ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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बावरा मन
बावरा मन

चहकती चिड़िया संग
कभी लगे चहकने
दूर गगन में लंबी
और ऊँची उड़ान भरे
कभी तितली संग
फूलों पर लगे मँडराने
बावरा मन मेरा।

पूनम की रात में
पूर्णमासी चाँद के संग...

01-Dec-2017 10:04 PM 1
जीर्णोद्धार नुमाइश
जीर्णोद्धार नुमाइश

चन्दन-चन्दन संगमरमरी
देह पीताम्बर छूटे...

दरवाजे का नीम बिफरता
सखी सहेली सिसकें
तुलसी चौरा राह रोकता
बाबुल रोएँ छिप के
धीमी पड़ती सभी गुहारें
रिश्ते नाते छूट ...

01-Dec-2017 07:04 PM 1
एकाकीपन
 एकाकीपन

ख़ाली झोली रीते हाथ
पूछ रही हूँ ख़ुद से आज
क्या खोया क्या पाया है
जीवन आज कहाँ ले आया है।

सब कुछ होकर कुछ भी नहीं
अपने हैं पर पास नहीं
यादों की अब क्या बिसात
...

01-Dec-2017 06:57 PM 1
आओ टिवस्ट करें
आओ टिवस्ट करें

समझदारी से कोई लेना-देना नहीं
बहुत सहजता से इस नाटक में
गंदा करने का सिलसिला जारी
पागलपन को कब तक बर्दाश्त करता
दु:ख के बादल जल्द ही छटे
सड़कों पर मौसमों के साथ
बदलती ...

01-Dec-2017 06:52 PM 1
नदी
नदी

एक थी नदी
किनारे पर था मेरा घर
निहारता था उसका वेग
सुनता था उसकी कलकल
अब घर घिर गया है
नदी की कब्र पर बनी इमारतो से

एक थी नदी
हमें बाढ़ से महफूज़ रखने
...

01-Nov-2017 04:36 PM 143
अरण्यगान
अरण्यगान

तुम गाओ, मैं मुरली बजाऊँ
तुम्हारा गीत है सदाबहार
कल जब हम रहें न रहें
मेरी मुरली पर बजेगा तेरा ही गीत

क्या तुम रह पाओगे इस अरण्य में
मेरी तरह संसार के कोलाहल से दूर
...

01-Nov-2017 04:33 PM 124
यादों के पार
यादों के पार

एक सुवासित परिचित झोंका
आ कर मुझे निहाल कर गया
कस्तूरी सा उच्छवास वह
दग्ध हृदय को सिक्त कर गया।

इतने दिन मैं सब से छुप कर
यह संदूक भरा करती थी
अब बस शायद यही मेर ...

01-Oct-2017 03:21 PM 275
चूल्हा
चूल्हा

मैं चूल्हा हूँ
सदियों से जल रहा हूँ
झुलस रहा हूँ
लेकिन उफ़
मेरे शब्दकोश में नहीं है

सूरज भी मेरी बराबरी नहीं कर सकता
क्योंकि वह केवल दिन में जलता है
और ...

01-Oct-2017 03:18 PM 312
काश कि ऐसा हो!
काश कि ऐसा हो!

और हाँ, वो ख्वाब होगा मानीखेज
उस ख़ास समय का
जब सूर्य का ललछौं प्रदीप्त प्रकाश
होगा तुम्हे जगाने को आतुर
हलके ठन्डे समीर के
कारवां में बहते हुए
तुम्हारे काले घने केश र ...

01-Oct-2017 03:13 PM 264
बरसेंगे क्या फ़िर से अब
बरसेंगे क्या फ़िर से अब

लगता है छँट तो गए हैं
बादल आसमाँ से
कहीं कहीं!
जाने क्या पैदा हो
गंदम या ख़र पतवार
पर बरसे तो थे
वोह बादल बे हिसाब।

रज़ामन्दी तो थी
पूरी की पूरी & ...

01-Oct-2017 03:08 PM 282
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