ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
जाकोमो दा लेनतीनी की दो सॉनेट कविताओं का इतालवी से हिन्दी अनुवाद
CATEGORY : अनुवाद 01-Mar-2017 08:15 PM 595
जाकोमो दा लेनतीनी की दो सॉनेट कविताओं का इतालवी से हिन्दी अनुवाद

कविता की सॉनेट शैली का लेखन सबसे पहले दक्षिण इटली के सिसली द्वीप में तेरहवीं शताब्दी में हुआ। इसके सबसे पहले प्रयोग का श्रेय पूर्वी सिसली के लेनतीनी शहर में सन् 1210 में जन्में इतालवी कवि जाकोमो दा लेनतीनी (क्रत्ठ्ठड़दृथ्र्दृ ड्डठ्ठ ख्र्ड्ढदद्यत्दत्) को दिया जाता है। उन्हें जाकोमो नोतारो (क्रत्ठ्ठड़दृथ्र्दृ ग़्दृद्यठ्ठद्धदृ) के नाम से भी जाना जाता है। उस समय सिसली पर जर्मन मूल के स्वेवो वँश के राजा फेदेरीको द्वितीय का शासन था, जिनके राजदरबार में जाकोमो दा लेनतीनी नोटरी तथा लेखक का कार्य करते थे और साथ ही साहित्य में उन्हें दिलचस्पी थी। उन्होंने कई साहित्यिक स्पर्धाओं में भाग लिया, जिसके लिए उन्होंने सॉनेट शैली में प्रेम के विषय पर कविताएँ लिखीं। कहते हैं कि इस शैली की प्रेरणा उन्हें सिसली द्वीप के लोकगीतों से मिली थी। उनका बहुत-सा लेखन खो चुका है। आज उनकी लिखी केवल 22 सॉनेट को जाना जाता है। सॉनेट शैली की कविताओं को प्रारम्भ में आठ पँक्तियों में लिखा गया जो कि चार-चार पँक्तियों के दो हिस्सों में बँटीं थीं। उनके बाद में धीरे-धीरे जब सॉनेट शैली की कविताओं का अधिक प्रचार हुआ तो सॉनेट लिखने की शैली में कई बदलाव आये। चौदह पँक्तियों के सॉनेट, जिनमें दो हिस्से चार-चार पँक्तियों के होते हैं और दो हिस्से तीन-तीन पँक्तियों के, सबसे अधिक प्रसिद्ध व लोकप्रिय हुए। सॉनेट की पँक्तियों का नियम है उसकी हर पँक्ति में दसवें स्वर पर जोर पड़ना चाहिये। सॉनेट कविताओं के शब्दों के छँद तथा लय के नियमों के कई स्वरूप हैं जैसे कि - क ख क ख, क ख क ख, क ग घ, क ग घ। इतालवी सॉनेट को प्रसिद्धि मिली फ्राँचेस्को पेतरार्का (क़द्धठ्ठदड़ड्ढद्मड़दृ घ्ड्ढद्यद्धठ्ठद्धड़ठ्ठ) की कविताओं से। पेतरार्का का जन्म उत्तरी इटली के अरेत्जो शहर में सन् 1304 में हुआ। वह लेखक, कवि तथा दर्शनशास्त्री थे। उनका अधिकतर लेखन लेटिन भाषा में लिखे उनके आलेख थे लेकिन उनको प्रसिद्धि मिली सामान्य इतालवी भाषा में लिखी सोनेट शैली की कविताओं से जिनमें सबसे महत्वपूर्ण था उनका एक कविता संग्रह कान्सोनिएरे (क्ठ्ठदन्न्दृदत्ड्ढद्धड्ढ) यानि गीत संग्रह। अंग्रेज़ी साहित्यकार विलियम शेक्सपीयर (ज़्त्थ्थ्त्ठ्ठथ्र् च्ण्ठ्ठद्रड्ढद्मद्रड्ढठ्ठद्ध) ने पेत्रारका की कविताओं से प्रेरणा पाकर सोनेट शैली को विकसित किया और दुनिया भर में प्रसिद्ध भी।

Amor 1 un desio che ven da core

इश्क वह आरज़ू है जो दिल से आती है
और बहुत आनन्द देती है
इश्क निगाहों के मिलन से जन्मता है
पर पनपना दिल से ही मिलता है।

कभी इश्क हो जाता है
आशिक को देखे बिना
पर दिल को बाँध लेने वाला इश्क
तो वही जो आशिक की निगाहों से बँधे।

आँखें ही तो दिल की बात करती हैं
वही देखती हैं अच्छा, बुरा
और आशिक की नैसर्गिक खूबसूरती।

तब दिल सब कुछ समेट लेता है
फितरत करता है, आरज़ू से संतुष्ट
वही इश्क सबसे ऊँचा होता है।



chi non avesse mai veduto foco

जिसने कभी आग न देखी हो
समझ नहीं सकता कि जला भी सकती है
सोचे कि इसमें कितनी रोशनी और मस्ती है
जब एक दिन अचानक उसे अपने सामने पाये।

केवल उसे छू कर ही समझ पायेगा
कि आग से जलना क्या होता है
मुझे भी इश्क ने छुआ है ज़रा
बहुत जलता है - खुदा, और भी फ़ैले यह जलन।

आप में यह फ़ैले यह जलन, मोहतरिमा
गलतफहमी करा दी थी कि आनन्द मिलेगा मुझको
पर दिया केवल दर्द और तड़प।

बहुत ज़ालिम है यह इश्क
आप को कुछ नहीं करता जो मुझपे हँसतीं हैं
और मुझे चैन नहीं लेने देता।

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