ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
लीना मेहेंदळे
लीना मेहेंदळे

हिन्दी एवं मराठी की प्रखर लेखिका एवं वक्ता। विज्ञान में स्नातकोत्तर। मगध महिला महाविद्यालय में एक वर्ष अध्यापन। 1974 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल। महाराष्ट्र शासन के विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन। हिन्दी के प्रौद्योगिकी विकास के शोधपरक चिन्तन द्वारा भाषायी एकता तथा राष्ट्रभाषा एवं नागरीलिपि के उन्नयन में संलग्न। आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में सक्रिय प्रतिभागिता। सम्प्रति - प्रौद्योगिकी विकास में कार्यरत।


प्रशासक और नेता 30 वर्षोंकी बात
वर्ष 1978। एक नया नया आईएएस अधिकारी। असिस्टंट कलेक्टरकी पोÏस्टग, उत्साही युवा मन। अच्छा काम करनेको उत्सुक। कोई गलत काम नही करूँगा, चाहे जितना भी दबाव हो, वगैरह विचारोंसे उत्साहित। एक दिन एक एमएलए से झड़प हो गई। एमएलए ने कहा यह काम मेरे आदमियों
11वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन, मॉरीशस
ग्यारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में शामिल होने के लिये पुणे-दिल्ली विमान प्रवास में अचानक ये पंक्तियाँ मन में उदित हुईं। भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ 16 अगस्त को देर रात दिल्ली से मॉरीशस के लिये रवाना हुए और अगली सुबह वहाँ पहुँचे।हवाई अ
वर्णिकाओं, सुना
वर्णिकाओं, सुनोतुम रात को बाहर ना निकलोतुम घर से बाहर ना निकलोतुम माँ के पेट से ना निकलोतभी तुम हम से बचोगी।हम हैं रावणऔर राम तोइस देश से विदा हो चुके हैंहम हैं द्यूत-सभा केदुःशासन और कर्ण
भाषायी समाधान की साझी तकनीकि युक्ति
वर्तमान काल में विदेश में बसे भारतीय मूल के निवासियों की संख्या दो करोड़ के आसपास है। प्रस्तुत लेख उनके भाषा संबंधित विमर्श के लिये है। खासकर लेखन के लिये भारतीय भाषाओं व लिपियों को कम्प्यूटर के माध्यम में प्रस्थापित करने की सरल-सी युक्ति बतलाने के

समृद्धि व संगणक का भाषाई समीकरण
पिछले महीने मुझे आयआयटी पवई के एक विद्यार्थी समूह को संबोधित करना था। वे ग्रामीण इलाकों की समृद्धि के लिये कुछ करना चाहते हैं और हमारा विषय भी वही था - ग्रामीण प्रगति के रास्ते क्या-क्या हो सकते हैं। एक प्रश्न यह भी था कि वैश्विक बाजार में हम अपना
वर्णमाला, भाषा, राष्ट्र और संगणक
भारतीय भाषा, भारतीय लिपियाँ, जैसे शब्दप्रयोग हम कई बार सुनते हैं, सामान्य व्यवहार में भी इनका प्रयोग करते हैं। फिर भी भारतीय वर्णमाला की संकल्पना से हम प्रायः अपरिचित ही होते हैं। पाठशाला की पहली कक्षा में अक्षर परिचय के लिये जो तख्ती टाँगी होती ह
हिंदी राग : अलगाव का या एकात्मता का?
इस देवभूमि भारत की करीब 50 भाषाएँ हैं, जिनकी प्रत्येक की बोलने वालों की लोकसंख्या 10 लाख से कहीं अधिक है और करीब 7000 बोली भाषाएँ, जिनमें से प्रत्येक को बोलनेवाले कम से कम पाँच सौ लोग हैं, ये सारी भाषाएँ मिलकर हमारी अनेकता में एकता का अनूठा और अद्
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