ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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सच्चा स्वाभिमान
सच्चा स्वाभिमान

गरीबी, दरिंदगी, संत्रास को ओढ़े हुए
फ़टी हुई चादर को समेटे हुए
बीवी की लटें बिखरी हैं
क्योंकि आड़े में स्वाभिमान है
और उसका कुछ अलग ही नाम है

बड़े नादाँ हैं
पूर्णतया अन ...

01-Jun-2018 01:48 AM 79
कविता एक दो : ज्योत्स्ना शर्मा
कविता एक दो : ज्योत्स्ना शर्मा

एक

सृष्टि का आधार बेटियाँ
विधना का उपहार

नेह की निर्मल सी धारा
सींचतीं मन-उपवन सारा
इन्हीं से हरा-भरा जीवन-
स्वर्ग से भी लगता प्यारा

...

01-Jun-2018 01:43 AM 80
वो जो चल दिए असमंजस में हो सांझ ढल गई
वो जो चल दिए असमंजस में हो सांझ ढल गई

वो जो चल दिए

वो जो चल दिए
अपने सफर पर तनहा
मेरी लिए एक पल रुकना
न मिल सकी उन्हें पनहा

दीपक उजाले के खातिर
अंधेरों से भिडे
राह में साथी मि ...

01-Jun-2018 01:36 AM 139
एक दो : सुधा दीक्षित
एक दो : सुधा दीक्षित

एक
जब श्याम मेघ
क्षिति पर झुक कर
चातक की प्यास बुझाये
तब तुम चकोर बिरहन को
नभ में रह कर ना तरसाना
विधु बदली में छुप जाना।

जब रिमझिम वर्षा की फुहार
या ...

01-May-2018 07:34 PM 303
अनावरण आदतें
अनावरण आदतें

अनावरण
परत-दर-परत
मैं खोलती गई
तुम्हारा दिया उपहार!

पहले जिज्ञासा ने
उसे देर तक उकेरा
फिर संशय जागा
ऐसा क्या है इसमें?
जो इतने सारे आवरण हैं।

तब भ ...

01-May-2018 07:29 PM 358
प्रणय-ब्रह्माण्ड गर्भ की उतरन
प्रणय-ब्रह्माण्ड गर्भ की उतरन

प्रणय-ब्रह्माण्ड
प्रणय
देह का ब्रह्माण्ड है
साँसों की आँखें
स्पर्श करती हैं
प्रणय का
अंतरंग कोना
जहाँ
निनादित है -
अनहद नाद

देह ...

01-May-2018 07:02 PM 259
नई सोच
नई सोच

कभी उन्हें सीने से लगा कर
हम नींद में खो जाते
लफ़्ज़-लफ़्ज़ चुपचाप
सुनहरे ख्वाब बन जाते
सफ़ा पलटने का भी कुछ
ख़ास ही था मज़ा
पाक-पकवानों से अलग
वो स्वाद था चखा
...

01-Apr-2018 04:19 AM 406
रवि का सत्य
रवि का सत्य

पता है
मुझमें लालिमा क्यूँ है?
शायद
मैंने अमावस भेदकर
उनींदापन और आलस्य भगाकर
जग को ज्योतिर्मय
करने का बीड़ा उठाया है।

लेकिन कोई क्या जाने
मैं रोजाना
...

01-Mar-2018 03:54 PM 608
आजादी
आजादी

हर बार की तरह
अनदेखा आसमान देखने के लिए
लगाती हैं वे उम्मीदें फिर अपनों से
हाँ हाँ वे ही जो अपनी ही
भावनाओं की गुलाम हैं।

वे ही जो गुलामी और मुक्ति की
कशमकश में, ...

01-Mar-2018 03:49 PM 599
वर्णिकाओं, सुना
वर्णिकाओं, सुना

वर्णिकाओं, सुनो
तुम रात को बाहर ना निकलो
तुम घर से बाहर ना निकलो
तुम माँ के पेट से ना निकलो
तभी तुम हम से बचोगी।
हम हैं रावण
और राम तो
इस देश से विदा हो चुके हैं< ...

01-Feb-2018 10:35 AM 572
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