ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
दूसरा पहलू
01-Nov-2016 12:00 AM 3124     


सभ्यता का दूसरा पहलू
विकास का वीभत्स चेहरा
उघाड़ देती है आग
जलकर-झुलसकर मरती
जीव-जातियों की दर्दनाक चीखें
और उससे भी भयानक
खामोशियों के बीच
बहरे बने हुए लोगों की शक्लें
सबसे कुरुप नज़र आती हैं
जब जलाई नहीं जाती
आग लगती नहीं जब
जब लगाई जाती है

यह इंसानियत पर से
भरोसे को सबसे पहले
भस्म करती है

यह आदमी को
नंगा कर देती है
यह आग फिर
प्रमाण देती है कि
हम आए थे
यहाँ पेड़-पौधों की जूठन गैस पीने
धरती कभी बनी ही नहीं थी
हमारे लिए....
धरती कभी बनी ही नहीं थी
हमारे लिए मशाल

आग खतरनाक होती है
जब पेट की नहीं होती
जब नहीं होती सीने में
या जब इनके लिए
नहीं जलाई जाती

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