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पुणेमें प्रांतसाहबीका पहला चरण
वह तिथी 10 अगस्त 1976 थी जिस दिन मैंने पुणे जिलेमें हवेली असिस्टंट क्लेक्टरका पद संभाला, उसे मैं प्रांतसाहबीका दूसरा चरण कहती हूँ। इससे पहले एक वर्षका प्रशिक्षण कार्यकाल भी पुणेमें ही पूरा किया था। वह एक और असिस्टंट कलेक्टरीके दो वर्ष, ये भारतीय प्रश...
अपना आसमान तराशना
राजशेखर ने उस दिन मुझे अपने शिक्षक-सह-गुरु समर्पण के द्वारा लिखित एक किताब भेंट की। किताब का नाम था क्ठ्ठद्धध्त्दढ़ ठ्ठ द्मत्त्न्र् (अपना आसमान तराशना)। हार्पर कोलिन्स इण्डिया ने अध्यात्म प्रवर्ग में इसे प्रकाशित किया है। राजशेखर की अपने शिक्षक के प्र...
औरंगाबादमें स्वागत
आईएएस में चुने जानेवालोंके लिये दो वर्षोंकी ट्रेनिंगकी योजना यूँ होती है कि पहले एक वर्षका ट्रेनिंग मसूरीकी लालबहादुर शास्त्री नॅशनल अकादमी ऑफ अॅडमिनिस्ट्रेशनमें। फिर नौ महीने अपने अपने काडरके किसी जिलेमें औऱ आखिरी तीन महीने फिर एकबार मसूरी अकादम...
जययात्रा के पड़ाव
मैं अपने अनुभवों को एक फ्रेम में गूँथने की जद्दोजहद करता हूँ तो एक किताब मेरे जेहन में उभरती है। इसका नाम है- "टिया- एक अन्तर्यात्रा।" लेखक का नाम है समर्पण। वे रामकृष्ण मिशन के संन्यासी है। यह पंचतंत्र की शैली की एक आख्यायिका है। टिया एक तोता है,...
धरणगांव की स्मृति
अपनी आईएएस की नौकरीकी बाबत कुछ कहूँ इससे पहले अपने जन्मगांव, बचपन, शिक्षादीक्षा आदिके विषयमें कुछ कहना आवश्यक है।मेरा जन्म धरणगांव नामक एक छोटे गांवमें हुआ। यह महाराष्ट्रके उत्तरी छोरपर जलगांव जिलेमें पड़ता है। इसे गांव कहना ठीक न होगा क्योंक...
अफसर बनकर निकलना मसूरीसे
मसूरीके प्रशिक्षणका घोषित उद्देश्य तो यही है कि सरकरी सेवामें उच्चपदसे ही अपनी नौकरीका आरंभ करनेवाले अधिकारियोंको उनके आनेवाले वर्षोंके उत्तरदायित्व लिये तैयार करना। उन्हें बताना कि ग्रामीण स्तरसे लेकर अत्युच्च केंद्रस्तरतक सारे काम कैसे चलते हैं,...
अकादमीका आनंददायी प्रशिक्षण
मसूरीकी लाल बहादुर शास्त्री प्रशासकीय अकादमी में चलनेवाला प्रशिक्षण कई अर्थोमें संस्मरणीय एवं आनंददायी था। करीब आधे लोग ऐसे थे जो मेरी तरह सीधा विद्यार्थी जीवनसे या एकाध वर्षकी लेक्चररी करके यहाँ आये थे लेकिन लगभग आधे ऐसे भी थे जो जीवनकी अगली गतिव...
देवदासी समस्यासे आमना-सामना
मसूरी प्रशिक्षणके क्रमसे हटकर मैं आज वह घटना याद कर रहीं हूँ जब देवदासी समस्यासे मेरा आमना-सामना हुआ। यह घटना 1984 की है, महाराष्ट्रके सांगली जिलेकी।स्कूल कॉलेजके दिनोंमें आचार्य चतुरसेन शास्त्रीका उपन्यास पढ़ा था - जय सोमनाथ। उसमें देवदासी प...
मसूरी प्रशिक्षणका आरंभ और मेरा बिहारी अख्खडपन तीसरी किस्त
तेरह जुलाईको मसूरी अकादमी पहुंचनेवाले प्रशिक्षणार्थियोंमें मैं और राजी बिलकुल शुरुआती थे। रिसेप्शनपर पहले कमरा बताया गया और कहा गया कि सामान रखवाकर, आरामसे 1 बजेके बाद आना - कई कागजात भरवाने हैं। यहीं मुलाकात होती है अगमचंदसे - अगले वर्ष तकका हमार...
लखनऊ स्टेशन से दूसरी किस्त
हमारी शादी तय होते ही मेरे ससुरजी ने गुरुवार के उपवास का व्रत लिया था कि मैं चुनी जाऊँ। यह श्रद्धा भी समाज में बड़ी ऊर्जा और संबल भरती है। इधर मेरी माँ ने भी शनिवार के उपवास का व्रत ले रखा था। सबके आशीर्वाद और मेरी मेहनत का फल, जू...
प्रशासक और नेता 30 वर्षोंकी बात
वर्ष 1978। एक नया नया आईएएस अधिकारी। असिस्टंट कलेक्टरकी पोÏस्टग, उत्साही युवा मन। अच्छा काम करनेको उत्सुक। कोई गलत काम नही करूँगा, चाहे जितना भी दबाव हो, वगैरह विचारोंसे उत्साहित। एक दिन एक एमएलए से झड़प हो गई। एमएलए ने कहा यह काम मेरे आदमियों...
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