ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
कृति-विमर्श Next

जीवित रहेगा प्रमथ्यु
01-Sep-2016 12:00 AM 2485
जीवित रहेगा प्रमथ्यु

कभी-कभी इतिहास में ऐसे क्षण आते हैं और अक्सर आते हैं, जब जीवन के किसी मोड़ पर देखी, सुनी या पढ़ी रचना साक्षात् मूर्त हो जाती है। सामयिक और प्रासंगिक हो जाती है। उसके प्रतीक नूतन अर्थ के आलोक में भास्

अद्र्धनारीश्वर : एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व
01-Sep-2016 12:00 AM 2474
अद्र्धनारीश्वर : एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व

काहानी, उपन्यास और नाटकों के रचनाकार विष्णु प्रभाकर वैसे तो हिंदी साहित्य के लिए एक प्रतिष्ठित नाम हैं किन्तु उनकी पुस्तक "आवारा मसीहा" ने उन्हें एक उत्कृष्ट जीवनीकार के रूप में भी स्थापित कर दिया

गुजिश्ता दौर के ऐतिहासिक चरित्र
01-Sep-2016 12:00 AM 2467
गुजिश्ता दौर के ऐतिहासिक चरित्र

साहित्यिक दृष्टि से आज हिंदी बहुत समृद्ध है। नाना विधाओं के साहित्य से हिन्दी का रचना संसार जगर-मगर है। कविता की सरिता तो आठवीं-नवीं सदी में ही बह निकली थी। लेकिन गद्य का झरना उन्नीसवीं सदी में आके


महेश अनघ की कहानियां कौतूहल काव्य रस और सामाजिक न्याय की त्रिवेणी
01-Sep-2016 12:00 AM 2471
महेश अनघ की कहानियां  कौतूहल काव्य रस और सामाजिक न्याय की त्रिवेणी

समकालीन हिन्दी की कृतियों में "जोग लिखी" और "शेषकुशल" नवगीतकार और कथाकार महेश अनघ के ये    दो कहानी संग्रह, इस कारण से उल्लेखनीय कहे जा सकते हैं क्योंकि इनमें कौतूहल काव्य रस और सामा

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