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गीता घिलोरिया
गीता घिलोरिया

भारत में जन्म। मास्टर्स इन कंप्यूटर एप्लिकेशन तथा नेटवर्क इंजीनियरिंग की उपाधि प्राप्त की। स्कूली जीवन से साहित्यिक गतिविधियों में संलग्न। रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत।


आज मैं जब भी
आज मैं ये देशों की दुनिया, ये विदेशों का युग हैयूँ ही सब ये दिन-रात इक हो चले हैंयहाँ चाँद छुपता है या अब सहर देखें क्यूँ मेरे ये दिन-रात एक हो चले हैं वो छत पे सुबह चिड़ियों का डेरावो सवेरे की ठंडक में नींदो
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