ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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संकल्प जुर्रत
संकल्प पिता वो वृक्ष है जो कड़ी धूप सहकरघनी छाँव देता है पिता वो तरु है जो रात-दिनसींचता है प्रेम-जल से अपनी शाखाएँ पिता वो दरख़्त है जो कठिनाइयों के आँधी-तूफ़ान झेलता है औरअपनों पर आँच नहीं आन...
कलयुग गड़ासे सा तना है समय मेरी गर्दन पर
कलयुग यह उस युग की बात हैजब भाषा सेसौम्यता, उदारता और विनम्रता जैसे शब्दों का लोप हो गया था सहनशीलता और सहिष्णुता - बस राजनैतिक अनुष्ठानों में बाकी थे हर आदमी के हाथ मेंएक पुरातन लोकना...
माछेर झोल
माछेर झोल जब ओडिशा मेंचलें ठंडी हवाएंतट को छूने वालीतब तुम आना मुझे यादबंगाल में मैं चख लूँगातुम्हारे हाथ की बनीमाछेर झोलजब उदास होनासाहिर को सुननामैं तुम्हें अमृता-सामहसूस ...
घर वाला चेहरा - बाहर वाला चेहरा
घर से बाहर निकलने से पहले आईने में देखती हूँ बाहर वाला चेहरा - अपनी जगह पर है न? दुरुस्त करती हूँ , आँखें, मुँह, हाव-भाव सीधी करती हूँ पीठ, सामना करने के लिए बाहर वाले संसार का एक हल्की मुस्कराहट सहेजे, निकलती ...
एक दो - जितेन्द्र वेद
एक क्यों छीना जा रहा है प्यार और प्यास भीछीनने को आतुर वे जीवन की आस भी पंजों में फँसा लिया है, उन्होंने जहाँ कोकब्जा कर रोटी पर, छीन ली है साँस भी आदिवासी भी धकियाये जा रहे जंगल सेछिन गए हैं उनसे पेड़ और तुच्...
आलाप नैना रे
आलाप शृंगार रस सभी गाते हैंविरह किसी को नहीं भाता हैइस जहाँ में मैं ही एक पगली हूँजिसे दर्द में ही मजा आता है। लोग फूलों की बाते करते हैंहम सिर्फ कांटों पे चला करते हैंमिलन के गीत कैसे गाऊँजब बिछोह...
लौटती चेतना अमानुष
लौटती चेतना उड़ जाएगा पुतलियों से निषाद निराशा प्रभाव न छोड़ पाएगीबोझल हृदय की ये स्थिति भला कब तक ठहर पाएगी? पलकों को मूँद कल्पना सजा हाथों में सिमटा जादू जागायदि पल भी बीते आशा-छाँव में तो यथार्थ म...
शांत बहने दो अकेला मुसाफिर
शांत बहने दो मैं मुसाफिर हूँ अकेलाएक पथ पर चल रहा सुबह उठकर जिधर जाऊँकष्ट-दुख क्या-क्या न पाऊँपक्षियों की भाँति डेराकुछ ठिकाना है न मेराआज तेरे द्वार पर हूँउस द्वार पर भी कल रहा थामैं मुसाफिर...
चाहत बोलती तस्वीर
चाहत तू आना आधी रात को जब चांद चमकता होऔ रजनीगंधा रातरानी फूल महकता होजो सारा जग सोया हुआ औ आसमां भी सोयातू ऐसे में आना सनम अरमान तड़पता हो। यूं सुनसानी रातों में जुगनू चमचमा रहा हैमैं मर ना जाऊं हाय जब दिल जोर...
सम्भाल पैबंद
सम्भाल ठेले पर बिकते छोटे बड़े झुमके खरीदने का बहुत शौक था मुझेवैसे ही जैसेकिराने की दुकान पर मिलने वाले लोगों से बतियाने का विदेश में ना तो ठेले लगते हैना ही किराने की दुकानें मिलती हैं पुरानी झुम...
दोस्ती के क्षण
दोस्ती में कुछ है जो क्षणभंगुर है जिस तरह से यह शुरू होती हैजैसे क्षण वह लाती है जिस अंतरिक्ष में वह होती हैऐसा लगता है कि दोस्ती हमेशा चल रही है हमेशा बदल रही है या जैसे-तैसे दौड़ रही है लेकिन दोस्ती कभी प...
अट्ठानवे प्रतिशत
आज मुझे अट्ठानवे प्रतिशत मिले और यह अच्छा महसूस करवाता है ऐसा महसूस होता है जैसे कुछगर्व करने लायक है यह मुझे मान्यता देता है। काश मैं बता सकतीकि मैंने यही उम्मीद किया थालेकिन मैं नहीं कह सकतीकाश मै...
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