ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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एक दो - जितेन्द्र वेद
एक क्यों छीना जा रहा है प्यार और प्यास भीछीनने को आतुर वे जीवन की आस भी पंजों में फँसा लिया है, उन्होंने जहाँ कोकब्जा कर रोटी पर, छीन ली है साँस भी आदिवासी भी धकियाये जा रहे जंगल सेछिन गए हैं उनसे पेड़ और तुच्...
आलाप नैना रे
आलाप शृंगार रस सभी गाते हैंविरह किसी को नहीं भाता हैइस जहाँ में मैं ही एक पगली हूँजिसे दर्द में ही मजा आता है। लोग फूलों की बाते करते हैंहम सिर्फ कांटों पे चला करते हैंमिलन के गीत कैसे गाऊँजब बिछोह...
लौटती चेतना अमानुष
लौटती चेतना उड़ जाएगा पुतलियों से निषाद निराशा प्रभाव न छोड़ पाएगीबोझल हृदय की ये स्थिति भला कब तक ठहर पाएगी? पलकों को मूँद कल्पना सजा हाथों में सिमटा जादू जागायदि पल भी बीते आशा-छाँव में तो यथार्थ म...
शांत बहने दो अकेला मुसाफिर
शांत बहने दो मैं मुसाफिर हूँ अकेलाएक पथ पर चल रहा सुबह उठकर जिधर जाऊँकष्ट-दुख क्या-क्या न पाऊँपक्षियों की भाँति डेराकुछ ठिकाना है न मेराआज तेरे द्वार पर हूँउस द्वार पर भी कल रहा थामैं मुसाफिर...
चाहत बोलती तस्वीर
चाहत तू आना आधी रात को जब चांद चमकता होऔ रजनीगंधा रातरानी फूल महकता होजो सारा जग सोया हुआ औ आसमां भी सोयातू ऐसे में आना सनम अरमान तड़पता हो। यूं सुनसानी रातों में जुगनू चमचमा रहा हैमैं मर ना जाऊं हाय जब दिल जोर...
सम्भाल पैबंद
सम्भाल ठेले पर बिकते छोटे बड़े झुमके खरीदने का बहुत शौक था मुझेवैसे ही जैसेकिराने की दुकान पर मिलने वाले लोगों से बतियाने का विदेश में ना तो ठेले लगते हैना ही किराने की दुकानें मिलती हैं पुरानी झुम...
दोस्ती के क्षण
दोस्ती में कुछ है जो क्षणभंगुर है जिस तरह से यह शुरू होती हैजैसे क्षण वह लाती है जिस अंतरिक्ष में वह होती हैऐसा लगता है कि दोस्ती हमेशा चल रही है हमेशा बदल रही है या जैसे-तैसे दौड़ रही है लेकिन दोस्ती कभी प...
अट्ठानवे प्रतिशत
आज मुझे अट्ठानवे प्रतिशत मिले और यह अच्छा महसूस करवाता है ऐसा महसूस होता है जैसे कुछगर्व करने लायक है यह मुझे मान्यता देता है। काश मैं बता सकतीकि मैंने यही उम्मीद किया थालेकिन मैं नहीं कह सकतीकाश मै...
भारत और पाक़िस्तान के प्रति अणुशस्त्र
भारत और पाक़िस्तान के प्रति समझो बन्दे पाक़िस्तान!समझो बन्दे हिन्दुस्तान!जागो, देखो, आँखें खोलोदुहराना न वही दास्तान! शरीर अलग है तुम दोनों का, अलग रहेगा, यह समझोमन तो फिर भी एक ही ठहरा, एक रहेग...
ऐ कवि सूरज उदास है
ऐ कवि ऐ कवि तुम्हारी कविताओं मेंलड़कियां सिर्फ श्रृंगार में क्यों डूबी होती हैं तुम गुलाबी गाल नागन-सी जुल्फ और गोरे रंग पर लिखते हो क्यों तुम्हे कंडे पाथतीपपड़ी पड़े होठों और रूखे बालों वा...
अंतद्र्वंद
फिर से वो ही आग जलेगीफिर से वो पानी बरसेगाबबली का दिल रो रोकर फिर से पापा को तरसेगा।माँ के सूखी छाती भी सोचे मुन्ना कैसा होगाशायद निंदा करते नेता के मन में जिंदा होगा। फिर से आंगन में टूटी चूड़ी के ...
कैसा सफ़र राह देख रही हूँ
कैसा सफ़र माचिस की तीली-सा जीवन जला बुझाजो दिखलाती थी ख़्वाब उन रातों का क्या हुआज़िंदगी ने मुझे डाला किस उलझन मेंन दौड़ ख़त्म हुई न जीत ही सकाअपनी मर्जी से किस्मत कैसे लिखवातेएक अधूरापन मेरा हम सफर...
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