ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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चिड़ियाँ
चिड़ियाँ

पौ फटते मुंडेर पर बैठीं चहक जगातीं नींद से चिड़ियाँ
भोली भाली छल कपट से दूर मासूम मतवाली चिड़ियाँ
कहाँ उड़ गईं कौन से देस पधारीं सुंदर चितचोर चिड़ियाँ
सूना सूना घर का आँगन बिना चहकती नन् ...

01-Aug-2017 11:45 PM 338
दूर देश में
दूर देश में

दूर देश रह कर भी हम
हर रोज मनाते हैं स्वदेश।
नन्हीं-नन्हीं बातों में
ढूँढा करते अपना देश।

लहजा बदल गया है पर
बदली नही तहज़ीब
पुश्तें बदल गई हैं फिर भी
हम ब ...

01-Aug-2017 11:40 PM 345
शहर में ये कौन आया?
शहर में ये कौन आया?

टूटे अरमानों के तेज भँवर में ये कौन आया,
पुरानी यादों के फूटे खँडहर में ये कौन आया?
जमाना तो क्या, हम थे खुद को भूल बैठे,
पता पूछता हमारा शहर में ये कौन आया?

होके जार-जार ...

01-Aug-2017 11:35 PM 344
चूहा दौड़ प्रतिक्रिया नियन्त्रण
चूहा दौड़  प्रतिक्रिया नियन्त्रण

चूहा दौड़

आधुनिकीकरण वरदान
या मुसीबतों की खान?
वहशी हैं सिंह
या आधुनिक भगवान?
हो जाता है इलाज
साँप के काटे का
पर अर्थशास्त्री हों या अधिवक्ता
है को ...

01-Aug-2017 11:31 PM 330
महिलाओं के खिलाफ हिंसा का उन्मूलन
महिलाओं के खिलाफ हिंसा का उन्मूलन

महिलाओं के खिलाफ हिंसा हमारे समाज की सबसे अहम समस्याओं में से एक है। संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार महिलाओं के खिलाफ हिंसा - यह महिलाओं के खिलाफ लिंग के आधार पर किया शारीरिक, यौन, मनोवैज्ञानि ...

08-Jul-2017 08:24 PM 418
ख्याल रूह
ख्याल रूह

ख्याल


होता है हर शख्स को
ख्यालों से अपने प्यार
लगता है उसको उम्दा
सिर्फ अपना ही बस ख्याल
है ये इंसानी फितरत
जिसे करता है वह बार-बार।

ख्याल कितन ...

08-Jul-2017 08:19 PM 427
प्रगति
प्रगति


शहर की चकाचौंध में कुछ खो-सा गया है
कि जेहन में गाँव का नक्शा रखा है
जहाँ दूर से ही दीख जाती हैं
छतों पर सूखती मिर्चें और बड़ियां
नीचे आँगन में सजती हैं
तुलसी और गुला ...

02-Jun-2017 03:38 AM 650
छोटी नदी की कहानी
छोटी नदी की कहानी

नदी के इस छोर पर एक मंदिर है - कमनसीब और मंदिर के भीतर एक मूर्ति है अपनी छिन्न-भिन्न अवस्था में बेसहारा-बेबस-लाचार।

मूर्ति (ईश्वर) की नाक और तर्जनी कटी हुई है, यह कैसा समय चक्र कि ईश्वर ...

02-Jun-2017 03:31 AM 845
द्वन्द्व
द्वन्द्व


महानगर की सड़कों पर चलते-चलते
ऊंचे कांक्रीट के चिनारों को निहारते
जब गर्दन में टीस होने लगती
इन ईंट-गारे के झुरमुटों के बीच
झाँकती उदयीमान सूर्य की स्वर्णिम रश्मियां
...

02-Jun-2017 03:24 AM 659
कुछ चीज जेब
कुछ चीज जेब

कुछ चीज

कुछ चीजें
एक छोटी-सी चूक
थोड़ी-सी भूल
ज़रा सी लापरवाही से
खराब हो जातीं हैं...
खो देतीं है
अपना रंग रूप
अपनी चमक
अपनी महक...
हो जातीं ...

01-Apr-2017 01:06 AM 779
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