ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
हृषीकेश सुलभ
हृषीकेश सुलभ
15 फ़रवरी 1955 लहेजी, सीवान बिहार में जन्म। तीन दशकों से कथा-लेखन, नाट्य-लेखन, रंगकर्म के साथ-साथ सांस्कृतिक आन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी। नाटकों को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रंगमंडल, श्रीराम सेन्टर रंगमंडल आदि संस्थानों तथा देवेन्द्र राज अंकुर, संजय उपाध्याय आदि कई प्रसिद्ध रंगकर्मियों ने मंचित किया है। वसंत के हत्यारे, तूती की आवाज़, बँधा है काल, वधस्थल से छलाँग और पत्थरकट आपके कथा-संकलन प्रकाशित हैं। अमली, बटोही और धरती आबा आपके मौलिक नाटक और शूद्रक रचित मृच्छकटिकम् की पुनर्रचना माटीगाड़ी और फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास का नाट्यांतर मैला आँचल प्रकाशित हैं। बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, डॉ. सिद्धनाथ कुमार स्मृति सम्मान तथा इंदु शर्मा कथा सम्मान से अलंकृत।

सूत्रधार की रंगछवियाँ
हमारी रंगपरंपरा में सूत्रधार को अपने नाम के अनुरूप महत्व प्राप्त है। भारतीय समाज में संसार को रंगमंच, जीवन को नाट्य, मनुष्य या जीव को अभिनेता और ईश्वर को सूत्रधार कहा जाता है। यह माना जाता है कि ईश्वर
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