ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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प्रगति
प्रगति


शहर की चकाचौंध में कुछ खो-सा गया है
कि जेहन में गाँव का नक्शा रखा है
जहाँ दूर से ही दीख जाती हैं
छतों पर सूखती मिर्चें और बड़ियां
नीचे आँगन में सजती हैं
तुलसी और गुला ...

02-Jun-2017 03:38 AM 146
छोटी नदी की कहानी
छोटी नदी की कहानी

नदी के इस छोर पर एक मंदिर है - कमनसीब और मंदिर के भीतर एक मूर्ति है अपनी छिन्न-भिन्न अवस्था में बेसहारा-बेबस-लाचार।

मूर्ति (ईश्वर) की नाक और तर्जनी कटी हुई है, यह कैसा समय चक्र कि ईश्वर ...

02-Jun-2017 03:31 AM 164
द्वन्द्व
द्वन्द्व


महानगर की सड़कों पर चलते-चलते
ऊंचे कांक्रीट के चिनारों को निहारते
जब गर्दन में टीस होने लगती
इन ईंट-गारे के झुरमुटों के बीच
झाँकती उदयीमान सूर्य की स्वर्णिम रश्मियां
...

02-Jun-2017 03:24 AM 164
कुछ चीज जेब
कुछ चीज जेब

कुछ चीज

कुछ चीजें
एक छोटी-सी चूक
थोड़ी-सी भूल
ज़रा सी लापरवाही से
खराब हो जातीं हैं...
खो देतीं है
अपना रंग रूप
अपनी चमक
अपनी महक...
हो जातीं ...

01-Apr-2017 01:06 AM 302
कविता एक दो
कविता एक दो

एक

देख रहे है नींद का रास्ता एकटक
चौखट पर नज़रें टिका कर
वो दबे पाँव चली गयी
मुझसे नज़रें बचा कर
जब हम लगे खोजने
नींद को इधर-उधर
वो बैठी थी आपके नयनों में छुप ...

01-Apr-2017 01:04 AM 314
आदमी होना नन्ही-सी चिड़िया
आदमी होना नन्ही-सी चिड़िया

आदमी होना

मैं पेड़ों की तरफ
पीठ करके चिल्लाऊंगा
ठीक तुम्हारे सामने
और पीछे खड़े पेड़ हिनहिनाएंगे
घोड़े की तरह जान जाएंगे
कि कभी पेड़ ही था मैं भी
मगर मुझे नहीं ...

01-Apr-2017 12:58 AM 281
प्रवासी का दुःख गृहिणी की शिकायत
प्रवासी का दुःख   गृहिणी की शिकायत

प्रवासी का दुःख

बहुत दिनों तक मौन रही
अब देती हूँ आवाज़
क्या है एक प्रवासी का दुःख
बतलाती हूँ आज

जब से जन्मी, घर में आई
चौक बुहारा, मेज़ सज ...

01-Apr-2017 12:47 AM 924
पचमढ़ी : एक शब्द चित्र
पचमढ़ी : एक शब्द चित्र

विन्ध्य की अंतिम हद को छूकर बहती,
पवित्र नर्मदा की अथाह जलराशि के पार,
सतपुड़ा की सुरम्य पहाड़ियों पर,
प्रकृति की अलौकिक छटाओं के बीच बसी-
सलोनी पचमढ़ी!

घुमावदार पहाड़ी र ...

01-Mar-2017 11:56 PM 822
हिंदी भाषा अपनी बोली
हिंदी भाषा  अपनी बोली

हिंदी भाषा

गूँजे हिंदी भाषा मन में
मुरली बजे ज्यों वृंदावन में

हिंदी भाषा के मतवाले
इसको तन-मन से सुनते हैं
इसके सारे भक्त निराले
इसके सपने ही बुनते ह ...

01-Mar-2017 11:53 PM 787
रिश्ते
रिश्ते

रिश्तों की रंग-बिरंगी कतरनें
रखी हैं संजो कर मैंने।
ये रिश्ते आम हैं, कोई खास नहीं
इनके बनाने-बिगड़ने पर मेरा जोर नहीं।

इन नज़ाकत रिश्तों की
हिफ़ाज़त करो, तो सब है
...

01-Mar-2017 11:49 PM 798
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