ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
एक सोच को बदलने की जरूरत
01-May-2016 12:00 AM 3037     

क्या जरूरत है तुम्हें शादी करने की? यों ही जिंदगी की गुजर-बसर हो ही जायेगी और यदि कर ही ली है तो ये विचार कैसे पनपा आपके ह्मदय स्थल पर कि छोड़कर एक-दूसरे को जीवन अच्छा चलेगा। कभी सोचा है कि आपकी जरा-सी नादानी आपके नादान बच्चों को कहां ले जायेगी? आजकल तो आलम यह है कि जरा-सी चिंगारी चाहिये एक दावानल के लिये। बस जरा-सी एक बात कि सब्जी में बाल कैसे आया या फिर रोज-2 नमक कम या ज्यादा क्यों। या फिर अपने मायके की धौंस। बस फिर क्या ये जरा-सी तकरार और बढ़ती ही जाती है। और फिर एक दिन हमारे काले कोट वाले जनाब हाजिर हो जाते हैं कि चलो मैं आपकी मदद करता हूँ। तो इन सब झमेलों में क्यों पड़ते हो भाई? आराम से या आसानी से जीवन क्यों नहीं गुजार लेते आप दोनों? समस्या क्या है? अरे! इतनी सी बात के लिये भी कोई कभी तलाक करता है क्या? एक-दूसरे को क्षमा क्यों नहीं कर सकते? क्या अभी तक आपने वो प्रसिद्ध दोहा नहीं पढ़ा या जाना? क्षमा बढ़िन को चाहिये, छोटन को अपराध। और एक बड़ी मुद्दे की बात यह है कि क्या कोई अपनी माँ, बाप, भाई या बहिन को भी तलाक कर सकता है? जवाब तो यही होगा न, कि नहीं भाई ऐसा कैसे हो सकता है! तो बस आपकी बात बन गई समझो। अब यदि आप इन सब अपनों को तलाक नहीं दे सकते तो फिर अपनी धर्म पत्नी या धर्म पती (हा हा....) को कैसे कर सकते हो? ये तो एक नजरिया है मेरे प्यारे, अच्छे समाज को आगे ले जाने के आप सब महानुभाव एवं सभी लोग गीता के सुप्रसिद्ध श्लोक 2/86 से सुपरिचित अवश्य ही होंगे। ऐसा कोई बिरला ही व्यक्ति होगा जिसने महाभारत सीरियल नहीं देखा हो और उसे "कर्मण्ये वाधिकारस्ते या फलेषु कदाचन' स्मरण न आता हो। अब हमारे नित्य प्रति जीवन में इतना अधिक समाधान है फिर भी समस्यायें जस की तस। क्यों है भाई ऐसा? कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि हम भारतीय इतना अधिक ज्ञान पचा नहीं पाये हैं। नहीं तो ऐसा कैसे हो सकता है कि नन्हीं-सी जान और सीधा सीलिंग फैन या फिर सल्फास आप समझ रहे हैं न? कौन है इसके लिये जिम्मेदार? क्या समाज या फिर माता-पिता?

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 15.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^