ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
हिंदी भाषा अपनी बोली
CATEGORY : कविता 01-Mar-2017 11:53 PM 1062
हिंदी भाषा  अपनी बोली

हिंदी भाषा

गूँजे हिंदी भाषा मन में
मुरली बजे ज्यों वृंदावन में

हिंदी भाषा के मतवाले
इसको तन-मन से सुनते हैं
इसके सारे भक्त निराले
इसके सपने ही बुनते हैं

नेह बढ़ाती,धूम मचाती
साख इसकी बढ़ती ही जाए
सबको भाती और बहलाती
फूलों जैसी मन महकाए

कितनी है यह गौरवशाली
कितनी है यह वैभवशाली
इसके बोल बड़े न्यारे हैं
इसके बोल बड़े प्यारे हैं

इसकी खुशबू ऐसी खुशबू
क्या होगी खुशबू चन्दन में
गूँजे हिंदी भाषा मन में
मुरली बजे ज्यों वृंदावन में।


अपनी बोली

पहले अपनी बोली बोलो
फिर चाहे तुम कुछ भी बोलो

इंग्लिश बोलो , रूसी बोलो
तुर्की बोलो , स्पैनिश बोलो
अरबी बोलो , चीनी बोलो
जर्मन बोलो , डैनिश बोलो
कुछ भी बोलो लेकिन पहले
अपनी माँ की बोली बोलो

अपनी बोली माँ की बोली
मीठी - मीठी , प्यारी - प्यारी
अपनी बोली माँ की बोली
हर बोली से न्यारी - न्यारी

अपनी बोली माँ की बोली
अपनी बोली से नफ़रत क्यों
अपनी बोली माँ की बोली
दूजे की बोली में खत क्यों

अपनी बोली का सिक्का तुम
दुनिया वालों से मनवाओ
ख़ुद भी मान करो तुम उसका
औरों से भी मान कराओ

माँ बोली के बेटे हो तुम
बेटे का कर्तव्य निभाओ
अपनी बोली माँ होती है
क्यों न सिर पर उसे बिठाओ।

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