ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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सिस्टर रोजी
बन्द कमरे से अनिता की चीखें स्पष्ट सुनाई दे रही थीं, साथ ही सिस्टर रोजी का डपटता हुआ कर्कश स्वर मेरे सीने पर हथोड़े मार रहा था। बार-बार जी चाहता था, दरवाजा तोड़ कर अन्दर घुस जाऊं, पर साथ खड़ी मीनाक्षी ने मुझे रोक रखा था। अचानक दरवाजा खोल मुझ पर आग्ने...
अभिशप्त
निर्जन सिंहा, तूूं की कमाया, एवें जान खपायी, लोकांन मक्सीकियां व्याइयां, गोरियां बसाइयां, पुतकुड़ियां जने-व्याहे। तूं कलमकल्ला (अकेला) खाली-दा-खाली। भाई-भतीजे ही आरे लांदा रया।फिर आप-से-आप एक लंबी उसांस भर वह कुर्सी से उठ खिड़की के पास खड़ा हो ...
एक और सच
सामने औंधे मुँह पड़ी वह औरत बस हड्डियों का ढाँचा मात्र थी जो जरा भी हिलाने-डुलाने क्या, छूने तक से टूट सकती थी। सूखे फूल-सी झर सकती थी। मुझे यह सब तभी समझ लेना चाहिए था जब सुबह-सुबह, सात बजे, बारबरा का फोन आया था- "हमारी मदद करो। यहाँ क्राइसिस सेंट...
कागज़ के टुकड़े
आज अंजना सफाई करने के मूड में थी। इतने कागज़ जाने कैसे इकट्ठे हो जाते हैं। इनमें से ढेरों तो ऐसे थे, जिन्हें वर्षों से, कभी देखने की, कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ी। यहाँ तक कि वह यह भी भूल गई थी कि यह सब उसने संभाल के रखे हैं। ज़्यादातर तो किसी अवसर विशे...
परजीवी
यूँ तो खबर कोई अनपेक्षित भी नहीं थी। शंका मन मस्तिष्क में हर पल छाई ही रहती थी लेकिन कल रात जब बाबा का फोन आया कि माँ को हृदयघात के पश्चात शरीर के बाएँ भाग में लकवा हो गया है तब मानो पूरा पेरिस ठहर गया था। अगले हफ्ते की कन्फर्म टिकिट होने पर...
स्वतन्त्र वातावरण में घुटन
नीता तेज कदमों से चलकर पार्क में पहुँची। उसे डर था कि कहीं सुजाता उसकी प्रतीक्षा करके चली न जाये। रात उसने मुझे फोन करके जरूर ही आने को कहा था, शायद अपने मन की कोई बात मुझसे करना चाहती थी। तुषार आज जल्दी उठ गये और उन्होंने मुझे चाय के लिए रोक लिया...
गुरु दर्शन
गाड़ी तैयार है सर..., रामसिंह की आवाज़ थरथरा रही थी। यह गैरज़रूरी घोषणा रामसिंह ने आदत की मजबूरी से की। उसे पता था मुझे पता है। क्योंकि सारी गाड़ी की तैयारी मैंने अपनी आँखों से देखी थी : एक ए.के.-47 मशीनगन ड्राइवर की सीट के नीचे और एक छोटी पिस्तौल मेर...
मुझसे कह कर तो जाते
जीवन में ऐसे क्षण कभी-कभी ही आते हैं जब ऐसी तृप्ति महसूस होती है, बड़ी तृप्ति। छोटी-छोटी तृप्तियों की तो गिनती करना भी संभव नहीं हो पाता जो रोज़ ही महसूस होती हैं। जैसे बढ़िया चाय पीने के बाद के हाव-भाव हों या फिर गुलाबजामुन के मुँह में जाने के बाद श...
बस यह शादी किसी तरह से गुज़र जाए
तो यह बेटी की शादी करने वाली माँ का हाल है। शादी जल्द ही होने वाली है। लेकिन क्या भारतीय माँ का भी यह हाल है? मैंने अधिकांश जीवन भारत में गुज़ारा, फिर भी चेक माँ हूँ, क्या करूँ।वह किसका ख़याल था, लड़की को पढ़ाई के लिए प्राग भेजना? उसका अपना? मेर...
दहशत
शिप्रा! मैं मौसी से मिलने अस्पताल जा रही हूँ।" "ठीक है" ".........। और सुनो, रमेश नाना आएँ तो उन्हें यह पैकेट दे देना।""हाँ, ठीक।""अरे! एक बार आकर देख तो लो, मैं किस पैकेट की बात कर रही हूँ...। गेम खेलने बैठी है तो इसे ...
उज्जवला अब खुश थी!
देखा आपने रात में कैसी रासलीला चल रही थी मोहल्ले में? पानी सर से ऊपर होता जा रहा है अब तो। वो तो अच्छा है दीदी कि हमारे बच्चे अभी बहुत छोटे हैं। वर्ना इन कमीनों की हरकतें देख सुन क्या असर पड़ता उन पर राम ही जाने... चौहान काकी ने भदौरिया ताई को ताज़े...
विसर्जन से पहले
मेरे सामने मेरे पति की अस्थियाँ रखी हैं। मैंने उसे मिट्टी के एक सुंदर लोटेनुमा कलश में रक्खा है। कलश ढूंढ़ने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किए थे। भला हो मेरी कलाकार मूर्तिकार मित्र अनीता का जिसने मुझे कलश दिया। विदेश में और वह भी स्वीडेन में बहुत मुश...
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