ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
गंगानंद झा
गंगानंद झा
बैद्यनाथ-देवघर (झारखण्ड) में जन्म। सीवान (बिहार) के डी.ए.वी स्नातकोत्तर कॉलेज में वनस्पति-शास्त्र के अध्यापन से सेवा-निवृत्त। चाल्र्स डार्विन के क्रम-विकासवाद, जवाहरलाल नेहरू के scientific temper तथा रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जीवन-दर्शन के समन्वय के आलोक में जीवन-पथ के प्रति अपने कौतूहल बरकरार है।
चण्डीगढ़ में निवास।, ,
अवधूता, गगन घटा गहरानी
01-Apr-2016 12:00 AM 228 अवधूता, गगन घटा गहरानी

अदिम मनुष्य बादल, आसमान, सागर, तूफान, नदी, पहाड़, विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों, जीव-    जन्तुओं के बीच अपने आपको असुरक्षित, असहाय और असमर्थ महसूस करता था। वह भय, कौतूहल और जिज्ञासा से

प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य
01-Apr-2016 12:00 AM 106 प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य

प्रकृति ने विधाता को प्रणाम किया, "पिता, यह किस साज में सजाया मुझे? यह विन्यास, यह परतों में गूँथा संगठन, यह सुर, छन्द, लय और ध्वनि! विविधता तथा वैचित्र्य का मनोहारी सौन्दर्य; पर साथ ही कण-कण पर, ब

प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य
01-Apr-2016 12:00 AM 106 प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य

प्रकृति ने विधाता को प्रणाम किया, "पिता, यह किस साज में सजाया मुझे? यह विन्यास, यह परतों में गूँथा संगठन, यह सुर, छन्द, लय और ध्वनि! विविधता तथा वैचित्र्य का मनोहारी सौन्दर्य; पर साथ ही कण-कण पर, ब

एक आध्यात्मिक नजरिया, जीने की एक राह (अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद गंगानंद झा)
01-Apr-2016 12:00 AM 131 एक आध्यात्मिक नजरिया, जीने की एक राह (अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद गंगानंद झा)

एशिया और यूरोप के बीच अन्तर स्पष्ट करने के लिए
    लोग एशियाई मन की धार्मिक रुझान एवम् यूरोपीय
    मानसिकता के वैज्ञानिक मिजाज की चर्चा करते हैं। इस अन्तर को इस तथ्य स

स्मृति चारण
01-Mar-2016 12:00 AM 118 स्मृति चारण

जीवन के कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिनकी हम व्याख्या नहीं कर पाते। मैं मात्र बीस महीनों के लिए ईशान भारत के असम राज्य के सिलचर में रहा था। यह बात करीब छप्पन साल पहले की है। वहाँ के लोगों से अप्रत्याशित

नई विश्व सभ्यता
01-Mar-2016 12:00 AM 132 नई विश्व सभ्यता

मनुष्य हर जगह एक ही हैं और सबों के महानतम मूल्य एक समान होते हैं। उनके बीच फर्क, जो तयशुदा तौर अर्थपूर्ण होते हैं, का सरोकार बाहरी, अस्थायी सामाजिक हालात से रहता है तथा उन हालात के साथ ही बदलता रहत

अपनी बात दार्जिलिंग
01-Feb-2016 12:00 AM 99 अपनी बात दार्जिलिंग

कवि दार्जिलिंग के होटल ठहरा था। सुबह सोकर उठा खिड़की खोली, तो भौंचक रह गया। हिमाच्छादित कंचनजंगा पर सुनहली धूप की पृष्ठभूमि में रंग-बिरंगे फूलों का मेला। निहारता ही रह गया कवि। फिर उसका मन मान से भर

गणतंत्र एक मत है
01-Feb-2016 12:00 AM 140 गणतंत्र एक मत है

भारत 1947 में स्वाधीन हुआ। साफ और समुचित तरीके से देश का शासन संचालित करने की अपेक्षा यह आसान रहा है। यह दायित्व अधिक कठिन प्रतीत होता है। इसके लिए निःस्वार्थ नेतृत्व के साथ ईमानदार और सुयोग्य सिवि

नव वर्ष का अभिनन्दन
01-Jan-2016 12:00 AM 102 नव वर्ष का अभिनन्दन

न्यता है कि रोमन देवता जेनस के दो चेहरे हैं। एक से वह आगे और दूसरे से पीछे देखता है। साल के पहले महीने का नाम जनवरी इसी रोमन देवता के सम्मान में रखा गया। एक से वह बीते हुए वर्ष को देखता है और दूसरे

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