ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
जन्नत की हकीकत Next
दौड़ की दिशा
दौड़ की दिशा

यह एक शाश्वत और सही मान्यता है कि गति कम है लेकिन दिशा सही है तो वांच्छित लक्ष्य की प्राप्ति थोड़ा विलंब से ही सही निश्चित है। इसका उदाहरण है वास्को-द-गामा द्वारा अफ्रीका का चक्कर लगाते हुए योरप से ...

01-Dec-2017 01:30 PM 5
बंदूक की संस्कृति
बंदूक की संस्कृति

वैसे तो जब संस्कृति के नाम पर "बंदूक-संस्कृति" शब्द तक को स्वीकृति मिल गई तो फिर शेष रह ही क्या गया? ऐसे में प्रदर्शन, आत्मप्रशंसा, झूठ, बड़बोलापन, लम्पटता, धोखा, जुमलेबाजी तो बहुत छोटी बातें हैं। ऐ ...

01-Nov-2017 03:55 PM 101
कैसी सेवा - कैसा स्वास्थ्य
कैसी सेवा - कैसा स्वास्थ्य

जिन लोगों का स्वास्थ्य बीमा नहीं है और जो गरीब भी हैं उनकी
बड़ी दुर्गति है। जिनके पास स्वास्थ्य बीमा है उन्हें भी इलाज़ के कुल
खर्च का बीस प्रतिशत देना होता है, शेष बीमा कंपनी देती है।
...

01-Oct-2017 01:12 PM 244
लोक स्वयंभू होता है
लोक स्वयंभू होता है

बाग़, बगीचे एक योजनाबद्ध तरीके से, किसी उद्देश्य विशेष के लिए लगाए जाते हैं। उनकी सार-सँभाल और विशेष व्यवस्था करनी होती है। वे किसी कारणवश नष्ट भी हो सकते हैं लेकिन जंगल उगाए या लगाए नहीं जाते। वे स ...

08-Jul-2017 08:06 PM 506
मुक्ति के पिंजरे
मुक्ति के पिंजरे

शिक्षा, चिकित्सा और न्याय ये तीन क्षेत्र ऐसे हैं जिनसे और जहाँ से समाज के स्वरूप, निर्माण और विकास की दिशाएँ तय होती हैं। ये किसी के पद, धन, वंश, नस्ल आदि के आधार पर नहीं बल्कि आवश्यकता और पात्रता ...

01-Apr-2017 12:28 AM 755
लोक मतलब सामूहिकता और समानता
लोक मतलब सामूहिकता और समानता

सन् दो हजार में पहली बार अमरीका जाना हुआ। अमरीकी राज्य ज्योर्जिया की राजधानी अटलांटा की धरती पर पाँव रखते ही एक रोमांच-सा हुआ। 1965 में अमरीका में गोरे अमरीकियों के गुलाम रह चुके अफ़्रीकी मूल की नीग ...

01-Mar-2017 08:34 PM 1029
देखणा सो भूलणा नहीं
देखणा सो भूलणा नहीं

जीव का मूल स्वभाव है जिज्ञासा। यह उसकी मूलभूत जैविक आवश्यकताओं के कारण भी हो सकती है और मानसिक व वैचारिक ज़रूरतों के तहत भी। यह जिज्ञासा ही जीव को घुमाती है, सिखाती है और भटकाती भी है। परिस्थितिवश य ...

01-Feb-2017 12:30 AM 1148
अतियों के बीच झूलता अमरीकी समाज
अतियों के बीच झूलता अमरीकी समाज

मूल रूप से अमरीकी समाज सनक की सीमा तक पहुंचा हुआ समाज है जिसकी अपनी कुंठाओं से मुक्ति नहीं हुई है। वैसे तो हर समाज की अपनी कुंठाएँ होती हैं और उसे उनसे मुक्त होते हुए अपने अस्त्तित्व पर खतरा लगता ह ...

01-Dec-2016 12:00 AM 1825
प्रवास के मंतव्य और मानसिकता
प्रवास के मंतव्य और मानसिकता

आदिमकाल में मनुष्य का कोई निश्चित स्थान नहीं था और राष्ट्र जैसी अवधारणा तो कतई नहीं थी। भोजन के लिए पशुओं का पीछा करता या पशुपालन युग में अपने पशुओं के लिए चरागाहों और पानी की तलाश में मनुष्य जाने ...

01-Nov-2016 12:00 AM 2650
भय का व्यवसाय
भय का व्यवसाय

दवा कंपनियों से मिलकर डॉक्टर तरह-तरह की बीमारियों से डराते रहते हैं। स्वाइन फ्लू का डर भी इसी योजना का एक भाग था। अमरीका में भी स्वाइन फ्लू से ज्यादा लोग साधारण फ्लू से हर वर्ष मरते हैं। भारत में भ ...

01-Oct-2016 12:00 AM 2983
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