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गिरीश पान्डे "देवयोगी"
गिरीश पान्डे
अल्मोड़ा में जन्म। लखनऊ विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र और कानपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर। कुछ वर्षों आकाशवाणी और वनस्पति अनुसंधान संस्थान में कार्य किया। भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून में भी कार्यरत रहे। हिंदी साहित्य में गहरी रुचि। रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। संप्रति: अमेरिका के वर्जीनिया शहर में वाटर रिक्लेमेशन विभाग में रसायन शास्त्री।

गुनियाँ प्लैटफ़ॉर्म
गुनियाँमाँ ने चिरैया का नामरखा था "गुनियाँ"कभी सूप पर आ बैठतीऔर तकती थी माँ की ऐनक कोकभी फुदक करआरसी (दर्पण) के सामने जा बैठती थीलड़ती थी अपने ही साये सेफिर थक कर जा बैठती थी
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