ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
मेघों का घर नीदरलैंड
01-Jul-2016 12:00 AM 2487     

नीदरलैंड में वर्षाऋतु आती नहीं है वह सर्वदा यहीं रहती है। हमेशाा आकाशा में बिना कोलाहल किए बादलों की क्रीड़ा होती रहती है। कभी उत्तरी क्षेत्र से ठंडी हवाओं के मेघों का दल घुमड़ते हुए आता है और ठंडी बरसात का असर छोड़ जाता है। कभी नार्थ-सी की पशिचमी हवाएं बादलों का समशाीतोष्ण समुदाय लाती हैं जो सधी हुई बरसात का सुख दे जाती हैं। कभी उत्तरी अफ्रीका और सहारा प्रदेशा की उष्ण हवाओं के साथ उमड़ते हुए बादलों का हुजूम आता है और धरती को तर करके चला जाता है। वर्ष भर वर्षा, बरखा, झरियार, फुहार, रिमझिम और झींसी की बरसात से धरती भींगती रहती है। मन भींगता रहता है। उमड़ते हुए बादल के साथ स्मृतियां घुमड़ने लगती हैं और मन आकाशा में तब्दील होने लगता है।
सुनील आकाशा में कभी-कभी ही नीलिमा दिख पाती है इसलिए पूर्णिमा का अद्भुत चाँद और विलक्षण रातें कभी-कभी ही नसीब हो पाती हैं। धूसर और स्याह बादलों से परे हुए आकाशा को देखने की यहां के नागरिकों की आदत-सी हो गयी है इसलिए सूर्य देवता के दर्शान होते ही लोग ऐसे अनोखे आनन्द से थिरक उठते हैं जैसे कि आज के दिन उन्हें उजाला, प्रकाशा और ताप का उपहार नसीब हो गया है। लोग "लैकरवीर' (स्वादिष्ट मौसम) का बिगुल बजाते हुये साइकिल से घूमने को निकल पड़ते हैं या अपने साथी की हथेली थामें रह-रहकर उन्हें चूमते हुए और आकाशा की ओर अपनी गगनचुम्बी मुस्कराहट और दृष्टि उछालते हुये चलते रहते हैं। दरअसल नीदरलैंड सहित यूरोप के पशिचमी देशाों बेल्जियम, लिवसमबर्ग, पशिचमी फ्रांस, डेनमार्क आदि में अन्य सभी ऋतुएं वर्षा से भींगती हुई ही धरती पर अपने कोमल पाँव रखती हैं।
वर्षाऋतु का वसुधा पर जैसे-जैसे प्रभुत्व बढ़ता है सौंदर्य अंगड़ाई लेने लगता है। प्रकृति का लास्य सौंदर्य की मंजरियों में बदलने लगता है। नीदरलैंड की धरती पर ही यह सुगन्धित सौंदर्य करवटें लेते हुये नहीं महसूस होता है अपितु एशिाया और यूरोप के रूप में बंटी हुई धरती-बसन्त और वर्षा के कलेवर में एक साथ सिमट कर सृष्टि का पर्याय बन जाती है।
नीदरलैंड के भारतवंशिायों की लोक-भाषा के शाब्द को लेकर कहें तो यह "पनियारे मौसम' का देशा है। डचेस की शाब्दावली में कहें तो यह "पानी की धरती है' या जल के साथ जीने वाली धरती है। समुद्र-तल से आधा से तीस मीटर से नीची धरती वाला देशा अपनी तरह से "आधुनिक पाताल नगरी' ही है। नार्थ-सी में नाक तक डूबी हुई यहां की जमीन है जिसे डच वैज्ञानिकों की जल प्रबंधन निपुणता ने समुद्र-तल से हासिल किया है। ऐसे में हवाओं को इस देशा की धरती के लिए न्यौता देने में विलंब नहीं लगता है।
नीदरलैंड की वर्षा में "बरसात का सौंदर्य है'। तूफान का तांडव नहीं। संतों की तरह बिना किसी शाोर के बादल आते हैं और संयमित वाणी की तरह बरसते हैं। वर्ष में एक-दो हफ्तों को छोड़कर प्राय: मोहक बरसात होती है। बादलों की गति और उनकी यायावरी इतनी तेज और अप्रत्याशिात होती है कि रेडियो, दूरदर्शान और मोबाइल में हर घंटे की सूचनाओं के बावजूद बादल और उसकी बरसात का अनुमान प्राय: कठिन होता है। इसलिए इन देशाों में कहावत है कि वाइन का स्वाद, धन का टिकाव, मौसम के असर और स्त्री के संदर्भ में पहले से कुछ भी विशवसनीय होकर अनुमान करके नहीं कहा जा सकता है। इसीलिए इसके साथ आगे भी जोड़ा जाता है कि वाइन, वेदर, वाइफ और वेल्थ यह चारों डब्ल्यू. यदि आपके तकदीर में गुडनेस के साथ हैं तो आप सबसे अधिक लकी या भाग्यशााली हैं।
वर्षा की अनियमितता और अनिशिचतता के कारण बाहर निकलने पर उनके साथ बारहों महीनों (रेखुन यास) बरसाती देह पर रहती है- क्योंकि बस, ट्राम, ट्रेन की ओर भागती हुई देह सदैव घड़ी की सुइयों पर नजर टिकाये हुए दौड़ती रहती हैं। या तो साइकिलों से दूरियों को लांघते हुये समय में फलाँगते रहते हैं। शाान्त बरखा की तरह ही यहां लोग प्राय: धीमी आवाज में संवाद करते हैं न तो यहां के बादल ही गरजते हैं और न ही यहां के लोग भी। यहाँ के घर-मकान-दुकान गांव और शाहरों के भवनों की बनावट इतनी सिकुड़ी हुई होती है कि कहीं छज्जे या बारजे नहीं होते हैं इसलिए बरसात होने पर यदि आप रास्ते में हैं तो आप अपने उपायों से ही अपना बचाव कर सकेंगे। यहां कोई किसी के सुख-दु:ख में सहायक नहीं होता है। व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला मानकर लोग अपने-अपने जीवन के रास्ते में आगे बढ़ लेते हैं।
वर्षा की फुहार का ही यह मादक प्रभाव होता है कि वसन्त-ऋतु के फूलों और फलों की सुगन्ध हवाओं में तैरने लगती है। वर्षा की झरियार में वसन्त की सुगन्ध और सुकुमारता और सौन्दर्य देह में समाने लगती है। हरियाली सर्वत्र कुलाचें भरने लगती हैं। खेतों में चरते हुये गायों, भेड़ों और घोड़ों की आंखों में भी इस हरीतिमा का सुख आंका जा सकता है।
यहाँ की हवाओं में बरसात सदैव घुली-मिली रहती है। इसलिए हवाएं सदैव ठंडी ही रहती है। वर्षा की बूंदे- उनकी रिमझिम-मन के साथ प्राय: झिलमिल संवाद कायम रखती है, जो हर व्यक्ति के साथ अपना अलग रिशता कायम करती है। किसी के लिये वरदान सिद्ध होती है तो किसी के लिए अभिशााप।
नीदरलैंड मेघदूतों का विलक्षण देशा है। दसों दिशााओं के मेघदूतों की यह तीर्थ-स्थली है न जाने कितने महासमुद्रों के वरदानी मेघदूत इस धरती को अपनी प्रणय प्रयस्विनी धार से सींचते हैं और वर्ष भर सींचते रहते हैं कि लगता है यहां आने वाले मेघ-प्रकृति के देवदूत है। वर्ष भर वर्षा का साम्राज्य रहने के कारण प्रकृति का सौंदर्य, पक्षियों का स्वरकंठ अपने उत्कर्ष पर रहता है। बरसात की धुन के साथ वे भी अपना राग अलापते रहते हैं। उनके कलरव का अद्भुत शामा बँधा रहता है। वह फिर फुटपाथ हो या मैदान। इस कारण भी यहां के वातावरण में अपनी तरह की रूमानियत रची हुई है। हंस, बतख, गूस जैसे पक्षी अन्य जल-पक्षी-शिाशाुओं के साथ नहरों, नदी और फुटपाथों के घसीयाये तट पर निर्भय होकर दल-बदल सहित आनंद लेने लगते हैं। मेघों के यायावरी चरित्र ने नीदरलैंड के नागरिकों को भी अपनी तरह से यायावर प्रकृति का बना दिया है। मार्च से अक्टूबर तक यदि खुशानुमा घटाओं की वर्षा, वृक्षों के हिंडोलों से लरजती हुई धरती में समा जाती हैं। तो नवम्बर से फरवरी माह की शाीतल और बर्फानी हवाएं पूरे देशा को उजली रजाई ओढ़ा देती हैं। शाीत ऋतु की अगवानी से लेकर अन्त तक वर्षा का चरित बर्फानी रहता है जिससे शाीत का प्रकोप बढ़ता है, इससे पूर्व तक उजले बादलों से भरे आकाशा से हंसों के कलरव की-सी परछाई झरती है और इसके बाद पंख सरीखी पर्त-दर-पर्त व्हाइट स्नो झरती है।
वर्ष भर वर्षा का आनन्द जीने वाली इस धरती पर कभी बाढ़ नहीं आती है, कहीं जल-जमाव नहीं होता है, क्योंकि यह लाखों की संख्या वाली नहरों का देशा है। जहां कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के द्वारा वर्षा का अतिरिक्त जल निरन्तर नहरों के माध्यम से समुद्र तक वापस पहुंचाया जाता है। इसी कारण, जल प्रबंधन के क्षेत्र में नीदरलैंड देशा विशव का गुरु है और उसने अपनी इसी तकनीक क्षमता के बल पर दुनिया में समुद्र और जल-प्रबंधन की विजय का एकछत्र साम्राज्य रचा रखा है।

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