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डॉ. सीतेश आलोक
डॉ. सीतेश आलोक
प्रख्यात साहित्यकार। एम.ए., पीएच.डी., प्रयाग विश्व विद्यालय; संगीत विषारद, भातखंडे संगीत महाविद्यालय, पुणे। अनेक नामी विश्वविद्यालयों के विजिटिंग फैलो रहे। एक दर्जन से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित। प्रकाशित पुस्तकें : कहानी संग्रह - रेंगती हुई शाम, कैसे-कैसे लोग, अंधा सबेरा, नासमझ, तुम कहो तो, मुहिम, आधारशिला। उपन्यास - महागाथा। काव्य संकलन - बच गया आकाश, गाते गुनगुनाते, छोटा सा सपना, यथा सम्भव", बाजार में गुडिया। व्यंग्य संग्रह - परनिंदा परमं सुखम्। यात्रा-वृत्तांत- लिबर्टी के देश में। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन।

सुसंस्कार की कठिन डगर पर...
भारतीय संस्कृति की चर्चा हम सब आए दिन सुनते रहते हैं। कभी मंचों से, तो कभी चाय-वार्ताओं में या घरों की बैठक में। किन्तु दुर्भाग्य यह है कि हममें से अधिकांश यह नहीं जानते कि हमारी संस्कृति क्या है। इस अज्ञान के पीछे, हमारी सोच की जड़ों में बैठा वह न
फिजी में रामायण मेला
भारत से लगभग बारह हजार किलोमीटर सुदूर पूर्व दिशा में बसे छोटे से फिजी द्वीप में, अक्तूबर 2016 में, पहला अन्तर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन हुआ। यह सर्वविदित है कि हमारे देश से 1879-1916 के बीच लगभग साठ हजार नागरिक, अंग्रेज सरकार ने पानी के जहाज द्वारा
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