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कारोबार में सिंगापुर तो है सदाबहार
01-Jan-2016 12:00 AM 1113     

विविधता और बहुसांस्कृतिक सुन्दरता सिंगापुर को अपने व्यापार-स्थल के रूप में चुनने के कई कारणों में से एक है। यहाँ के व्यापारिक माहौल और निम्न कर दर की वजह से लोग अपने कारोबार का फैलाव करते यहीं जम जाते हैं। कई भारतीय मूल के व्यापारियों ने न सिर्फ यहाँ की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दिया है बल्कि भारतीय ताज को भी ऊँचा किया है। हाल के दिनों में सिंगापुर में भारतीय विदेशी प्रत्यक्ष निवेश भी काफी बढ़ा है। सिंगापुर अब भारतीय निवेश के लिए शीर्ष स्थलों में से एक है। भारतीय कंपनियाँ बड़ी संख्या में सिंगापुर में पंजीकृत हैं। पिछले कुछ दशकों में भारतीय बाज़ार की मौजूदगी की वजह से सिंगापुर की कंपनियों का भी भारतीय बाज़ार के साथ एक अपनेपन का रिश्ता बना है। आज भारतीय कंपनियां बेहतरीन सेवा देने की स्थिति में हैं। दोनों ही तरफ से बड़ी संख्या में कंपनियों की बढ़ती हुई भागीदारी और दोनों देशों के बाज़ारों में विदेशी कंपनियों की मौजूदगी से और भी रोमांचक भागीदारी की उम्मीद की जा सकती है। सरकारी स्तर पर कुछ समय पहले ही सिंगापुर के सहयोग से शुरू होने वाली दो परियोजनाओं की आधार-शिला रखी गई; पहली है, आंध्र प्रदेश की नयी राजधानी- अमरावती। सिंगापुर इस नये शहर के मास्टर प्लान के निर्माण में जुड़ा है। दूसरा, मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर चौथे कंटेनर टर्मिनल की आधारशिला जो पीएसए सिंगापुर की साझेदारी से बनाया जा रहा है। साथ ही चांगी हवाई अड्डे के सहयोग से दो भारतीय हवाई अड्डों को संचालित करने का अवसर तलाशा जा रहा है। अब अगर बात की जाए ऐसे लोगों की जिन्होंने भारत से आकर सिंगापुर को न सिर्फ अपना घर बनाया बल्कि अपने कारोबार के फैलाव से सिंगापुर की आर्थिक सुदृढ़ता को और बल दिया तो आज राजकुमार और अशोक हीरानन्दानी का नाम लिए बिना नहीं आगे बढ़ा जा सकता है। ये सिंगापुर के रियल स्टेट के दो ऐसे खिलाड़ी हैं जो सिंगापुर के भारतीयों को फोब्र्स की सूची में पहुचाएं खड़े हैं। रॉयल ग्रुप जो अब दोनों भाइयों ने अपने हिसाब से अलग करा लिया है, यहाँ के शीर्षस्थ व्यापार में से एक है। संपत्ति के हिसाब से राजकुमार को फोब्र्स ने 10वाँ स्थान दिया है तो अशोक हीरानंदानी को 17वाँ स्थान हासिल है। अशोक हीरानंदानी जो होटल और व्यापारिक संपत्ति के माहिर विशेषज्ञ हैं अपने नए होटल और व्यापार से अपनी संपत्ति को दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ाते चल रहे हैं। अब उनका बेटा बॉबी भी पूरी तरह से इस व्यापार को बढ़ाने में लगा है। पिछला प्रोजेक्ट तो पूरी तरह से उसी के विज़न का फल है। राजकुमार व अशोक के पिता भारत से जो सपना लेकर आए थे उसको पूरी तरह से दोनों बच्चों ने पूरा किया है। पिता का कपड़ों का व्यवसाय उनकी असामयिक मृत्यु के कारण बिखरा नहीं बल्कि राजकुमार व अशोक हीरानंदानी को 17 वर्ष की उम्र में ही व्यापार संभालने का गुण सिखा गया। कहा जाता है कि परिस्थितियाँ इंसान को काबिल बना देती हैं। आज कपड़ों के व्यावसायी के दोनों पुत्र सिंगापुर के 20 सबसे अमीर लोगों की श्रेणी में खड़े हैं जो भारतीय मूल के लोगों के लिए गर्व की बात है। फोब्र्स पत्रिका ने इस साल 39वें स्थान पर जिसका नाम प्रकाशित किया है वह भी भारतीय मूल के हैं। भूपेन्द्र कुमार मोदी टेलीकोम उद्योग, स्वास्थ्य, मनोरंजन व मसाले के क्षेत्र से जुड़े हैं। इसी तरह कभी जो एक छोटी-सी दुकान थी, आज सिंगापुर के सबसे बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर के रूप में अपनी पहचान बनाए खड़ी है। मोहम्मद मुस्तफा एंड समसुद्दीन नामक इस दुकान में नमक से लेकर हीरे-जवाहरात तक सब कुछ मिल जाता है। इसे तो भारतीयों का मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, गिरिजाघर सब कुछ कह सकते हैं क्योंकि राशन की सारी ठेठ चीजें यहीं मिलती हैं। इन्होंने कितने भारतीयों को भारत से लाकर यहाँ काम दिया व बसने का मौका दिया। परसराम ब्रादर्स नामक मसाला व्यापारी भी भारत के वो सितारा हैं जो सिंगापुर में भारत को रोशन कर रहे हैं। इस तरह न जाने कितने और नाम हैं जो भारत और भारतीयों को विदेश में भी अच्छी पहचान दिला रहे हैं। भले ही ये सभी सिंगापुर के नागरिक हों पर मूल भारतीय होने के कारण भारत से कहीं न कहीं लगाव तो है ही।

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