ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
ग़ज़ल Next
हम-तुम आज़ादी वो मैं हूं
हम-तुम आज़ादी वो मैं हूं

हम-तुम

होश में कैसे रहते आपकी नज़र में रहे
किया तो कुछ भी नहीं फिर भी हम ख़बर में रहे
ग़रीब गाँव का दुख हमसे तो देखा न गया
तमाम ज़िंदग़ी हम इसलिए शहर में रहे
जिन्हें न तुक का ...

01-Dec-2017 10:10 PM 43
ग़ज़ल एक दो
ग़ज़ल एक दो

एक

जहाँ पर हो गयी समझो शम"अ से बंदगी की हद
वहीं पे ख़त्म होती है पतंगे की ख़ुदी की हद
खड़ी पाई का तो बस काम ही है रोकना सबको
किसी दिन तय करेगी ये मेरी भी ज़िंदगी की हद
जह ...

01-Apr-2017 01:11 AM 668
क्यूँ मुझे बार-बार दिखता है उसकी आँखों में प्यार दिखता है
क्यूँ मुझे बार-बार दिखता है  उसकी आँखों में प्यार दिखता है

एक

क्यूँ मुझे बार-बार दिखता है
उसकी आँखों में प्यार दिखता है

उसको पाने की चाह में देखो
हर कोई बेक़रार दिखता है

क्या छुपाता है मेरी नज़रों से
अब मुझे ...

01-Mar-2017 12:01 AM 1076
ग़ज़ल कल्पना रामानी
ग़ज़ल कल्पना रामानी

एक

 

मुझको तो गुज़रा ज़माना चाहिए
फिर वही बचपन सुहाना चाहिए
जिस जगह उनसे मिली पहली दफा
उस गली का वो मुहाना चाहिए
तैरती हों दुम हिलातीं मछलियाँ
वो पुनः ...

01-Feb-2016 12:00 AM 738
QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 10.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^