ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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यादों के पार
यादों के पार

एक सुवासित परिचित झोंका
आ कर मुझे निहाल कर गया
कस्तूरी सा उच्छवास वह
दग्ध हृदय को सिक्त कर गया।

इतने दिन मैं सब से छुप कर
यह संदूक भरा करती थी
अब बस शायद यही मेर ...

01-Oct-2017 03:21 PM 85
चूल्हा
चूल्हा

मैं चूल्हा हूँ
सदियों से जल रहा हूँ
झुलस रहा हूँ
लेकिन उफ़
मेरे शब्दकोश में नहीं है

सूरज भी मेरी बराबरी नहीं कर सकता
क्योंकि वह केवल दिन में जलता है
और ...

01-Oct-2017 03:18 PM 117
काश कि ऐसा हो!
काश कि ऐसा हो!

और हाँ, वो ख्वाब होगा मानीखेज
उस ख़ास समय का
जब सूर्य का ललछौं प्रदीप्त प्रकाश
होगा तुम्हे जगाने को आतुर
हलके ठन्डे समीर के
कारवां में बहते हुए
तुम्हारे काले घने केश र ...

01-Oct-2017 03:13 PM 99
बरसेंगे क्या फ़िर से अब
बरसेंगे क्या फ़िर से अब

लगता है छँट तो गए हैं
बादल आसमाँ से
कहीं कहीं!
जाने क्या पैदा हो
गंदम या ख़र पतवार
पर बरसे तो थे
वोह बादल बे हिसाब।

रज़ामन्दी तो थी
पूरी की पूरी & ...

01-Oct-2017 03:08 PM 110
असंतोष मुझको है गहरा
असंतोष मुझको है गहरा

सोचता हूँ, यह अंत है खेल का
या एक और खेल है अंत में
या तैरते-उतरते
पुण्य और पाप को संकेतित करती
यह अंतिम पलों की लीला है क्या
कि हवा में घुल-घुल कर
प्रकाश-बिम्ब-से
...

01-Oct-2017 03:03 PM 99
वो भ्रम मरता कुआँ
वो भ्रम मरता कुआँ

वो भ्रम

इंसान सवार है
निश्चित अनिश्चित के नाव पे
अपने पराये के बीच
किस पर विश्वास करे
मुश्किल है कहना
समय का फेर है
सब मुखौ’टों का खेल है
किसी ने ...

01-Oct-2017 02:59 PM 108
गंगा के प्रति आस्था बालगृह
गंगा के प्रति आस्था  बालगृह

गंगा के प्रति आस्था

आस्था के प्रदर्शन में अब बदलाव होना चाहिए
पुष्प, दीप, वस्त्र के विसर्जन का रुकाव होना चाहिए।

विसर्जित पुष्प, दीप, वस्त्र आखिर जाते कहाँ ...

01-Oct-2017 02:53 PM 107
असंतोष मुझको है गहरा
असंतोष मुझको है गहरा

लौट-लौट आ रहे हैं
भूली भीषण अधूरी कहानी-से
दर्दीले दृश्य दूरस्थ हुई दिशाओं से
उलझे ख़याल...
तुम्हारे, मेरे
मकड़ी के जाल में अटके जैसे
हमारे सारे प्रसंग
जिनका आघात< ...

01-Sep-2017 03:59 PM 305
खड़ी मैं अकेली कभी सोचा न था
खड़ी मैं अकेली कभी सोचा न था

खड़ी मैं अकेली

कई बार ढूँढा, उत्तर नहीं पाया
कौन सुलझाए, यह कैसी पहेली
पति, पुत्र, पैसा, सब पाया पर  
लगता क्यों, खड़ी मैं अकेली?
 
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01-Sep-2017 03:51 PM 312
चिड़ियाँ
चिड़ियाँ

पौ फटते मुंडेर पर बैठीं चहक जगातीं नींद से चिड़ियाँ
भोली भाली छल कपट से दूर मासूम मतवाली चिड़ियाँ
कहाँ उड़ गईं कौन से देस पधारीं सुंदर चितचोर चिड़ियाँ
सूना सूना घर का आँगन बिना चहकती नन् ...

01-Aug-2017 11:45 PM 755
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