ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. शैलजा सक्सेना
डॉ. शैलजा सक्सेना
मथुरा में जन्म। दिल्ली वि·ाविद्यालय से बी.ए. ऑॅनर्स, एम.ए., एम.फिल तथा पी.एच.डी.। वि·ाविद्यालय में सर्वोच्च स्थान तथा स्वर्ण पदक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, कविताएँ तथा लेखों का प्रका¶ान। सरस्वती तथा मैथिली¶ारण गुप्त पुरस्कार से सम्मानित। कनाडा में हिंदी राइटर्स गिल्ड की संस्थापक निदे¶िाक। काव्य संग्रह क्या तुम को भी ऐसा लगा? प्रका¶िात। इंटरनेट पत्रिका "साहित्य कुंज' में सहयोग। सम्प्रति - टोरोंटो, कनाडा में निवास।

रोजनदारी की बातें
मई 6, 2000आज जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। दोनों छोटे बच्चों के साथ हम मिशीगन आ गये हैं। इनको यहाँ एक कम्पनी में काम मिल गया है और मैं अपनी नौकरी छोड़ कर, सब के उज्ज्वल भविष्य का सपना ले क
वह तैयार है
ईवान का चेहरा पीला पड़ा हुआ था। हाथों में थरथाराने की कंपन थी। उसने अपनी फाइलों और नोटबुक से अँटी मेज़ का कोना पकड़ लिया। कुछ पल वह ऐसे ही खड़ी रही। पीछे से उसे नैंसी का स्वर सुनाई दिया, "क्या हुआ ईवान?"ई
सुनो भई साधो
हिंदी के संत साहित्य में कबीर का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। चार प्रमुख भक्त कवियों में कबीर सबसे पहले आते हैं। भक्तिकाल का समय मुहम्मद बिन तुगलक से ¶ाुरू होकर मुगलों के ¶ाासनकाल तक माना ज
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