ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
एक कबीर नहीं बना सकते?
01-Jun-2016 12:00 AM 1912     

रह-रह कर पूछता हूँ तुमसे
इतना बनाते रहते हो तुम
इतना बनाते रहते हैं हम
एक कबीर ही नहीं बना सकते?

पूछता हूँ लोगों से मैं
जो हैं महान वैज्ञानिक
आविष्कारक
नूतन तत्वों के निर्माता।

पूछता हूँ मैं उनसे
जो हैं बड़े कारखानेदार
उद्योगपति उत्पादक।

पूछता हूँ मैं उनसे
जो हैं ¶ाास्त्र-वि¶ाारद
धर्म-विधायक, नीति-उन्नायक।

पूछता हूँ मैं उनसे
जो हैं क्रान्ति-विधायक
आमूल परिवर्तन के संवाहक।

पूछता हूँ मैं उनसे भी
जो हैं बड़े कवि
क्रान्तिदृष्टा
अपनी सृष्टि के आप विधाता
नूतन सृष्टि के वैतालिक।

इतना बनाते रहते हो तुम
एक कबीर ही नहीं बना सकते?
पूछता हूँ लोगों के ई·ार से मैं
जो कहलाता है
वि·ा-विधायक
पाप-विमोचक
पुण्योद्धारक
नीति-धर्म का
चिर-संरक्षक
वि·ा के अणु-अणु का
सर्जक, उन्नायक, संहारक।

इतना बनाते रहते हो तुम
इतना बना सकते हो तुम
मुझको बनाया
जग को भी बनाया
और
स्वयं को भी
तब एक कबीर ही नहीं बना सकते?

यदि नहीं
तो बंद करो अपना यह कारखाना
वि¶वोत्पादन का
और बदल लो अपना नाम
अथवा कर लो आत्महत्या।

रह-रह कर पूछता हूँ मैं तुम सबसे
इतना बनाते रहते हो तुम
एक कबीर ही नहीं बना सकते?

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