ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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विसर्जन से पहले
विसर्जन से पहले

मेरे सामने मेरे पति की अस्थियाँ रखी हैं। मैंने उसे मिट्टी के एक सुंदर लोटेनुमा कलश में रक्खा है। कलश ढूंढ़ने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किए थे। भला हो मेरी कलाकार मूर्तिकार मित्र अनीता का जिसने मुझे ...

01-Apr-2018 04:07 AM 174
आकार
आकार

आज अल्पना बहुत खुश थी। उसकी छोटी-सी बेटी आदिका आज स्कूल से निकल कॉलेज में प्रवेश करने वाली थी। वह छोटी फुदकती चिरैया-सी कब उसकी हथेलियों से निकलकर खुले आसमान में कोमल पंख पसारे उड़ने लगी, उसे पता ही ...

01-Mar-2018 03:45 PM 414
साँकल
साँकल

क्या उसने अपने गिरने की कोई सीमा तय नहीं कर रखी? सीमा के आँसुओं ने भी बहने की सीमा तोड़ दी है... इन्कार कर दिया रुकने से... आँसू बेतहाशा बहे जा रहे हैं।
वह चाह रही है कि समीर कमरे में आए और एक ...

01-Jan-2018 03:21 PM 612
अवैध नगरी
अवैध नगरी

अचानक उसकी दृष्टि स्थिर हो गई। जिस ट्यूब को वह देख रहा था, उसमें उसकी चेतना मूर्त होकर पत्थर हो गई थी। कहीं कुछ दरक गया था। संशयों और अविश्वास के बीच उस की अंगुलियां ठिठक गई थी और मानसिकता कुंद हो ...

01-Dec-2017 01:19 PM 615
मैं बुरा नहीं हूँ
मैं बुरा नहीं हूँ

कल मेरी पत्नी का जन्मदिन था। संयोगवश मैं कार्यालय के काम से बैंकॉक गया था। मैंने उसे रात को इमेल से जन्मदिन की बधाई भेजी। सुबह इमेल खोलता हूँ तो देखता हूँ उसने सिर्फ थैंक्स लिखा था। स्क्रीन पर इधर- ...

01-Dec-2017 01:16 PM 647
सपने और सौदागर
सपने और सौदागर

मॉस्को से वापिस लौटते वक्त इस बार कबीर बहुत उदास था। बहुत कुछ बदल गया। नादिया अभी- अभी उसको एयरपोर्ट के अंदर तक छोड़ कर गई थी। जाते वक्त उसने कबीर को कस कर बाहों में लिया और मुँह चूमा। बिछुड़ते समय उ ...

01-Nov-2017 04:12 PM 811
दूसरी शादी
दूसरी शादी

मॉम क्या आप दूसरी शादी करोगी? दूसरी शादी के बारे में पूछने के बहाने सिद्धार्थ दरअसल कई बातें नंदिता को कह रहा था। जैसे कि, ...भले ही पापा दुनिया से चले गये हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि जिंदगी खत्म ...

01-Oct-2017 01:46 PM 1022
सुनो तुम्हारी भी कहानी है
सुनो तुम्हारी भी कहानी है

तुम्हें तो पत्नी, पत्नी की सहेली या कामवाली बाई में कोई फर्क ही नजर नहीं आता था, तुम्हें तो बस एक नयापन चाहिये। कौन-कौन से फार्मूलों की बात किया करते थे तुम, जैसे बहुत ब ...

01-Apr-2017 12:43 AM 1877
नागोबा डुलाय लागला...
नागोबा डुलाय लागला...

बिल्कुल वही है। खाल के ऊपर रेंगता है। वही है। मैं भी तो वही हूँ। बैठा भी वहीं हूँ आज तक। तुम जबसे गयीं, निपट अकेला हूँ। वही शनिवार, वही तीसरा पहर, वही अड्डा, वही बेंच। वही आवाज़ें : तिकीट, तिकीट, ति ...

01-Mar-2017 11:36 PM 1879
वह तैयार है
वह तैयार है

ईवान का चेहरा पीला पड़ा हुआ था। हाथों में थरथाराने की कंपन थी। उसने अपनी फाइलों और नोटबुक से अँटी मेज़ का कोना पकड़ लिया। कुछ पल वह ऐसे ही खड़ी रही। पीछे से उसे नैंसी का स्वर सुनाई दिया, "क्या हुआ ईवान ...

01-Feb-2017 12:37 AM 1965
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