ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
इंग्लैंड की बरसातें
01-Jul-2016 12:00 AM 2720     

यह चुटकुला इंग्लैंड में बेहद प्रसिद्ध है कि "इंग्लैंड में बारि¶ा साल में सिर्फ दो बार होती है- जुलाई से मार्च तक और अप्रैल से जून तक।'
और यह ही क्यों इंग्लैंड में अधिकाँ¶ा चुटकुले मौसम और बारि¶ा को लेकर ही होते हैं और किसी भी बातचीत की ¶ाुरुआत ज्यादातर मौसम से ही ¶ाुरू होकर मौसम पर ही ख़त्म होती है। कहा जाता है इंग्लैंड का मौसम बेहद मनमौजी है, इसका कोई भरोसा नहीं, पल में तोला पल में मा¶ाा। आप घर से निकले बन-ठन कर पिकनिक मनाने को और लौट कर आये पानी से तरबतर। या घर से निकले बड़ा-सा छाता और भारी जैकेट पहन कर और कुछ देर में उन्हें किसी तरह बैग में ठूंसते नजर आएं। अत: इस अप्रत्या¶िात बारि¶ा और धूप के खेल को समझना मौसम विभाग के लिए भी टेढ़ी खीर होती है, तो ज़ाहिर है वे बेचारे भी इंग्लैंड के लोगों के मजाक का अहम हिस्सा बनते हैं। हालांकि अब मौसम विभाग की भविष्यवाणियाँ काफी सटीक होती हैं और लोग उनके मुताबिक ही अपने दिन का कार्यक्रम और छुट्टियों का प्लान बनाया करते हैं। परन्तु फिर भी कुछ भी ठोस तरीके से कहना अब भी संभव नहीं है और मौसम एवं मौसम विभाग पर चुटकुले आज भी एक रिवाज की तरह इंग्लैंड में सबसे ज्यादा प्रचलित हैं। मौसम आज भी इंग्लैंड का एक राष्ट्रीय मजाक समझा जाता है।
कहने को ब्रिाटेन में बराबर अवधि की चार ऋतुएँ हैं- वसंत, ग्रीष्म, पतझड़ और ¶ारद। जिनमें ¶ारद में ग्रीष्म के मुकाबले ज्यादा ठण्ड और बरसात होती है और दिन छोटे होते हैं। परन्तु बारि¶ा को हर ऋतु में अपनी घुसपैठ करने की जैसे पूर्ण इजाज़त है।
दरअसल ब्रिाटेन में औसतन तीन दिन में एक बार बारि¶ा होती है हालाँकि अलग-अलग क्षेत्र में यह औसत बदलता रहता है। आमतौर पर प¶िचम में पूर्व की अपेक्षा और हाइलैंड्स में लोलैंड्स की अपेक्षा अधिक बरसात होती है। हालाँकि संभव यह भी है कि कुछ ही किलोमीटर पर आपको मौसम लुका छिपी खेलता मिल जाए। जैसे सबसे नम जगह वेल्स में स्नोडोनिया है जहाँ औसत वार्षिक वर्षा तीन हजार मिलीमीटर से अधिक मापी गई है। वहीं पूर्वी भाग के ईस्ट एंग्लिया में यह आंकड़े सात सौ मिलीमीटर से भी कम हैं। एक दिन में सबसे अधिक बारि¶ा - दो हजार सात सौ चौरानवे मिलीमीटर्स, मार्टिंस्टोन डोरसेट में रिकॉर्ड की गई थी।
जहां एक पारिवारिक घर की छत एक साल में एक लाख लीटर से अधिक बारि¶ा का पानी झेलती है। वहीं एक एकड़ के एक एरिया में एक इंच बारि¶ा का वजन लगभग एक टन होता है।
इन सबके बावजूद भी ब्रिाटेन में मौसम हर दिन, हर घंटे और हर क्षेत्र के हिसाब से बदलता रहता है जिसकी वजह से मौसम का अनुमान लगाना या मौसम की भविष्यवाणी करना बेहद जटिल कार्य है।
ऐसा ही एक वाकया मुझे याद आ रहा है। ब्रिाटेन में वह हमारी पहली गर्मियां थीं। हमें आये हुए एक महीना ही हुआ था, परन्तु ब्रिाटेन की खूबसूरत "इंग्लि¶ा समर' की किताबी व्याख्या दिलो दिमाग पर छाई थी। ऐसे ही एक खूबसूरत दिन में हम लंदन की सैर करने निकले तो सड़क पर चलने वालों में लगभग हर नागरिक के हाथ में बड़ा-सा छाता दिखाई दे रहा था। भरी-पूरी, चमकती धूप में यह छाता सिवाय एक एक्सेसरी के और कुछ नहीं लग रहा था। सो इसे अंग्रेजों की अतिरिक्त सुरक्षा और साहबी अंदाज एक चोचला भर समझ कर हम अभी मखौल बनाने की फिराक में ही थे कि जाने कहाँ से मोटी-मोटी बूँदें पड़नी ¶ाुरू हो गर्इं और पलक झपकते ही वे झमाझम बारि¶ा में तब्दील हो गर्इं। देखते ही देखते खुला चमकता आसमान काले छातों से भर गया। अब हमने भी बड़ी नज़ाकत से अपना खूबसूरत फूलों वाला फोÏल्डग छाता अपने बैग से निकाला और ¶ाान से खोलकर उसे तानने ही लगे थे कि एक हवा के झोंके के साथ आई तीव्र बौछार से हमारे उस नन्हें से छाते के परखच्चे उड़ गए और हमारे पास करीब के एक कैफे में ¶ारण लेने के अलावा कोई दूसरा उपाय न बचा। तब हमें अंग्रेजों के उस लम्बे, काले तथाकथित एक्सेसरीज़ का मतलब समझ में आया और अपनी सोच पर हंसी। ¶ाायद इसलिए हर ब्रिाटेनवासी या जो ब्रिाटेन को जानता है अपने साथ, हर मौसम में एक छाता और एक हल्का जैकेट लेकर अव¶य चलता है। कोई नहीं कह सकता कि दिन में चटकती धूप के बाद अचानक कब बादल घिर आएं और कब बरसात ¶ाुरू हो जाए। कोई यह बताने की हिम्मत नहीं कर सकता कि आज मौसम खुला है तो ¶ााम तक तेज हवाएं नहीं चल सकतीं।
¶ाायद यही वजह है कि ब्रिाटेन में बारि¶ा पर रोमांटिक गीत या कवितायें लिखने का चलन नहीं है। ब्रिाटेन में प्रेम में भीगी हुई कोई नायिका बारि¶ा के पानी में भीगती हुई बावली नहीं हुई जाती। बारि¶ा में बच्चे नहाते हुए नहीं दिखाई पड़ते और साहित्य की सुकोमल और रोमांटिक विधाओं से बारि¶ा दूर है क्योंकि यहाँ कोई बारि¶ा का इंतज़ार नहीं करता, न ही करना चाहता है। इसलिए यहाँ "रिमझिम गिरे सावन' जैसे गीत न लिखे जाते हैं न गुनगुनाये जाते हैं। कवि की कल्पना में यहाँ कोई प्रेयसी बारि¶ा में भीगती नहीं आती और इसलिए काले बालों को घटा का रूपक और गेसुओं से टपकती बूंदों जैसी खूबसूरत पंक्तियाँ यहाँ नहीं मिलतीं।
और ¶ाायद इसलिए ही ब्रिाटेन में बारि¶ा होने पर पकोड़े खाने का रिवाज भी नहीं है, क्योंकि कौन जाने कि आपने बरसती बूँदों को देखकर जब तक बेसन घोला तब तक बूँदें ऐसे लुप्त हो गर्इं जैसे कभी थीं ही नहीं और सूर्य महाराज अपनी पूरी ताक़त से चमकने लगे।

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