ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. विजय मिश्र
डॉ. विजय मिश्र
हार्वर्ड वि·ाविद्यालय के प्रतिष्ठित भौतिक विज्ञानी एवं संस्कृत विद्वान। कवि के तौर पर न्यू इंग्लैंड, दक्षिण एशिया के अनेक देशों में चर्चित एवं सफल यात्राएँ कीं। अनेक गरिमापूर्ण कवि सम्मेलनों में भागीदारी। विगत 18 बरसों से हार्वर्ड वि·ाविद्यालय में सालाना भारतीय कविता पाठ का आयोजन कर रहे हैं।

वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-28 दूत हनुमान : भाग-7
व्यक्ति या समष्टि? किसी भी कार्य में किसका गुरुत्व है? व्यक्ति तो कार्य करता है, उसको समाज की जरूरत कब होती है? इन प्रश्नों के उत्तर वाल्मीकि रामायण में हनुमानजी के प्रसङ्ग में मिलते हैं। समाज में अनेक सदस्य होते हैं, सभी का कुछ न कुछ विशेष कौशल ह
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-27 दूत हनुमान : भाग-6
घरको वापिस आनेका रास्ता सबको मालूम रहता है। कामयाब होने पर वापसी हल्की होती है। घर जाना, साथियोंसे मिलना, अपने घरमें भोजन करना - प्राणियोंके मनकी पुकार होती है। हनुमानके मनमें भी। वह तेजीसे घर पहुँच गये। जाते समय समुन्दर पर निगाह कर करके कूद-कूद क
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-26 दूत हनुमान : भाग-5
इस संसार में सफलता का मूल मंत्र परिश्रम है, पर "मंजिल" तक पहुँचना इतना सीधा कार्य नहीं है। ऐसा जरूरी नहीं है कि हमेशा मेहनत का पूर्णतयः फल प्राप्त हो, अनेक उद्यमियों को कभी कभी बड़ी विषम परिस्थितियों का सामान करना पड़ता है और दूसरी ओर कुछ लोगों को आ
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-25 दूत हनुमान : भाग-4
हनुमान सुग्रीव का मन्त्री था। सीता की खोज में सुग्रीव ने हनुमान को दक्षिण दिशा की ओर भेजा था। दक्षिणी ओर में सुग्रीव का दख़ल नहीं था। उसने यह भी सुना था कि दक्षिण के अधिवासी रुक्ष थे। यद्यपि सीता की खोज हनुमान का पहला काम था, दक्षिणी दिशा के अधिवास

वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-24 दूत हनुमान : भाग-3
एक संदेशवाहक का मुख्य उद्देश्य सन्देश को सही व्यक्ति तक सही तरीके से सही समय पर पहुँचाना होता है। वह सन्देश पाने वाले को भलीभाँति पहचान कर ही सन्देश देता है। कुछ खास परिस्थितियों में पहचान करने में अत्यंत विश्लेषण व सावधानी की ज़रूरत होती है। हनुमा
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-23 दूत हनुमान : भाग-2
संयोग से कहानी बनती है। वाल्मीकि एक कुशल कहानीकार हैं। समस्या जटिल हो सकती है, लेकिन कुछ तो रास्ता निकलना ही चाहिये! कवियों के लिये दुनिया स्वाभाविक होती है। उलझनें आती हैं और जाती भी हैं। उलझन में अपनी बुद्धि को साहस से और मन को दृढता से तैयार रख
अनुवाद : संजीव त्रिपाठी वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-22 दूत हनुमान : भाग-1
कवि वाल्मीकि के अनुसार सीता की खोज में गये दूत हनुमान को दो तरह की अनुभूतियाँ हुईं। एक आतंरिक अनुभूति, जो भूख, प्यास, प्यार और दुःख के रूप में हमारे शरीर महसूस करता है और हमारे लिये एक अनुभव पैदा करती है। और दूसरी बाहरी अनुभूति, जो वातावरण, विभिन्
लंका में बन्दिनी सीता का संताप
वाल्मीकि मन के ज्ञाता हैं। ऐसा संभव है कि उनके समय मन की पीड़ा के बारे में सार्वजनिक विचार-विमर्श करने में समाज सक्रिय हो। और ऐसा भी संभव है कि वास्तविकता पर आधारित कहानी का आंतरिक विश्लेषण करना उस समय सराहनीय माना जाता रहा हो। भारतीय सभ्यता का यह

वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-20 लंका में सीता अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
रामायण की कहानी पात्र सीता के इर्द-गिर्द बुनी गई है। ऐसा संभव है कि कहानी में राम की महानता की ख्याति हो, पर वाल्मीकि जीवन में नारी की महत्ता को दर्शाना चाहते हों? जब उन्होंने "नारद" से उस पुरुष के बारे में बताने को कहा जिसमें अनेकानेक उत्कृष्ट पु
सीता की खोज में लंका में हनुमान वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-19 अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
रामायण की कहानी में वाल्मीकि का सबसे प्रशंसनीय और कलात्मक योगदान हनुमान का पात्र है। हनुमान पूर्ण विकसित मानव नहीं, अपितु वानर प्रजाति के थे। वानर एक ऐसी प्रजाति है जो मनुष्य नहीं है लेकिन मनुष्य के तुल्य बुद्धिमान और अंतज्र्ञानी है। संभवतः कवि एक
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-18 पुष्पक विमान अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
कहानी को पाठकों के लिए रोचक बनाये रखने के लिए लेखन कला में दक्ष लेखक कभी-कभी कहानी के विवरण को शब्दों से सजाते-सँवारते हैं। लेखक अतिश्योक्तिपूर्ण और बनावटी से दिखने वाले दृश्य को भी सजीव सा बना देता है। जैसे बड़ी भीड़ को "लाखों" की भीड़, ऊँचे भवन को
लंका का साम्राज्य
रामायण की कहानी का ऐतिहासिक महत्व जानना हमेशा ही चर्चा का विषय रहा है। इस कहानी में एक वीर पुरुष के यथार्थ जीवन के अनेकानेक रोचक प्रसंग दक्षिण भारत के अनेक रहस्यों से जुड़े हुये हैं। सभी रहस्यमयी वस्तुओं में से वृक्षों के ऊपर चलने वाला स्वचलित यान

वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-16 राक्षस और उनका कुल अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
वाल्मीकि एक "ऐन्द्रजालिक" जगत में रहते थे। उनके समय में आकाश से आकाशवाणी होती थी, वायु दौड़ती थी और जल गाना गाता था। समुद्र, पर्वत, वन और वृक्ष संवेदना दिखलाते थे। जीव-जंतु, पक्षी और जंगली जानवर मनुष्य के मित्र होते थे। वह आज के समय के परियों की कह
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15पञ्चवटी
चारू चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही है जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई थी अवनि और अंबर तल में - राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त यह लिखकर अमर हो गये। पञ्चवटी की शुरुआत हुई वाल्मीकि से। वाल्मीकि के भौगोलिक संधान में उनको ऐसी एक जगह की जरूरत थी, जहां कु
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15 दण्डकारण्य हिंदी अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
रामायण की कहानी मुख्यतः तीन भोगोलिक भूभागों में बुनी गई है, उनमें से प्रथम है "अयोध्या" और उसका समीपवर्ती क्षेत्र, दूसरा दक्षिण भारत का विस्तृत वनक्षेत्र "दण्डकारण्य" और तीसरा समुद्र में स्थित "लंका" द्वीप। अन्य संबन्धित क्षेत्र, कैकेय और मिथिला क
चित्रकूट पर राम-भरत मिलन
रामायण हमारे समाज की कहानी है। भाइयों की आपसी आदत, उनका बर्ताव और फिर उनमें स्नेह और सम्मान रामायण की कहानी है। बड़े भाई राम को अच्छा जाना जाता है, छोटे भाई उनको मानते हैं। आजकल के समाज का द्वेष, ईष्र्या और स्वार्थ चिन्ताएं वाल्मीकि की कहानी में प्

चित्रकूट पर्वत श्रृंखला
जैसा कि पहले अन्य लेखों में भी देखा जा चुका है, वाल्मीकि अपने कवित्त में प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन करने में अद्वितीय है। उनके वर्णन से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो कवि को राम का वन में इस तरह घूमना बहुत पसंद है, जिससे कि वह प्राकृतिक सुदंरता का वि
पुण्य सलिला गंगा
वाल्मीकि प्रकृति कवि हैं। उनके कवित्व से घटनाएँ स्वाभाविक हो जाती हैं। वह आका¶ा, तारों, पर्वतों, मेघों, वनों, वृक्षों, प¶ाुओं, सर्पों, पक्षियों, नदियों, मछलियों, नारियों और नरों के प्रेक्षक हैं। उनके निकले बाण विषैले सर्पों की तरह डँसते
जल की महिमा अंग्रेजी से अनुवाद - संजीव त्रिपाठी
शायद आदि मानव की पहली कुछ खोजों में यह शामिल रहा होगा कि, जीवित रहने के लिए वायु और जल का अलग-अलग महत्व है। वायु हमारे पास आती है और हम श्वाँस लेते है, परन्तु पानी की आवश्यकता पूर्ति करने के लिए हम को उसके पास जाना पड़ता है। मानव शरीर सामान्य सीमा
अयोध्या नगरी
रमायण ग्रन्थ की शुरुआत में ऋषि वाल्मीकि उस "आदर्श' मनुष्य की खोज के बारे में बताते हैं जो मनके चिंतन में है। उनको नारद ऋषि राम और रामायण कथा की रूपरेखा के बारे में बतलाते हैं। कहानी के नाटकीय विवरण के पश्चात, नारद ऋषि ने बताया कि राम "अयोध्या' नगर

ब्राहृर्षि वशिष्ठ
ब्रहृर्षि, वैदिक महाकाव्यों के अनुसार ऋषियों की श्रेणी में सबसे ऊँचा पद है, और इस पद पर साथी ऋषि उसको शोभित करते थे, जिसने जीवन में सबसे ज्यादा ज्ञान प्राप्त कर लिया हो। इस पद के लिये कोई विधिवत प्रतिस्पर्धा नहीं होती थी, यह तो किसी के ज्ञान और सृ
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