btn_subscribeCC_LG.gif
कविता Next
सृष्टि का उत्सव रोटी कब तक पेट बाँचती?
सृष्टि का उत्सव माटी के निर्झरबस्ती के घरप्रकृति के गीतों के संस्पर्शसाक्ष्य पंछी के नव कलरवखण्ड विश्वासों की चट्टाननर्मदाओं के यशः प्रतीकजातियों की सुन्दर कविताजयंतों के मनोज...
चकमक आवाज़
चकमक हम पास हो कर भी टटोलते अपने स्पर्श कोकभी छू लेना मन भर था पर अब नहीं रही वह सीमा हमारी देह परजैसे कुछ अनजान गमक उपस्थित चिरपरिचित के नेपथ्यसालता हुआ बहुत पास फिर भी अलभ्य आसंग वो बावला अपन...
बारिश जिंदगी
बारिश तस्वीर बनाई थी एकबड़ी खूबसूरत...अपनी पसंद के चुनिंदा रंग सजाए थे नयन नक्श लबों की हंसीबालों के घुंघराले लट भी बनाए थेब्रश होठों में दबा के, खुद पर इतरा केजरा अंदर कुछ लेने गई थीऔर जब वापस आई एक...
संकल्प जुर्रत
संकल्प पिता वो वृक्ष है जो कड़ी धूप सहकरघनी छाँव देता है पिता वो तरु है जो रात-दिनसींचता है प्रेम-जल से अपनी शाखाएँ पिता वो दरख़्त है जो कठिनाइयों के आँधी-तूफ़ान झेलता है औरअपनों पर आँच नहीं आन...
कलयुग गड़ासे सा तना है समय मेरी गर्दन पर
कलयुग यह उस युग की बात हैजब भाषा सेसौम्यता, उदारता और विनम्रता जैसे शब्दों का लोप हो गया था सहनशीलता और सहिष्णुता - बस राजनैतिक अनुष्ठानों में बाकी थे हर आदमी के हाथ मेंएक पुरातन लोकना...
माछेर झोल
माछेर झोल जब ओडिशा मेंचलें ठंडी हवाएंतट को छूने वालीतब तुम आना मुझे यादबंगाल में मैं चख लूँगातुम्हारे हाथ की बनीमाछेर झोलजब उदास होनासाहिर को सुननामैं तुम्हें अमृता-सामहसूस ...
घर वाला चेहरा - बाहर वाला चेहरा
घर से बाहर निकलने से पहले आईने में देखती हूँ बाहर वाला चेहरा - अपनी जगह पर है न? दुरुस्त करती हूँ , आँखें, मुँह, हाव-भाव सीधी करती हूँ पीठ, सामना करने के लिए बाहर वाले संसार का एक हल्की मुस्कराहट सहेजे, निकलती ...
एक दो - जितेन्द्र वेद
एक क्यों छीना जा रहा है प्यार और प्यास भीछीनने को आतुर वे जीवन की आस भी पंजों में फँसा लिया है, उन्होंने जहाँ कोकब्जा कर रोटी पर, छीन ली है साँस भी आदिवासी भी धकियाये जा रहे जंगल सेछिन गए हैं उनसे पेड़ और तुच्...
आलाप नैना रे
आलाप शृंगार रस सभी गाते हैंविरह किसी को नहीं भाता हैइस जहाँ में मैं ही एक पगली हूँजिसे दर्द में ही मजा आता है। लोग फूलों की बाते करते हैंहम सिर्फ कांटों पे चला करते हैंमिलन के गीत कैसे गाऊँजब बिछोह...
लौटती चेतना अमानुष
लौटती चेतना उड़ जाएगा पुतलियों से निषाद निराशा प्रभाव न छोड़ पाएगीबोझल हृदय की ये स्थिति भला कब तक ठहर पाएगी? पलकों को मूँद कल्पना सजा हाथों में सिमटा जादू जागायदि पल भी बीते आशा-छाँव में तो यथार्थ म...
शांत बहने दो अकेला मुसाफिर
शांत बहने दो मैं मुसाफिर हूँ अकेलाएक पथ पर चल रहा सुबह उठकर जिधर जाऊँकष्ट-दुख क्या-क्या न पाऊँपक्षियों की भाँति डेराकुछ ठिकाना है न मेराआज तेरे द्वार पर हूँउस द्वार पर भी कल रहा थामैं मुसाफिर...
चाहत बोलती तस्वीर
चाहत तू आना आधी रात को जब चांद चमकता होऔ रजनीगंधा रातरानी फूल महकता होजो सारा जग सोया हुआ औ आसमां भी सोयातू ऐसे में आना सनम अरमान तड़पता हो। यूं सुनसानी रातों में जुगनू चमचमा रहा हैमैं मर ना जाऊं हाय जब दिल जोर...
QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^