ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. सुलभा कोरे
डॉ. सुलभा कोरे
मुंबई विशविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए. और एस.एन.डी.टी. से पी.एच.डी.। मराठी कविता-संग्रह स्पर्शिका, स्पर्श हरवलेले तथा हिंदी कविता-संग्रह एक नया आकाश, तासीर प्रकाशित। मराठी और हिंदी पत्र-पत्रिकाओं में विगत दो दशकों से निरंतर लेखन। अनेक पुस्तकों का हिंदी-मराठी-अंग्रेजी में अनुवाद। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी। कई महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित। सम्प्रति - यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में सेवारत।

निर्णायक मोड़ पर सभ्यता
भारत की सभ्यता के "हिमालय" पर आक्रमण करने वाली कोई बाहरी या विदेशी ताकत नहीं, बल्कि यह भारत की अपनी बात है, अंदरूनी बात है और यह अंदरूनी बात बड़ी सशक्त और ताकतवर है। यह इसकी विशेषता भी है और यह उसकी कमजोरी भी है। यह शक्ति या ताकत है- धर्म और धर्म क
मेरी कुछ पसंदीदा किताबें
पढ़ना मेरा शगल था। उस वक्त मैं बहुत छोटी थी, शायद दूसरी, तीसरी कक्षा में। पापा को पढ़ने का शौक aथा, वे लायब्ररी से पुस्तकें लाते थे। पुलिस की नौकरी, थककर आते थे और पढ़ते-पढ़ते सो जाते। उन्हें जासूसी कहानियाँ पढ़ना बड़ा अच्छा लगता था। उनके सोने के बाद ये
बारिश में मुंबई
समुंदर की लहरें उफान पर हैं। किनारे से टकराकर, किनारे को भिगोकर, कोलतार की स्याह सड़कों पर उछलकर फिर से लौट रही है, समुंदर में। किनारे से दूर खड़ी उस चाय की टपरी से "बरखा रानी, जरा जमके बरसो, मेरा दिलबर जा न पाये...' मुकेशा की आवाज कुछ इस तरह झरते ह
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