ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
दोस्ती के क्षण
01-May-2019 06:29 PM 261     

दोस्ती में कुछ है जो क्षणभंगुर है
जिस तरह से यह शुरू होती है
जैसे क्षण वह लाती है
जिस अंतरिक्ष में वह होती है
ऐसा लगता है कि दोस्ती हमेशा चल रही है
हमेशा बदल रही है
या जैसे-तैसे दौड़ रही है
लेकिन दोस्ती कभी पूरी तरह से नहीं मिलती
उसे खोने का ख़तरा बना रहता है
उसे कभी पूरी तरह से आलंगित नहीं
किया जा सकता, शायद कभी नहीं।
कॉलेज के बारे में यह ख़ास है कि
यह आपको मजबूर करता है
नई दोस्ती करने के लिए
और हम कुछ नए बन जाते हैं
जो हम नहीं थे
गलियारे में खड़ी लड़कियाँ
कक्षा में तुम्हारे साथ बैठे लड़के।

तुम्हें वही याद रहेगा
जो तुम्हें देखकर मुस्कराया था
या जिसने तुम्हारे साथ चाय पी थी
वही तुम्हें हमेशा याद रहेगा
क्योंकि वही तुम्हारे वहाँ होने
को तुम्हें याद दिलाता है।

दोस्ती वह चीज़ है
जो अजनबी लोगों को
आपके पास लाती है
आप उसके साथ मुस्कराते हैं
पुस्तकालय में देखकर आप हाथ हिलाते हैं
दोस्ती अजनबीपन को तोड़ती है
बिखरा देती है।

शायद उन दोस्तों के नाम ख़ास नहीं हैं
लेकिन उनके चेहरे
उनके साथ बिताए क्षण
बहुत ख़ास हैं।

यही दोस्ती का सार है
इस बड़ी जगह में
जिसका नाम कॉलेज है।

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