ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
फिकुल थौंग
08-Jul-2017 07:39 PM 2227     

एक समय की बात है थाईलैंड में फिकुल नाम की एक लड़की रहती थी। कहा जाता है कि वो न केवल सुन्दर थी, बल्कि व्यवहार में भी वह बहुत अच्छी थी। जब वह बहुत छोटी थी तभी उसकी माँ की मृत्यु हो गयी थी। वो अपनी सौतली माँ के साथ रहती थी जिसकी माली नाम की बेटी थी। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था कि दोनों माँ-बेटी दुष्ट महिलाएं थी और फिकुल को हर दिन कड़ी मेहनत करने को मजबूर करती थी।
एक दिन धान कूटने के बाद फिकुल झरने से पानी लाने गयी जो उसके घर से बहुत दूर नहीं था। वापस लौटते वक़्त अचानक ही एक बूढ़ी औरत उसके सामने आ गयी और उसने फिकुल से पीने का पानी माँगा। फिकुल को उस औरत की मदद करने में ख़ुशी हुई। उसने उस औरत को न सिर्फ पीने का पानी दिया बल्कि कहा कि वो अपना मुंह और हाथ धोने के लिए और पानी ले सकती है। फिकुल ने उससे कहा की वो चिंता न करे, अगर पानी ख़त्म हो जायेगा तो वो झरने से फिर भर कर ले आएगी। वो बूढ़ी औरत मुस्कुरा कर बोली, "तुम खूबसूरत ही नहीं पर दिल से भी बहुत सुन्दर हो। - भले ही मैं गरीब और फटेहाल हूँ तब भी तुमने मुझसे प्यार से बर्ताब किया।" उसके बाद उस औरत ने फिकुल को एक वरदान दिया कि जब भी वो किसी के लिए करुणा और सहानुभूति प्रकट करेगी तो उसके मुंह से तन्जोंग वृक्ष की लकड़ी (जिसे थाई भाषा में फिकुल कहा जाता है) के सोने के फूल झरेंगे। इस वरदान को देने के बाद वो औरत अदृश्य हो गयी। फिकुल को समझ आ गया कि वो औरत एक फरिश्ता थी जो उसे वरदान देने के लिए धरती पर आयी थी।
देर से घर लौटने पर उसकी माँ ने उसे खरी-खोटी सुनाई कि घर के काम से बचने के लिए उसने समय बर्बाद किया। फिकुल ने माँ को जब पूरी घटना का करुणापूर्वक वर्णन किया तो उसके मुंह से सोने के फूल झरे। लालची माँ ने तुरंत अपना व्यवहार क्रोध से लालच में बदल लिया और उन सोने के फूलों को बटोरा। साथ ही उसने फिकुल को और बोलने के लिए मजबूर किया ताकि वो ज्यादा सोने के फूल एकत्रित कर सके।
उस दिन के बाद से माँ ने रोज़ स्वर्ण फूलों को इकठ्ठा कर बाजार में बेचना शुरू किया और बहुत धन कमाया। अब वो बहुत खुशहाल हो गए। फिकुल को अब कड़ी मेहनत करने की ज़रूरत नहीं थी पर उसे दिन भर बोलने के लिए मज़बूर किया जाता था ताकि उसके मुंह से और अधिक स्वर्ण पुष्प निकलें। माँ की लालची मांगों को पूरा करते-करते फिकुल का गला ख़राब हो गया और उसकी आवाज़ जाती रही। वो कुछ दिनों तक बिलकुल बात नहीं कर पायी। ये देखकर फिकुल की माँ बहुत नाराज़ हुई और उसने फिकुल की पिटाई की ताकि वो फिर से बोले पर फिकुल एक शब्द भी नहीं बोल पायी।
अपने लालच को पूरा करने के लिए सौतेली माँ ने अपनी बेटी माली को उसी जगह भेजने का फैसला किया ताकि वो भी फिकुल की तरह बन जाये। माली उसी जगह गयी पर उसे बूढ़ी औरत की जगह एक खूबसूरत महिला दिखाई दी जो शानदार वस्त्रों में एक पेड़ के नीचे खड़ी थी। उस औरत ने माली से पीने का पानी माँगा। ईष्र्यावश माली को क्रोध आ गया और उसने सोचा कि यह औरत फरिश्ता नहीं हो सकती और उसने उस औरत को अपशब्द कहे और पानी देने से मना कर दिया। वो औरत फरिश्ता ही थी और उसने माली को श्राप दिया कि वो जब भी क्रोध से बोलेगी तो उसके मुंह से कीड़े गिरेंगे। घर लौटने पर माली ने पूरी घटना अपनी माँ को सुनाई। क्योंकि माली ने पूरी घटना का वर्णन गुस्से में किया इसलिए पूरा घर कीड़ों से भर गया। माँ ने सोचा की जरूर फिकुल ने उसको गलत कहानी सुनाई क्योंकि वो माली से जलती थी और उसके परिणामस्वरूप माली को वो बूढ़ी औरत नहीं मिली। उसने फिकुल को बहुत मारा और घर से बाहर निकाल दिया।
दुखी होकर फिकुल घूमते-घूमते एक जंगल में पहुंच गयी। भाग्यवश वो उस तरफ चल पड़ी जहाँ एक राजकुमार अपने सैनिकों के साथ जंगल भ्रमण करने आया था। उसे रोता देख राजकुमार ने उससे पूरी घटना पूछी। जब उसने पूरी कहानी सुनाई तो वो पूरा इलाका स्वर्ण पुष्पों से भर गया। राजकुमार बहुत खुश हुआ और उसने फिकुल से शादी की इच्छा प्रकट की। शादी के बाद राजकुमार का राज्याभिषेक हुआ और उसने राजा बनकर फिकुल के साथ लम्बे समय तक ख़ुशी ख़ुशी राज्य किया।

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