ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
खोया क्या-क्या पाया हमने लगे सोचने आज
01-Jan-2018 05:09 PM 1362     

एक

खोया क्या-क्या पाया हमने लगे सोचने आज
लगा अमेरिकी बटनों पर हिंदी वाले काज
हिंदी वाले काज पहनते सभी मुखोटे
हो जाते हैं फ़िट बटन हों छोटे-मोटे
तब भी हिंदी भाषा का इक बीज न बोया
दूध ख़रीदा पतला-पतला अच्छा खोया-खोया।


दो

बेटी बोले नाक से बेटा गिटपिटयाय
सुनकर बानी ख़ून की पिता रहें मुसकाय
पिता रहें मुसकाय नहीं कुछ उनके बस में
हवा हो गयी हया लाज की बीती रसमें
घबराते हैं वे रोज़ बनी जब कविता केटी
चली कहीं ना जाय छोड़कर बेटा-बेटी।

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