ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
घर वाला चेहरा - बाहर वाला चेहरा
01-Aug-2019 03:52 AM 194     

घर से बाहर निकलने से पहले
आईने में देखती हूँ
बाहर वाला चेहरा - अपनी जगह पर है न?

दुरुस्त करती हूँ , आँखें, मुँह, हाव-भाव
सीधी करती हूँ पीठ, सामना करने के लिए
बाहर वाले संसार का
एक हल्की मुस्कराहट सहेजे, निकलती हूँ घर से

बाहर के मापदंड, समझता है यह चेहरा
नहीं उलझन कोई नहीं
कितने दुःख दर्द भुला देता
बाहर वाला चेहरा

कई बार घर वाला सिरदर्द
वापस लौटने पर ही आता है
घर आते ही, घर वाला चेहरा
बिना प्रयत्न, वापस आ जाता है

पुराने कपड़ों जैसा, फिर शरीर पर चिपक जाता है
घर वाला चेहरा, घर में समा जाता है
दुनिया से छुप कर
घर वाला चेहरा, मुद्दतों साथ रह जाता है

कभी घर वाला चेहरा, अनायास
बाहर भी चला जाता है
सहसा किसी परिचित की आँखों के भावों से
होता है भान, एक हैरानी दिख जाती है

अरे, मैं तो घर वाला चेहरा ही
ले आई बाहर
क्या सोचा होगा उसने?


बाहर वाला चेहरा, रहता है तैनात
अपनी ड्यूटी पर
मात्र चेहरे को ही नहीं
शरीर को रखता है चुस्त-दुरुस्त

जान बूझकर, सोच समझकर
बाहर वाले चेहरे को
लम्बी छुट्टी पर नहीं जाने देती

मात्र दिखावा ही नहीं यह
चाहिए सबको
कम से कम दो चेहरे

हाँ, छिपे हैं इनमें और कितने चेहरे
प्यार वाला चेहरा
नाराज़ दुखी चेहरा
शान्त-सौम्य चेहरा, सोच में डूबा चेहरा

बाहर वाला चेहरा है कितना आवश्यक
आप जानते समझते हैं न?

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