यड्ढद्ध, च्द्रद्धत्दढ़ , च्द्वथ्र्थ्र्ड्ढद्ध और क़ठ्ठथ्थ्। इसे हम यूँ कह सकते हैं- शिाशिार, बसंत, ग्रीष्म एवं पतझड़। मार्च के प्रायः अंतिम सप्ताह से बसंत के आगमन का स्वागत अप्रैल मास की वर्षा के साथ होता है। कभी कभी बरसात कुछ देर से भी हो सकती है।
अमेरिका एक विशाल देश है। यहाँ जनसंख्या को देखते हुये ज़मीन अधिक है। हर ओर बड़े-बड़े वृक्षों के समूह देखने को मिलेंगे। कहीं तो इतने घने होते हैं  कि छोटे जंगल जैसे दिखते हैं। सड़क के दोनों ओर लाइन से पेड़ लगे होते हैं। शहर में फुटपाथ के एक ओर तरह-तरह के फूल, बड़े-बड़े गमलों में एवं क्यारियों में लगे होते हैं। द्मद्वडद्वद्धडद्म में मकान बंगले जैसे होते हैं, इनमें आगे लॉन में तरह-तरह के फूल, पेड़, भिन्न-भिन्न तरह के पौधे आदि पीछे बैकयार्ड में फूल तथा मनपसंद सब्ज़ी भी लगाते हैं। पिछवाड़े में ड्डड्ढड़त्त्, द्रठ्ठद्यत्दृ प्रायः हर बंगले में बना होता है। बरसात धूप से बचने के लिये छत्रछाया की भी व्यवस्था रहती है। हल्की बरसात मे लोग ग्रिल पर खाना बनाकर पिकनिक करते हैं। चाय काफ़ी का आनंद भी वहाँ बैठ कर पीने मे दुगना हो जाता है।
बरसात होते ही पतझड़ में ठूंठ हुये सारे पेड़-पौधे, झाड़ियाँ-घास सभी हरे भरे हो जाते हैं। लोगों के आगे-पीछे के बाग़ीचे रंग-बिरंगे महकने वाले फूलों जैसे हाइड्रैंजियाज, क्रिसन्थिममस, ट्युलिप, पियुनीज़, लिली, आइरिस गुलाब आदि आदि से सजे होते हैं। ये सब प्रकृति की छँटा को निखार देते हैं। बसंत में लोग टहलने के लिये निकल पड़ते हैं। इस मौसम में टहलने में बड़ा आनंद आता है। साइड वॉक के एक ओर हरे-भरे खुशबूदार फूलों से लदे वृक्ष और दूसरी ओर लान में हरी-हरी घास, छोटे-बड़े पेड़-पौधे रंग-बिरंगी महकती फुलवाड़ी, शीतल बयार सभी मन को मुग्ध कर देते हैं। जब तेज़ बरसात लगातार होती रहती है तब वह एक पारदर्शी दीवार का रूप ले लेती है। घर के अंदर से शीशो की खिड़की से यह दृशय बहुत ही सुंदर लगता है।
कुछ वर्ष पहले हमारे आत्मीय भारत से आये थे। उस दिन सबेरे से लगातार पानी बरस रहा था। सबने तय किया कि इस मौसम में ख्दृण्द क्तठ्ठदड़दृड़त्त् च्र्दृध्र्ड्ढद्ध चला जाय - वहाँ के रेस्टोरेंट में रात्रि का भोजन करेंगे और 98 मंज़िल की उँचाई से सब ओर का दृशय देखने में बड़ा आनंद आयेगा। शिाकागो में बहुत-सी गगनचुम्बी अट्टालिकायें हैं, उनमें से एक 98 मंज़िल ऊँची ख्दृण्द क्तठ्ठदड़दृड़त्त् च्र्दृध्र्ड्ढद्ध है। इसकी अंतिम मंज़िल पर रेस्टोरेंट है। हम सभी गाड़ी में सवार होकर चल पड़े टावर की ओर। पानी रुकने का नाम नहीं ले रहा था। इस बरसात में फुटपाथ पर रेन जैकेट पहने हाथ में रंग-बिरंगे छाता लगाये लोग तेज़ी से अपने गन्तव्य की ओर चले जा रहे थे। रेस्टोरेंट मे पहुँचकर हमारे अतिथि के आनंद का पाराबार नहीं रहा जब 98वीं मंजिल की ऊँचाई से शिाकागो एवं उसके आसपास के अन्य स्थानों को बरसते पानी में देखा। वहाँ से बादल भी अधिक ऊँचाई पर नहीं लग रहे थे। गाड़ियाँ, राहगीर, इमारतें आदि सभी बहुत छोटे दिख रहे थे। ऐसे में भोजन ज़्यादा स्वादिष्ट हो गया था। वे आज तक उस बरसात की छँटा को नहीं भूले है।
बच्चे कभी-कभी मेघ घिरते ही पानी बरसने का बेसब्राी से प्रतीक्षा करते हैं। कब काले मेघा पानी दे और वे सब अपने पड़ोसी साथियों के साथ छपाक छइ्या खेले पानी में। बादलों में तरह तरह के पक्षी, जानवर आदि के चेहरे ढूँढते हैं। बग़ीचे में खरगोश देखते ही सब पकड़ने का प्रयास करते हैं पर सफलता हाथ नहीं लगती है। पिछली बरसात में तो हिरण के जोड़े ने लान में आकर चकित ही कर दिया था।
एक बार छुट्टियों में क्ठ्ठद्धथ्र्ड्ढथ् (क्ष्दड्डत्ठ्ठदठ्ठ) गई। सबेरे से उस दिन मौसम गरम था, शाम होते-होते आकाश मे कुछ बादल घिर आये और हल्की हवा भी चलने लगी तो हम टहलने निकल पड़े। जिस रास्ते से टहलने जाती थी वह दो किलोमीटर से अधिक था। अचानक बादल घने और शयाम रंग हो गये। बिजली की चमक बादलों की गरजन और तेज़ हवा सब कुछ तूफ़ानी सा हो गया। घर अभी कुछ दूर था तभी एक अमेरिकी महिला अपने घर से दौड़ती हुई लम्बे लान को पार करते हुये हमारे पास पहुँची और निवेदन किया कि ड़ठ्ठद क्ष् ड्डद्धदृद्र न्र्दृद्व ठ्ठद्य न्र्दृद्वद्ध ण्दृद्वद्मड्ढ (क्या मैं आपको आपके घर छोड़ सकती हूँ)। मेरे मना करने पर वे बोली द्रथ्ड्ढठ्ठद्मड्ढ थ्ड्ढद्य थ्र्ड्ढ ड्डद्धदृद्र न्र्दृद्व त्द्य'द्म द्यण्द्वदड्डड्ढद्ध द्मद्यदृद्धथ्र्त्दढ़ (कृपया मुझे आपको छोड़ने दीजिये यह बरसाती तूफ़ान है )। मैंने कहा बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरा घर यहाँ से पास ही है आप परेशान न हों। उन्हें समझाकर शीघ्रता से चलते हुये घर पहुँची। मैंने वर्षा के इस रूप में एक मित्र पाया। जिसकी सह्मदयता हम सभी के लिये एक उदाहरण है।
बरसात के मौसम में क्रेन पक्षियों का दल जब मधुर ध्वनि के साथ आकाश में उड़ते हुये निकलता है तो बहुत ही सुंदर लगता है। पेड़ों पर झूले भी देखने को मिलते हैं। क्ष्दड्डत्ठ्ठदठ्ठ क़्द्वदड्ढद्म के ग़्ठ्ठद्यत्दृदठ्ठथ् ख्र्ठ्ठत्त्ड्ढ द्मण्दृद्धड्ढ एड्ढठ्ठड़ण् से सूर्यदेव का बादलों के बीच आँख मिचौली करते हुये क्षितिज पर अस्त होना और उनकी इस यात्रा की छाया को मिशीगन लेक के जल मे भी देखना एक अद्भुत दृशय है। अमेरिका में बरसात की छटा बड़ी निराली होती है। प्रकृति की बरसाती छटा और बसंती सौन्दर्य को देख कर प्राणी कुछ पल के लिये जीवन की उलझनों को भूल जाता है।
वर्षा ऋतु पर अपनी लिखी एक कविता याद आ गई है। वह यों है-
गगन में घिरते बादलों / के बीच / आँख मिचौली करता सूरज / यूँ लगता / जैसे खेल रहा हो / कोई चंचल बालक / पवन देवता क्यूँ पीछे रहते / अपनी दौड़ भी तेज़ करी / अंतर में लिये / वर्षा का जल / घन उमड़ घुमड़ कर / गरजन करते /चंचल दामिनी चमक चमक कर / नरतन करती / शयामल घन नरतन की थाप पर / रिमझिम रिमझिम की / मधुर संगीत के साथ / धरती की प्यास बुझाने लगे / कुछ ही समय में /  पतझड़ में ठुन्ठ हुये / वृक्ष, सूखे पौधे, घास / सभी हरियाने लगे / रंग बिरंगे सुगंधित फूलों से / अवनी को / दुल्हन की तरह सजाने लगे / अस्ताचल की ओर जाते जाते / भास्कर भी अपनी / प्रियतमा धरा को / सतरंगी ओढ़नी उढ़ाते गये / वर्षा मंगलकारणी वर्षा / जीवनदायनी वर्षा / असंख्य जीवों की झोली / ख़ुशिायों से भरती हो / सबके मन को / आनंदित करती हो / त्रासित न हो लोग धरा के / प्यासी धरती पर / इन्द्र देव की कृपा / सदा सर्वदा बनी रहे।

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^