ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. सुरेश राय
डॉ. सुरेश राय

जन्म महडौर, जिला गाजीपुर। बनारस हिन्दू वि·ाविद्यालय, रुड़की वि·ाविद्यालय तथा कुरूक्षेत्र वि·ाविद्यालय से इलेक्ट्रॅनिक्स इंजीनियरिंग में क्रम¶ा: स्नातक, स्नातकोत्तर एवं आचार्य की उपाधि। अमेरिका में 1986 से कार्यरत। कविता और कहानी लेखन में रुचि। प्रका¶िात कविता संग्रह- "अनुभूति के दो स्वर' में एक स्वर स्वर्गीय जयन्ती राय (पत्नी) तथा दूसरा स्वर सुरे¶ा का। अमेरिका से प्रका¶िात हिन्दी पत्रिका "वि¶व-विवेक' का कई वर्षों तक सह-सम्पादन भी किया। सम्प्रति : लुजियाना स्टेट वि·ाविद्यालय, बैटनरूज के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर।


त्रिलोक-परम्परा : एक दृष्टिकोण

अथर्ववेद, श्रीमद्भागवत तथा पुराण में त्रिलोक-परम्परा यानि कि तीन विश्व यथा भूलोक, पाताल और देवलोक की व्यापक रूप से चर्चा हुयी है। गायत्री महामंत्र की तीन व्याहृतियों भू: (पार्थिव जगत), भुव: (प्राणम

कबीर की उलटबांसी

मसि कागज छूवो नहीं, कलम गही नहिं हाथ, के बावजूद कबीरदास का नाम हिंदी भक्त कवियों में बहुत ऊँचा है। वे सच्चे अर्थों में समाज-सुधारक तथा युग पुरुष थे। कबीर निर्गुण भक्ति धारा की ज्ञानमार्गी ¶ााख

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