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हिंदी-रूसी अनुवादक बनने का स्वप्न
01-Mar-2016 12:00 AM 1525     

मेंरा नाम अन्या शप्रान है। मेरी उम्र बीस साल की है। मैं विद्यार्थी हूँ और वि?ाविद्यालय से हिंदी भाषा में दर्शन शास्त्र सीख रही हूँ। मुझे पढ़ना बहुत पसंद है। हिंदी के अलावा मैं भारतीय साहित्य, इतिहास, संस्कृत, दर्शन शास्त्र, भूगोल भी सीख रही हूँ। विगत एक साल के दौरान मुझे संस्कृत पढ़ायी जाती थी।
मेरा जन्म 1993 में यूक्रेन के एक छोटे से शहर में हुआ। वहाँ मैं ग्यारह साल तक रही। इसके बाद मेरा परिवार रशिया में मॉस्को के एक क्षेत्र में जाकर वहाँ रहने लगा। हमारा संयुक्त परिवार बहुत बड़ा है। जिसमें माताजी, पिताजी, मेरे दो छोटे भाई, दादाजी और दादीजी हैं। मेरे माँ-पिता कामकाजी हैं। माताजी एक कंपनी की निदेशिका हैं। मेरे दो भाई स्कूल जाते हैं और नानीजी और नानाजी यूक्रेन में रहते हैं।
अब मैं रूस की शिक्षा के बारे में बताना चाहती हूँ। हो सकता है कि आपको यह अजीब लगे लेकिन सच्चाई यही है कि मुझे स्कूल में दी जाने वाली आधुनिक शिक्षा पद्धति अच्छी नहीं लगती। मेरी इस बात के कई कारण हैं, जिसमें से पहला तो यही है कि रूस के माध्यमिक स्कूल में छात्रों के लिए रुचि के विषयों का कोई विभाजन नहीं है। मतलब ये है कि मुझे मानविकी विषय बहुत पसंद है जैसे रूसी भाषा, साहित्य, इतिहास, भूगोल, सामाजिक विज्ञान। लेकिन रूस के माध्यमिक स्कूल में ज्यादा विषय गणितीय और प्राकृतिक विज्ञान पढ़ाये जाते हैं। मेरा विचार है कि स्कूल में अलग-अलग विभाजन होना चाहिए या मानविकी विषयों की या प्राकृतिक विषयों का।
दूसरे यह भी उल्लेखनीय है कि अधिकांश शिक्षक अपना विषय बहुत रुचि लेकर नहीं पढ़ाते। शायद वे अपने विषय के प्रति विरक्त हो चुके होते हैं अथवा शायद कम वेतन की वजह से पढ़ाने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं रहती है।
तीसरा, आज रशिया में बहुत बड़े पैमाने पर स्कूल शिक्षा में सुधार लागू किया जा रहा है। रूसी शिक्षा में नि:शुल्क विषय जिनको शिक्षा मंत्रालय से मंजूरी दी गई है, यों हैं- रूसी भाषा, साहित्य, गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, इतिहास, सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र और कानून सहित) कला (संगीत, ललित कला, विश्व ललित साहित्य) प्रौद्योगिकी (श्रम), शारीरिक शिक्षा, भूगोल, प्राकृतिक इतिहास (दुनिया), विदेशी भाषा, देशी (गैर रूसी) भाषा और साहित्य, विज्ञान और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, बुनियादी जीवन सुरक्षा।
अगर छात्र दूसरी विदेशी भाषा या कॉलेज में प्रवेश करने के लिए कुछ विषय सीखना चाहेगा तो उसको पैसा देना पड़ेगा। इसके अलावा अतिरिक्त मंडली में भाग लेना जैसे नाटक-मंडली और ऐच्छिक विषय सीखना अभी मुफ्त नहीं होता लेकिन नये रशिया से पहले सोवियत संघ के समय शिक्षा पाना सभी को मुफ्त में मिलता था। रूसी स्कूल शिक्षा की तुलना में उच्च शिक्षा मुझे ज़्यादा पसंद है। युवा लोग जान-बूझकर विद्यालय, विश्वविद्यालय या कॉलेज में दाखिल हो सकते हैं और अपनी इच्छा से विषय चुन सकते हैं। कोई भौतिकी पढ़ता है तो कोई सामाजिक विज्ञान पढ़ता है।
रूसी शिक्षा प्रणाली तीन स्तरों में विभाजित है- बी-ए., एम.ए., पी-एच-डी। रूस में शिक्षा के लिये निजी और राजकीय विश्वविद्यालय हैं। निजी विश्वविद्यालय में सशुल्क शिक्षा होती है, जबकि सरकारी विश्वविद्यालय में सशुल्क और नि:शुल्क शिक्षा मिलती हैं। मतलब कुछ विभागों में छात्र शिक्षा के लिये फीस देते हैं, जैसे तकनीकी और चिकित्सा विद्यालय, विमान-निर्माण कॉलेज, रेल विश्वविद्यालय, संचार संस्थान आदि। पहले सोवियत संघ में उच्च शिक्षा पूरी तरह नि:शुल्क थी। लेकिन विश्वविद्यालय में दाखिल होना बहुत मुश्किल था। स्कूल शिक्षा के ज्ञान की सहायता से छात्र विश्व विद्यालय प्रवेश कर सकता था।
मुझे साहित्य बहुत पसंद था। मेरे स्कूल में रुचि साहित्य अच्छी तरह पढ़ाया जाता था। मेरी शिक्षिका ने मुझे कविता के मग्न रहने में मदद कर दी थी। मुझे पुश्किन, लेरमोन्तोव, मायाकोव्स्कीय के काव्य तथा रजत आयु की कवयित्री (च्त्थ्ध्ड्ढद्ध ॠढ़ड्ढ’द्म द्रदृड्ढद्यद्म) जैसे मरीना त्सवेतायेवा, अन्ना अख्मातोवा के काव्य बहुत पसंद है। लेकिन अपने विश्व विद्यालय में मुझे भारतीय गद्य ज़्यादा अच्छा लगता है।
मेरे पसंदीदा लेखक प्रेमचंद हैं। हिंदी पाठों पर मैं "ठाकुर का कुआँ', "शतरंज के खिलाड़ी' और "बड़े भाई साहब' की कहानियाँ पढ़ चुकी हूँ। दो कहानियों पर हमने फिल्में देखी। इतिहास के पाठों पर मैंने महात्मा गांधी के बारे में बहुत पढ़ा है। और "बापू' कविता भी मैं पढ़ चुकी हूँ। धर्म के इतिहास के पाठों पर मैंने हिंदू धर्म बुद्ध, जैनिज़्म, सिख धर्म, मुस्लिम धर्म के बारे में सीखा है। ग्रेजुएशन के बाद मैं अनुवादक बनना चाहती हूँ और हिंदी से रूसी में हिंदी उपन्यास का अनुवाद करना चाहती हूँ। मास्को में भारतीय दूतावास में जवाहरलाल नेहरू का सांस्कृतिक केंद्र है। वहाँ हिंदी अध्यापक-प्रोफ़ेसर डॉ. गुलाब सिंह रूसी लोगों को हिंदी सिखाते हैं। पिछले सेमेस्टर में वे हमारे विश्वविद्यालय में भी आया करते थे तथा हमें हिंदी पढ़ाते थे। इनकी हिंदी सुनते-सुनते हम हिंदी प्रेमी बन गये हैं।

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