ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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फिर एक तूफ़ान
फिर एक तूफ़ान

बरसों बरसों पहले
जब मैं आप्रवासी नहीं था

बड़े उजले भेस में
आई थी एक काली आँधी
उखाड़ती अनगिन पनपते पौधे
और वटवृक्ष भी
उजाड़ती कितने ही गाँव, शहर

धीरे-धीरे फ ...

01-Jan-2018 05:16 PM 181
खोया क्या-क्या पाया हमने लगे सोचने आज
खोया क्या-क्या पाया हमने लगे सोचने आज

एक

खोया क्या-क्या पाया हमने लगे सोचने आज
लगा अमेरिकी बटनों पर हिंदी वाले काज
हिंदी वाले काज पहनते सभी मुखोटे
हो जाते हैं फ़िट बटन हों छोटे-मोटे
तब भी हिंदी भाषा का इक बीज ...

01-Jan-2018 05:09 PM 191
ओ प्रवासी
ओ प्रवासी

एक

दूरियां तो मिट गईं तकनीकियों की डोर में बांध
किन्तु अपने आपसे क्या मिट सकी दूरी ज़रा भी
टूटते सम्बंध के सन्दर्भ के अवशेष चुनता
और कितने दिन भ्रमों में घिर रहेगा ओ प्रवास ...

01-Jan-2018 04:17 PM 244
सुनो माँ! बात करनी थी!
सुनो माँ! बात करनी थी!

सुनो माँ! बात करनी थी!
तुम्हें वो याद है
मिट्टी की गुल्लक दो रूपये वाली
उसे मैं भूल आई हूँ वहीं आले के कोने में
वो पूरा भर गया होगा!
अब बाबूजी नहीं हैं तो
बड़े भैया ने ...

01-Jan-2018 04:00 PM 243
अगले खम्भे तक का सफ़र
अगले खम्भे तक का सफ़र

याद है
तुम और मैं
पहाड़ी वाले शहर की
लम्बी, घुमावदार सड़क पर
बिना कुछ बोले
हाथ में हाथ डाले
बेमतलब, बेपरवाह
मीलों चला करते थे
खम्भों को गिना करते थे
और मै ...

01-Jan-2018 03:36 PM 214
कहीं देर न हो जाये
कहीं देर न हो जाये

बहुत कह चुके बहुत सुन चुके बस
अब कहीं देर न हो जाये
चलो मिलकर करें शंखनाद सभी
एक आशावादी शुरुआत के साथ
अपनों को अपनों से मिलाएं

भौतिकतावादी चमक-दमक
निगलती जा रह ...

01-Jan-2018 03:32 PM 256
बावरा मन
बावरा मन

चहकती चिड़िया संग
कभी लगे चहकने
दूर गगन में लंबी
और ऊँची उड़ान भरे
कभी तितली संग
फूलों पर लगे मँडराने
बावरा मन मेरा।

पूनम की रात में
पूर्णमासी चाँद के संग...

01-Dec-2017 10:04 PM 304
जीर्णोद्धार नुमाइश
जीर्णोद्धार नुमाइश

चन्दन-चन्दन संगमरमरी
देह पीताम्बर छूटे...

दरवाजे का नीम बिफरता
सखी सहेली सिसकें
तुलसी चौरा राह रोकता
बाबुल रोएँ छिप के
धीमी पड़ती सभी गुहारें
रिश्ते नाते छूट ...

01-Dec-2017 07:04 PM 291
एकाकीपन
 एकाकीपन

ख़ाली झोली रीते हाथ
पूछ रही हूँ ख़ुद से आज
क्या खोया क्या पाया है
जीवन आज कहाँ ले आया है।

सब कुछ होकर कुछ भी नहीं
अपने हैं पर पास नहीं
यादों की अब क्या बिसात
...

01-Dec-2017 06:57 PM 287
आओ टिवस्ट करें
आओ टिवस्ट करें

समझदारी से कोई लेना-देना नहीं
बहुत सहजता से इस नाटक में
गंदा करने का सिलसिला जारी
पागलपन को कब तक बर्दाश्त करता
दु:ख के बादल जल्द ही छटे
सड़कों पर मौसमों के साथ
बदलती ...

01-Dec-2017 06:52 PM 282
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