ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
मन की बात Next
अमेरिका में औरतों की दशा

रोवन पोप के ये वाक्य एक खड़े हुए विमान से गूँजे, स्पीकर से बाहर आए और मेरे दिल को छू गए। "तुमको आदमी से दुगना बेहतर होना पड़ेगा, उनके आधे तक पहुँचने के लिए।" रोवन पोप अमेरिकन टेलीविज़न ड्रामा में काम

देश-विदेश के दरम्यान

तरक़्क़ी की सीढ़ियाँ चढ़ते-चढ़ते हम अपने औ अपनों से कितनी दूर निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। समय की बेलगाम उड़ान हमें कब, कहाँ से उड़ा के ले जाती है ये समय गुज़र जाने के बाद ही पता चलता है... इसी तरह की

समय के आईने में भारतवंशी

सुदूर समय में भारत एक संस्कृति प्रधान देश रहा है। कभी वह अपने मूल्यों एवं आदर्शों के कारण विश्व गुरु भी रहा है। लेकिन आज दुनियाभर में अमेरिकी संस्कृति का बोलबाला है। अमेरिका आर्थिक एवं ज्ञान विज्ञा

दूर तुझसे नहीं हूँ माँ

अमेरिका एक भागती दौड़ती दुनिया, अपने में मस्त, किसी के लिए ना रुकने वाली, नशे में धुत लोग, यहाँ की सड़कों पर अश्लीलता में लिप्त युवा, विशाल गगनचुंबी इमारतें और एक ऐसी जगह जहाँ पहुँचने के बाद आपको कुछ

अमेरिकी हो गये भारतीयों का द्वंद्व

अमेरिकन महाद्वीप में भारतीय दक्षिण एशियाई लोगों का आगमन विशेषकर 19वीं सदी से आरम्भ हो गया था जिनमें स्वामी विवेकानन्द, सुभाषचन्द्र बोस, स्वामी रामतीर्थ व स्वतंत्रता संग्राम और गदर से जुड़े अनेक व्यक

प्रवासी का दर्द

प्रवासी एक सामाजिक प्रक्रिया है, इसे रोका नही जा सकता। देखा जाए तो दिल्ली भी प्रवासियों ने ही आबाद किया। पाकिस्तान से आए शरणार्थियों ने इसे सही मायने में आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया। जब भारत एक देश

बड़े परिवार से जुड़ना

प्रवासी शब्द हृदय में कई तरह के भाव जगाता है। इसका एक संदर्भ तो शायद वहाँ से शुरू होगा, जब हमारे दादाजी गाँव छोड़कर तहसील आए और जब पिताजी ने शहर की ओर कदम बढ़ाये। और इसके आगे अगली पीढ़ी ने समुंदर के प

अमेरिका, बच्चे और हिंदी

मैं जब आज सुबह सोफ़े पर बैठ कर अपनी चाय के मज़े ले रहा था कि मेरी छह वर्ष की बेटी आई और कौतूहल से पूछने लगी, "पा, रंजना तो हम लोगों के बाद इण्डिया से अमेरिका आई थी, फिर उसे मुझसे अच्छी हिन्दी क्यूँ न

मैं भी प्रवासी हूं

बचपन से पहचान का यह सवाल परेशान करता रहा है। जब पटना शहर से गांव जाता था तो लोग ताने देते थे। बबुआ शहरी हो गया है। चूड़ा दही कम ब्रेड बटर खाता है। शहर और गांव के एक फर्क को जीता रहा। दोनों ही अस्थाय

मेरी पसंदीदा हिन्दी फिल्में

यहाँ से पचास-पचास कोस दूर गाँव में जब बच्चा रात को रोता है, तो माँ कहती है बेटे सो जा, सो जा नहीं तो गब्बर सिंह आ जाएगा। शोले फिल्म का ये संवाद आज भी लोगों की जुबान पर तरोताज़ा है। यह कहना अतिशयोक्त

कुछ बेमिसाल फ़िल्में

फ़िल्में मनोरंजन करती हैं हमें हंसाती हैं रुलाती हैं पर काफी कुछ बता जाती हैं और बहुत कुछ सिखा भी जाती हैं। वैसे तो भारत में दुनिया में सबसे ज्यादा फ़िल्में बनती हैं। हर साल फ़िल्में आती जाती रहती हैं

हिंदी फिल्मों के विविध आयाम

दुनिया में भारत की पहचान जहां भारतीय संस्कृति एवं कठिन परिश्रम को लेकर होती है। वहीं विश्व में हिंदी सिनेमा यानी बॉलीवुड को भी खूब सराहा जाता है। हिंदी सिनेमा ने भारतीय संस्कृति को विश्व में भलीभां

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 12.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^